इससे पहले फारुख अब्दुल्ला ने पंचायत और निकाय चुनाव के बहिषकार की धमकी दी थी
श्रीनगर:
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार धारा 35ए पर अपना रुख साफ नहीं करती है तो उनकी पार्टी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव का भी बहिष्कार भी कर देगी. इससे पहले बुधवार को फारुक अब्दुल्ला ने कहा था कि पार्टी राज्य में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों का बहिष्कार करेगी. अब्दुल्ला ने पार्टी की बैठक के बाद कहा, ‘‘कोर ग्रुप ने सर्वसम्मति से यह फैसला किया है कि अगर भारत सरकार और राज्य सरकार इस बाबत अपनी स्थिति साफ नहीं करते हैं और अदालत के भीतर तथा बाहर अनुच्छेद 35-ए की रक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाते हैं तो नेशनल कान्फ्रेंस इन चुनावों में भाग नहीं लेगी. ’’
संविधान के आर्टिकल 35ए के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली
उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने शहरी स्थानीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव कराने का फैसला ‘‘ जल्दबाजी ’’ में लिया. राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते राज्य में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की थी. शहरी स्थानीय चुनाव अक्तूबर के पहले हफ्ते में होने हैं वहीं पंचायत चुनाव इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में होंगे.
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अब्दुल्ला ने कहा कि कोर ग्रुप ने राज्य में बने हालात पर विस्तृत चर्चा की, खासकर अनुच्छेद 35-ए के बारे में. उन्होंने कहा, ‘‘ यह महसूस हुआ कि अनुच्छेद 35-ए में कोई भी छेड़छाड़ ना केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए विनाशकारी साबित होगी.’’ अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के वर्तमान प्रशासन का उच्चतम न्यायालय के समक्ष जो रूख है वह ‘‘ स्पष्ट रूप से राज्य के लोगों की आकांक्षाओं और इच्छाओं के विरुद्ध'' है.
सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 35-ए पर सुनवाई टली
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उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन ने शहरी स्थानीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव कराने का फैसला ‘‘ जल्दबाजी ’’ में लिया. राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते राज्य में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की थी. शहरी स्थानीय चुनाव अक्तूबर के पहले हफ्ते में होने हैं वहीं पंचायत चुनाव इस वर्ष नवंबर-दिसंबर में होंगे.
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अब्दुल्ला ने कहा कि कोर ग्रुप ने राज्य में बने हालात पर विस्तृत चर्चा की, खासकर अनुच्छेद 35-ए के बारे में. उन्होंने कहा, ‘‘ यह महसूस हुआ कि अनुच्छेद 35-ए में कोई भी छेड़छाड़ ना केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए विनाशकारी साबित होगी.’’ अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के वर्तमान प्रशासन का उच्चतम न्यायालय के समक्ष जो रूख है वह ‘‘ स्पष्ट रूप से राज्य के लोगों की आकांक्षाओं और इच्छाओं के विरुद्ध'' है.
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