Success Story Bihar: बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2026 के परिणाम ने नवादा जिले के वारिसलीगंज प्रखंड के मकनपुर गांव को खास पहचान दिलाई है. गांव के दो दोस्तों सूरज कुमार और शुभम कुमार का राजनीति विज्ञान विषय में सहायक प्राध्यापक पद पर चयन हुआ है. दोनों की सफलता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे बचपन से साथ पढ़े, उच्च शिक्षा के लिए साथ दिल्ली गए, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी साथ की और अब एक ही विषय में सहायक प्राध्यापक बनने का सपना भी साथ पूरा किया.
एक ही स्कूल से शुरू हुआ सफर, दिल्ली तक साथ पहुंची दोस्ती
मकनपुर गांव के रहने वाले सूरज और शुभम ने प्रारंभिक शिक्षा वारिसलीगंज स्थित विवेकानंद पब्लिक स्कूल से प्राप्त की. स्कूल के दिनों में शुरू हुई यह दोस्ती उच्च शिक्षा तक कायम रही. दोनों ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया. इसके बाद दोनों ने यूजीसी-नेट और जेआरएफ जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं और सहायक प्राध्यापक भर्ती की तैयारी जारी रखी. अब दोनों का चयन बिहार सरकार के नए डिग्री महाविद्यालयों के लिए सहायक प्राध्यापक के रूप में हुआ है.

Success Story bihar assistant professor recruitment result 2026 nawada friends
Photo Credit: NDTV
अलग-अलग पारिवारिक पृष्ठभूमि, लेकिन लक्ष्य एक
सूरज कुमार दिवंगत साहित्यकार राम रतन प्रसाद सिंह के पौत्र हैं. उनके पिता सुजीत कुमार पत्रकार हैं, जबकि माता स्वर्णलता कुमारी गृहिणी हैं. वहीं शुभम कुमार, किसान सर्वेश कुमार और शिक्षिका सविता कुमारी के पुत्र हैं. दोनों परिवारों का कहना है कि बच्चों ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और सफलता के लिए लगातार मेहनत की. गांव के लोगों के अनुसार, दोनों मित्र एक-दूसरे के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहे.

Success Story bihar assistant professor recruitment result 2026 nawada friends
मेहनत और अनुशासन का कोई विकल्प नहीं
सूरज और शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को दिया. उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतर अध्ययन, अनुशासन और धैर्य सबसे महत्वपूर्ण हैं. उनका मानना है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बनते, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी ईमानदारी से की जाए.
बहरहाल, मकनपुर गांव के दो दोस्तों की यह कहानी बताती है कि प्रतियोगिता के इस दौर में भी आपसी सहयोग, निरंतर मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने वाले युवा सफलता की नई मिसाल कायम कर सकते हैं.
जेएनयू से पीएचडी करने वाले रूपेश रंजन का भी हुआ चयन
नवादा जिले को राजनीति विज्ञान विषय में एक और सफलता मिली है. वारिसलीगंज प्रखंड के कुटरी गांव निवासी रूपेश रंजन का भी सहायक प्राध्यापक पद पर चयन हुआ है. रूपेश, सचिवालय के प्रशाखा पदाधिकारी पद से सेवानिवृत्त कुमुद रंजन और शिक्षिका किरण कुमारी के पुत्र हैं. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से राजनीति विज्ञान में पीएचडी की है. उनके चयन से कुटरी गांव और आसपास के क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है.
यह भी पढ़ें- IAS अपूर्वा पाण्डे उत्तराखंड की सबसे युवा कलेक्टर, जानिए 'मन्नू' से यंगेस्ट DM बनने तक की पूरी कहानी
यह भी पढ़ें- Success Story: Gen Z IPS शैलजा दास के वायरल VIDEO से मचाया गदर! 23 की उम्र में क्रैक की UPSC
यह भी पढ़ें- Success Story: किसान की बेटी IAS मिशा सिंह बनीं जिला कलेक्टर, बताया-कैसे हैंडल करती हैं पॉलिटिकल प्रेशर?
यह भी पढ़ें- Success Story: देसी मुर्गों के दम पर बने करोड़पति! छोड़ी बैंक वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी, 18 लाख का पैकेज
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं