हत्या के मामले बहुत पेचीदा होते हैं. इन मामलों में पुलिस लंबी जांच-पड़ताल करती है. अपराध व अपराधी को लेकर कई टर्म का यूज किया जाता है. इन्हीं में से दो टर्म हैं- कोल्ड ब्लडेड मर्डर और हॉट ब्लडेड मर्डर. इन टर्म का यूज मर्डर मामलों की जांच के दौरान पुलिस के द्वारा किया जाता है. पर क्या आप इन टर्म में फर्क जानते हैं.
क्या होता है कोल्ड ब्लडेड मर्डर
कोल्ड ब्लडेड मर्डर का सीधा अर्थ है 'ठंडे दिमाग से की गई हत्या'. यह ऐसी हत्या होती है जो बिना किसी गुस्से, उत्तेजना या तात्कालिक उकसावे के पूरी प्लानिंग के साथ की जाती है.
पूर्व-नियोजित (Premeditated): हत्यारा पहले से ही पूरी योजना बनाता है कि मर्डर कब, कहां और कैसे करना है.
भावनाहीन (Unemotional): यह हत्या 'आवेश' (Heat of the moment) में नहीं की जाती. कातिल के मन में पीड़ित के प्रति कोई दया या पछतावा नहीं होता.
निर्मम (Ruthless): अक्सर ऐसी हत्याएं बहुत क्रूर और अमानवीय तरीके से की जाती हैं.
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क्या होता है हॉट ब्लडेड मर्डर
हॉट ब्लडेड अचानक गुस्सा, उकसावा या ईर्ष्या में की जाती है. इसमें अक्सर क्रिमिनल खुद पर से नियंत्रण खो देता है.
हत्या में सजा
भारतीय कानून (IPC 300 / BNS 101) के तहत, ऐसी हत्याएं 'गंभीरतम' श्रेणी में आती हैं. यदि कोई हत्या बहुत अधिक क्रूरता (Brutality) के साथ की गई है, तो अदालत इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (Rarest of Rare) मानकर अपराधी को फांसी की सजा भी सुना सकती है.
कहां से आया कोल्ड ब्लडेड मर्डर और हॉट ब्लडेड मर्डर टर्म
यह शब्द 16वीं-17वीं शताब्दी की चिकित्सा मान्यताओं से आया है. उस समय माना जाता था कि गुस्सा आने पर खून गर्म हो जाता है, जबकि शांत रहने पर खून ठंडा रहता है. इसलिए, बिना गुस्से के की गई हत्या को "कोल्ड ब्लड" में किया गया काम कहा जाने लगा. ट्रूमैन कैपोट का उपन्यास "In Cold Blood" एक वास्तविक हत्याकांड पर आधारित है, जिसने इस शब्द को दुनिया भर में और अधिक चर्चित बना दिया.
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