60 को संस्कृत में क्या कहते हैं? यह सवाल कई लोगों के मन में आता है. सामान्य बोलचाल में हम इसे ‘साठ' कहते हैं, लेकिन संस्कृत में इसका एक खास नाम है - ‘षष्टि'. यही नहीं, 60 की उम्र से जुड़ी ‘सठिया जाना' जैसी कहावत का भी इसी नंबर से गहरा कनेक्शन है.
वैसे तो 60 महज गणित का एक नंबर है, लेकिन इंसान के जीवन में इस आंकड़े की अहमियत किसी मील के पत्थर (Milestone) से कम नहीं मानी जाती. समाज में इस उम्र तक पहुंचते पहुंचते किसी को मजाकिया लहजे में "सठिया गया" कहकर छेड़ा जाता है, तो कानूनन उसे 'सीनियर सिटीजन' का सम्मानजनक दर्जा मिल जाता है. नौकरीपेशा लोगों के लिए यह अक्सर रिटायरमेंट (Retirement) की उम्र होती है, तो कई परिवारों में साठवां जन्मदिन किसी बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस 60 नंबर के इर्द गिर्द हमारी पूरी सामाजिक जिंदगी घूमती है, उसे हमारी सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत में क्या कहते हैं? और इस नंबर का हमारी परंपराओं से क्या कनेक्शन है? आइए जानते हैं इस दिलचस्प नंबर का पूरा सच.
संस्कृत में 60 को क्या कहते हैं? (60 in Sanskrit)
सामान्य बोलचाल में जिसे हम साठ कहते हैं, संस्कृत में उसे 'षष्टि' (Shashti) कहा जाता है.
यह शब्द सिर्फ एक गिनती भर नहीं है, बल्कि भारतीय परंपरा, ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में इसका बेहद खास और पवित्र स्थान है. हमारे प्राचीन ग्रंथों में समय की गणना से लेकर इंसान की उम्र के पड़ावों तक में 'षष्टि' शब्द का बार बार उल्लेख मिलता है.
क्या होता है 'षष्टिपूर्ति' समारोह? क्यों है यह बेहद खास?
भारतीय संस्कृति में 60 वर्ष की आयु पूरी होने को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया है. इसी वजह से देश के कई हिस्सों में 'षष्टिपूर्ति' (Shashti Poorthi) समारोह आयोजित किया जाता है.
षष्टि का मतलब: यहाँ "षष्टि" का मतलब 60 और "पूर्ति" का मतलब पूरा होना है. यानी जीवन के शानदार 60 वर्ष पूरे होने का भव्य उत्सव.
कहां है सबसे ज्यादा लोकप्रिय: खासकर दक्षिण भारत (South India) में यह परंपरा बेहद चाव से निभाई जाती है. जब घर के बुजुर्ग 60 साल के होते हैं, तो उनके बच्चे और रिश्तेदार जुटकर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान करते हैं.
पुनर्विवाह की परंपरा: कई समाजों में इस दिन बुजुर्ग पति पत्नी का दोबारा प्रतीकात्मक विवाह (Remarriage) कराया जाता है, ताकि वे अपने जीवन के अनुभवों के साथ नए दौर में कदम रख सकें और उनके लंबे व स्वस्थ जीवन की कामना की जा सके.
'सठिया जाना' कहावत का 60 से क्या है रिश्ता, क्या है सठियाना का मतलब?
हम सबने अपने जीवन में कभी न कभी "सठिया गया है क्या?" या "बुद्धि सठिया गई है" जैसे ताने या मुहावरे जरूर सुने होंगे. क्या आप जानते हैं कि इस मशहूर कहावत का सीधा कनेक्शन इसी 60 नंबर से है?
कहावत का सच: माना जाता है कि पुराने जमाने में जब लोग 60 (साठ) की उम्र पार करते थे, तो शारीरिक और मानसिक थकान के कारण उनके व्यवहार में थोड़ा बदलाव या चिड़चिड़ापन आ जाता था. इसी 'साठ' शब्द से अपभ्रंश होकर बोलचाल में 'सठियाना' शब्द बना.
क्या आज भी यह सच है?
बिल्कुल नहीं! विज्ञान और आज का आधुनिक लाइफस्टाइल इस कहावत को पूरी तरह गलत साबित करता है. आज के दौर में 60 की उम्र के बाद लोग अपनी जिंदगी की दूसरी और सबसे खूबसूरत पारी (Second Innings) शुरू करते हैं. चाहे राजनीति हो, बिजनेस हो या सिनेमा- आज दिग्गज लोग 60 और 70 की उम्र के बाद भी पूरी दुनिया पर राज कर रहे हैं.
सिर्फ एक संख्या नहीं, अनुभवों का खजाना है 60!
60 का आंकड़ा गणित की किताबों से परे एक ऐसा मुकाम है, जहां पहुंचकर इंसान अपनी जिम्मेदारियों (बच्चों की पढ़ाई, शादी आदि) से काफी हद तक मुक्त हो जाता है. यह उम्र समाज को अपने लंबे अनुभवों से कुछ वापस देने की होती है. शायद यही वजह है कि हमारे पूर्वजों ने इस उम्र को इतनी अहमियत दी और संस्कृत में इसके लिए 'षष्टि' जैसा खूबसूरत नाम रखा.
अगली बार जब आपके घर में कोई 60 साल का हो, तो "सठियाने" का ताना देने के बजाय उनके लिए एक शानदार 'षष्टिपूर्ति' उत्सव का प्लान जरूर बनाइएगा!
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