भारत के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक चौंकाने वाली जानकारी शेयर की, जिसमें उसने बताया कि करीब चार हजार खाताधारकों की जानकारी लीक हो गई है और इसे डार्क वेब पर डाला गया है. SBI ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी दी. इस खबर के फैलते ही उन लोगों में हड़कंप मच गया, जिनका खाता इस बैंक में है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि डार्क वेब क्या होता है और यहां कैसे आसानी से अपराध की इतनी बड़ी दुनिया चलती है.
क्या होता है डार्क वेब?
डार्क वेब को इंटरनेट की काली दुनिया भी कहा जाता है. यानी यहां वो सब कुछ होता है, जो किसी आम ब्राउजर में नहीं किया जा सकता. हत्या के कॉन्ट्रैक्ट से लेकर हथियारों की खरीद और लोगों के पर्सनल डेटा को इस दुनिया में अच्छी कीमत पर बेचा जाता है. आसान भाषा में समझें तो ये अवैध चीजों या सामान की बिक्री का सबसे बड़ा डिजिटल ठिकाना है.
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डार्क वेब गूगल और बाकी सर्च इंजन की पहुंच से बाहर की दुनिया है. यहां मौजूद लोगों की पहचान और लोकेशन पूरी तरह से गुप्त होती है. यही वजह है कि आसानी से यहां हथियारों की तस्करी से लेकर चोरी किए गए डेटा की बिक्री होती है. डार्क वेब तक पहुंचने के लिए खास सॉफ्टवेयर और ब्राउजर की जरूरत पड़ती है. इसके लिए सबसे ज्यादा Tor ब्राउजर का इस्तेमाल किया जाता है. आम वेबसाइट्स के आखिर में .com या फिर .in होता है, वहीं इसमें .onion से डोमेन खत्म होता है.
क्यों है पुलिस की पहुंच से दूर?
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की लाख कोशिशों के बावजूद डार्क वेब इनकी पहुंच से आज तक दूर है. इसमें ट्रैफिक कई तरह के एनक्रिप्टेड सर्वर और प्रॉक्सी से होकर गुजरता है, ऐसे में यूजर की असली लोकेशन या आईपी एड्रेस ट्रैक कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि ये क्राइम की दुनिया का सबसे बड़ा अड्डा बनता जा रहा है. इसे इंटरनेट की दुनिया का अंडरवर्ल्ड भी कहा जाता है.
फ्री में भी डाला जाता है डेटा
डार्क वेब में कई लोगों का पर्सनल डेटा मुफ्त में भी लीक कर दिया जाता है. कुछ हैकर्स बैंकों, कंपनियों और लोगों से चुराए गए डेटा को यहां डाल देते हैं, जिसे कोई भी एक्सेस कर सकता है. स्टेट बैंक के ग्राहकों का डेटा भी इसी काली दुनिया में तैर रहा है, जिससे लोगों के साथ धोखाधड़ी से लेकर बाकी तरह के खतरे पैदा हो गए हैं.
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