Expressway Name Selection Process: गंगा एक्सप्रेसवे के बाद देश में बैक-टू-बैक कई एक्सप्रेस-वे तक पर काम तेजी से हो रहा है. यूपी, बिहार से बंगाल तक नया एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी चल रही है. आगरा-बरेली को भी जोड़ने का प्लान चल रहा है. देश में जब भी कोई नया एक्सप्रेसवे बनता है, सबसे ज्यादा चर्चा उसके नाम की होती है. कोई सड़क गंगा एक्सप्रेसवे कहलाती है, कोई यमुना एक्सप्रेसवे, तो कोई पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे नाम से जानी जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इन सड़कों के नाम रखे कैसे जाते हैं. क्या सरकार कोई भी नाम उठाकर चुन लेती है या इसके पीछे कोई नियम और कारण भी होता है. अगर आप इस प्रोसेस से अनजान हैं, तो यहां जानिए इसका आसान जवाब.
एक्सप्रेसवे का नाम क्यों रखा जाता है
1. आम आदमी को तुरंत पता चल जाए कि यह सड़क उसे कहां ले जाएगी.
2. नदियों या ऐतिहासिक नाम से विदेशी सैलानियों को आकर्षित करना आसान होता है.
3. किसी राज्य या देश के विकास को एक 'ब्रांड' के तौर पर पेश करना.
एक्सप्रेसवे का नाम कैसे रखा जाता है
1. नदियों के नाम पर
भारत में नदियों को 'मां' माना जाता है और हमारे ज्यादातर शहर इन्हीं के किनारे बसे हैं. जब कोई एक्सप्रेसवे किसी बड़ी नदी के समानांतर (Parallel) चलता है या उस क्षेत्र की पहचान उस नदी से होती है, तो उसका नाम नदी पर रख दिया जाता है. जैसे यमुना एक्सप्रेसवे दिल्ली को आगरा से जोड़ता है और लगभग पूरी तरह यमुना नदी के बहाव वाले क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसलिए इसका नाम यमुना नदी के नाम पर है. गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है. चूंकि यह उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से को गंगा के किनारे-किनारे कनेक्ट है, इसलिए इसका नाम 'गंगा एक्सप्रेसवे' पड़ा.
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2. इलाके की पहचान या दिशा के आधार पर
कई बार नाम इसलिए रखे जाते हैं ताकि पता चल सके कि सड़क किस दिशा में जा रही है या किस खास इलाके को कवर कर रही है. इससे मुसाफिरों को रास्ता समझने में आसानी होती है जैसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लखनऊ को गाजीपुर (पूर्वी उत्तर प्रदेश) से जोड़ता है. चूंकि यह 'पूर्वांचल' के विकास की लाइफलाइन है, इसलिए इसे यह नाम मिला.
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे चित्रकूट से इटावा तक जाता है और बुंदेलखंड के सूखे और पिछड़े इलाकों को तरक्की की राह पर लाता है, इसलिए इसका नाम यह रखा गया.
3. कनेक्टिविटी यानी दो शहरों के नाम पर
कुछ नाम बहुत सिंपल होते हैं. जिन दो बड़े शहरों को सड़क जोड़ती है, उन दोनों के नामों को मिलाकर एक नया नाम बना दिया जाता है. जैसे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के नाम से ही साफ है, यह ताजनगरी आगरा को नवाबों के शहर लखनऊ से जोड़ता है.
4. ऐतिहासिक या सांस्कृतिक पहचान
सरकारें कई बार किसी क्षेत्र की ऐतिहासिक अहमियत को दिखाने के लिए भी नाम तय करती हैं. जैसे भगवान राम के नाम पर या किसी महान व्यक्तित्व के नाम पर एक्सप्रेसवे का नाम रख दिया जाता है.
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