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र‍िटायरमेंट के एक महीने बाद श‍िक्षक को म‍िला न‍ियुक्‍त‍ि पत्र, न तो पढ़ा सकेंगे और न ही म‍िलेगा वेतन  

झारखंड में 26000 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. अब तक लगभग 12500 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है, और लोगों को न‍ियुक्‍त‍ि पत्र द‍िया जा रहा है. इसमें एक ऐसे शिक्षक को नियुक्ति पत्र मिला, जो रिटायर हो चुके हैं.

र‍िटायरमेंट के एक महीने बाद श‍िक्षक को म‍िला न‍ियुक्‍त‍ि पत्र, न तो पढ़ा सकेंगे और न ही म‍िलेगा वेतन  
शिक्षक नियूम अंसारी एक महीने पहले रिटायर हो चुके उन्हें अब नियुक्ति पत्र मिला.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को 1045 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपा है. इस दौरान नियुक्ति प्रक्रिया में देरी का अनोखा मामला सामने आया है. पलामू से नियुक्ति पत्र लेने आए शिक्षक  नियूम अंसारी 31 मई को ही 60 वर्ष हो चुके हैं. वे नियुक्ति पत्र पाने से एक महीने पहले ही रिटायर हो चुके है. उन्हें रिटायर होने के करीब एक महीने बाद नियुक्ति पत्र मिला. 

सेवा विस्तार की मांग 

शिक्षक का कहना है कि चयन प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती, तो उन्हें नियमित रूप से सेवा देने का अवसर मिलता. अब उन्होंने राज्य सरकार से सेवा विस्तार देने की मांग की है, ज‍िससे उन्हें नियुक्ति का वास्तविक लाभ मिल सके. नियूम अंसारी जिनको सहायक आचार्य पद के लिए नियुक्ति पत्र मिला है, उन्होंने  सरकार से अपील करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी उनकी गलती नहीं है, इसलिए उन्हें न्याय दिलाते हुए सेवा अवधि बढ़ाई जाए या ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे उनकी मेहनत और चयन व्यर्थ न जाए.

कल मिला लेटर, आज हो जाएंगे रिटायर्ड 

जामताड़ा जिले से आये नंदलाल रवानी को 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन 30 जून को उनकी उम्र 60 वर्ष पूरी हो गई. यानी नियुक्ति के अगले ही दिन नंदलाल रिटायर हो जाएगे. आज से र‍िटायर हो जाएंगे.

नियुक्ति में हुई देरी 

नंदलाल रवानी ने बताया कि उन्होंने साल 2016 में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) पास की थी. इसके बाद लंबे समय तक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करना पड़ा. साल 2023 में सहायक आचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के चलते नियुक्ति में काफी देरी हो गई. 

अब नंदलाल रवानी ने राज्य सरकार से सेवा विस्तार की मांग की है. उनका कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती तो उन्हें कई साल तक सेवा देने का अवसर मिलता. अब उनकी उम्मीद सरकार के फैसले पर टिकी है.

नियुक्ति प्रक्रिया में हुई देरी 

नियूम अंसारी और नंदलाल रवानी का मामला सिर्फ 2 शिक्षकों की व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि वर्षों तक लंबित रही, नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक देरी का परिणाम है. यदि समय पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होती, तो उन्हें नियुक्ति पत्र मिलने के अगले ही दिन सेवानिवृत्त होने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. यह मामला पूरी भर्ती व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. 

अधिकतम आयु सीमा 58 साल 

दरअसल, सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में पारा शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित हैं, और उनके लिए अधिकतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित की गई है. इसी प्रावधान के तहत कई पारा शिक्षकों ने वर्ष 2023 में 57 से 58 वर्ष की आयु के बीच आवेदन किया था. लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया में करीब तीन साल की देरी होने के कारण अब वर्ष 2026 में उनकी उम्र 60 वर्ष तक पहुंच चुकी है. नतीजतन, ऐसे कई शिक्षकों को नियुक्ति-पत्र तो मिल गया, लेकिन सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के कारण वे नियुक्ति के साथ ही रिटायर भी हो रहे हैं. यही वजह है कि वर्षों तक लंबित रही नियुक्ति प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

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