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झारखंड बीजेपी को जल्द मिलेगा नया अध्यक्ष, आदित्य साहू के नाम पर लग सकती है मुहर

Jharkhand BJP President: आदित्य साहू की नियुक्ति कर बीजेपी ने यह संदेश दिया था कि सामान्य कार्यकर्ता भी संगठन की कमान संभाल सकता है. जिला स्तर से राजनीति की शुरुआत करने वाले आदित्य साहू ने प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई और बाद में उन्हें पार्टी ने राज्य सभा भेजा.

झारखंड बीजेपी को जल्द मिलेगा नया अध्यक्ष, आदित्य साहू के नाम पर लग सकती है मुहर

Jharkhand BJP President: झारखंड बीजेपी को जल्दी ही नया पूर्णकालिक अध्यक्ष मिलने जा रहा है. संगठन पर्व के तहत प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा. माना जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है. इसके लिए शनिवार केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम को चुनाव अधिकारी नियुक्त कर दिया गया. ओराम जल्दी ही रांची पहुंच कर प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को संपन्न कराएंगे. माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के तुरंत बाद झारखंड बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है. इससे पहले बीजेपी ने 23 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति भी कर दी है जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं.

दरअसल, बीजेपी झारखंड में संगठन की कमान किसे दें, इसे लेकर दुविधा रही है. प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को विधानसभा में नेता विपक्ष भी बनाया गया. एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत मरांडी की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनना था, लेकिन बीजेपी राज्य में पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं बना पाई है. पहले रविंद्र कुमार राय को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया और उनके बाद पिछले साल अक्तूबर में राज्य सभा सांसद आदित्य साहू को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई. 

कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार

एक के बाद एक दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा था कि आखिर क्या कारण है कि बीजेपी इस महत्वपूर्ण राज्य में पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं बना पा रही है. यूपी, गुजरात, कर्नाटक, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी के संगठन चुनाव लंबे समय से लटके हुए थे. इनमें यूपी और गुजरात को नए अध्यक्ष मिल गए और राष्ट्रीय स्तर पर भी कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में अब भी प्रदेश अध्यक्ष बनने बाकी हैं.

आदित्य साहू की नियुक्ति कर बीजेपी ने यह संदेश दिया था कि सामान्य कार्यकर्ता भी संगठन की कमान संभाल सकता है. जिला स्तर से राजनीति की शुरुआत करने वाले आदित्य साहू ने प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई और बाद में उन्हें पार्टी ने राज्य सभा भेजा. माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में वे सबसे आगे हैं और उन्हें ही पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी जाएगी. उनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का नाम भी लिया जा रहा है, जिन्होंने राज्यपाल का पद बीच में ही छोड़ दिया था. 

कई और नामों की चर्चा

इसी तरह पूर्व सीएम और कैबिनेट मंत्री अर्जुन मुंडा और प्रदीप वर्मा के नामों की भी चर्चा है. आदित्य साहू और रघुवर दास ओबीसी हैं, जबकि मुंडा आदिवासी. चुनाव अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जुएल ओराम ओडिशा के बड़े आदिवासी नेता हैं. इसके जरिए भी बीजेपी ने इस आदिवासी बहुल राज्य में एक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है.

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