- लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर दो दिन चर्चा के बाद इसे पेश किया गया, जिसे दो तिहाई बहुमत नहीं मिला
- भाजपा ने बिल के गिरने के बाद भी इसे लेकर जनता के बीच जाकर विपक्ष को घेरने की रणनीति बनाई है
- गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर महिला आरक्षण बिल के विरोध का आरोप लगाया और कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख किया
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर दो दिन की चर्चा के बाद इसे सदन में पेश किया गया. इस बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े. वहीं विपक्ष में 230 वोट पड़े. यानी यह बिल दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया. भले ही संसद में महिला आरक्षण बिल गिर गया हो, लेकिन बीजेपी ने आगे की सियासी रणनीति तैयार कर ली है. सरकार इस बिल को लेकर जनता के बीच जाएगी और विपक्ष को सड़क पर घेरेगी. सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद NDA की बैठक भी है, जिसमें आगे रणनीति पर चर्चा होगी. इसका संकेत आज गृहमंत्री अमित शाह के भाषण में भी देखने को मिला. उन्होंने कई बार इस बात को कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ है.
जनता के बीच महिला आरक्षण का मुद्दा लेकर उतरेगी बीजेपी
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव जारी हैं. ऐसे में बीजेपी इन चुनावों में भी जनता के बीच यह मुद्दा लेकर जाएगी. बीजेपी जनता के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी कि विपक्ष महिला विरोधी है और उन्होंने इस ऐतिहासिक सुधार को रोक दिया. पीएम मोदी बंगाल चुनाव के पहले चरण के दिन भी राज्य के दौरे पर रहेंगे. वे 23 अप्रैल को नदिया जिले के कृष्णानगर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद 24 अप्रैल को 24 परगना में भी उनकी एक सभा है. इन सभाओं में पीएम मोदी महिला आरक्षण बिल का मुद्दा उठा सकते हैं.
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— SansadTV (@sansad_tv) April 17, 2026
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर मतदान:
पक्ष मेंः
298 विरोध मेंः 230
सदन में मतदान के दौरान दो तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हुआ.
इसलिए संघ राज्य क्षेत्र विधि संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026, जो संविधान (131वां… pic.twitter.com/glaycSjFre
पीएम मोदी ने महिलाओं को लेकर सांसदों से की थी खास अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बिल को लेकर देश की महिलाओं से खास अपील की थी. उन्होंने दिन में ट्वीट करते हुए सभी सदस्यों से अपील की थी कि अपने घर की मां, बहन, बेटी और पत्नी की याद को मन में रखते हुए, अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें. यह देश की नारी शक्ति की सेवा करने और उन्हें सम्मान देने का एक सुनहरा अवसर है. उन्हें नए अवसरों से वंचित न करें. उन्होंने कहा था कि मैं सभी सदस्यों से यह भी अनुरोध करता हूं कि वे ऐसा कोई भी काम न करें, जिससे पूरे भारत की महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचे.

अमित शाह ने संसद में विपक्ष को घेरा
वहीं इस बिल पर जवाब देते हुए अमित शाह ने विपक्ष को जमकर घेरा. उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण की विरोधी है. विपक्ष किंतु परंतु करके इस बिल का विरोध कर रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास ही महिला आरक्षण का विरोध वाला रहा है. सबसे पहले 1992 में संविधान संशोधन लेकर आए और महिलाओं को पंचायतों में 33 फीसदी आरक्षण देने का काम किया. वो कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे, लेकिन उनको कांग्रेस ने कभी स्वीकार नहीं किया. इसके बाद 1996 में देवगौड़ा पीएम बने और उन्होंने भी संशोधन पेश किया. गीता मुखर्जी कमेटी बनी. रिपोर्ट आई तब तक लोकसभा का विघटन हो चुका था. 1999 से 2003 में फिर संशोधन विधेयक आया फिर उन्हीं पार्टियों ने विरोध किया. मनमोहन सरकार में भी बिल आया लेकिन राज्यसभा तक सीमित रहा, लोकसभा में नहीं आया. उस वक्त कांग्रेस की समर्थक पार्टियों ने ही मनमोहन सरकार के बिल का विरोध किया. इसके बाद 2023 में मोदी सरकार बिल लेकर आई, तब चुनाव की वजह से कांग्रेस ने विरोध नहीं किया. लेकिन अब यही कांग्रेस विरोध कर रही है.
अमित शाह ने अपने भाषण के दौरान यह प्रस्ताव भी दिया था कि अगर विपक्ष तैयार होता है तो हम महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण और परिसीमन में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने के लिए भी तैयार हैं. हम महज एक घंटे में यह प्रस्ताव सदन में पेश कर सकते हैं. लेकिन विपक्ष इसके लिए राजी नहीं हुआ.
बीजेपी बना रही विपक्ष को घेरने की रणनीति
केंद्र सरकार इस बिल को लेकर कितनी संजीदा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संसद में बिल गिरने के तुरंत बाद NDA की बैठक होगी. यह NDA ने पहले ही तय कर लिया था. लोकसभा में बिल गिरने के बाद कांग्रेस ने विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है. बीजेपी ने बिल पेश होने से पहले भी देशभर में महिलाओं के कार्यक्रम किए थे, जिसमें इस बिल के बारे में बताया था. ऐसे में बीजेपी फिर महिलाओं के बीच जाकर अपनी संदेश देने की कोशिश करेगी. अगर ऐसा हुआ तो विपक्षी पार्टियों के लिए यह जरूर थोड़ी मुश्किल पैदा करेगा.
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