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हर शहर में सिविल लाइन्स इलाके का नाम बदला जाएगा, जानिए सरकार क्यों कर रही है ऐसी तैयारी?

केंद्र सरकार सिविल लाइन्स नाम बदलने पर विचार कर रही है, ताकि औपनिवेशिक विरासत को समाप्त किया जा सके. यह अभियान प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक निशानियां हटाने के लक्ष्य से जुड़ा है.

हर शहर में सिविल लाइन्स इलाके का नाम बदला जाएगा, जानिए सरकार क्यों कर रही है ऐसी तैयारी?
  • केंद्र सरकार औपनिवेशिक विरासत समाप्त करने के तहत सिविल लाइन्स नाम बदलने पर विचार कर रही है
  • प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक गुलामी की निशानियों को हटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है
  • राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया और भारतीय नौसेना के ध्वज में बदलाव किया गया
नई दिल्‍ली:

केंद्र सरकार औपनिवेशिक विरासत को समाप्त करने के अपने अभियान के तहत अब 'सिविल लाइन्स' नाम को बदलने पर विचार कर रही है. अंग्रेज़ों के जमाने में वरिष्ठ नौकरशाहों के रिहाइशी इलाके सिविल लाइंस में बनाए जाते थे. दिल्ली और कई अन्य बड़े शहरों में सिविल लाइन्स इलाके हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक गुलामी की निशानियों को हटाने की बात कही है. 

गुलामी की निशानी मिटाने का एक और प्रयास

प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर मंत्रालयों द्वारा ऐसे प्रतीकों की पहचान की जा रही है, जिन्हें भारतीय संस्कृति से जुड़े नामों से बदला जा सके. अब तक ऐसी कई निशानियों को बदला जा चुका है. राजपथ का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किया गया. यह औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक है. भारतीय नौसेना के ध्वज से सेंट जॉर्ज क्रॉस (अंग्रेजी निशानी) को हटाकर छत्रपति शिवाजी महाराज से प्रेरित नया ध्वज (निशान) अपनाया गया. 

PMO को सेवा तीर्थ नाम दिया गया

औपनिवेशिक काल के 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त किया गया है. इंडिया गेट की ग्रैंड कैनोपी में ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम की प्रतिमा की जगह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित की गई. रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर 'लोक कल्याण मार्ग' किया गया. नए पीएमओ को सेवा तीर्थ नाम दिया गया है. मंत्रालयों के नए भवनों को कर्तव्य भवन कहा गया है. नई संसद भवन का निर्माण भी गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति और आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम माना गया.

सिविल लाइन्स का इतिहास 

सिविल लाइन्स भारत के कई शहरों में पाया जाने वाला एक इलाका है, जिसका इतिहास ब्रिटिश औपनिवेशिक काल से जुड़ा है. 18वीं और 19वीं शताब्दी में जब अंग्रेजों ने भारत में शहरों का विकास किया, तब उन्होंने शहरों को कई हिस्सों में बांट दिया था. पहला हिस्‍सा सिविल लाइन्‍स था, उस जमाने में Civil Lines का मतलब था- वह क्षेत्र जहां ब्रिटिश सिविल सर्विस के अफसर, यानी कलेक्टर, जज, कमिश्नर आदि रहते थे. ये इलाके 'मिलिट्री लाइन्‍स' यानी छावनी क्षेत्र से अलग बनाए गए थे, जहां सेना रहती थी. तीसरा हिस्सा पुराना भारतीय शहर होता था, जिसे 'ओल्‍ड सिटी' कहा जाता था, जैसे 'पुरानी दिल्‍ली'. सिविल लाइन्स इलाके पूरी प्‍लानिंग के साथ बसाए गए थे. इनकी पहचान- चौड़ी सड़कें और बड़े-बड़े बंगले थे. क्लब, चर्च, अदालत, कलेक्ट्रेट, सर्किट हाउस सब यहीं होते थे. 

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