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पंजाब की बजाय उत्तराखंड में सिखों का सम्मेलन क्यों कर रहे हैं नितिन नवीन, क्या है प्लान

उत्तराखंड के साथ ही अगले साल पंजाब में भी विधानसभा चुनाव है. इसलिए सिखों को लेकर उठाया गया कोई भी कदम भले ही उत्तराखंड में हो या यूपी में, लेकिन उसका सीधा असर पंजाब तक दिखेगा.

पंजाब की बजाय उत्तराखंड में सिखों का सम्मेलन क्यों कर रहे हैं नितिन नवीन, क्या है प्लान
  • भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने रुद्रपुर में सिख गौरव सम्मेलन में हिस्सा लेकर सिख समुदाय को साधने का प्रयास किया
  • उत्तराखंड की नौ विधानसभा सीटों पर सिखों का खास प्रभाव है, जो उधम सिंह नगर जिले में स्थित हैं
  • भाजपा ने पंजाब और उत्तराखंड में सिख समुदाय के साथ मजबूती से खड़े होने का संदेश दिया है
देहरादून/नई दिल्ली:

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को उत्तराखंड के रुद्रपुर में सिख गौरव सम्मेलन में हिस्सा लिया. इस दौरान राज्य के सीएम पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे. पूर्व सैनिकों, बुजुर्गों, महिलाओं और अलग-अलग समुदायों को साध रही भाजपा का यह सिख दांव भी महत्वपूर्ण है. ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तराखंड की ही 9 विधानसभा सीटों पर सिखों का अच्छा प्रभाव है. ये सभी सीटें उधम सिंह नगर जिले में आती हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तराखंड में सिखों की आबादी 2.34 फीसदी है. लेकिन 9 सीटों पर सीधा असर है और कई अन्य शहरी इलाकों में भी प्रभाव है. ऐसे में सिखों का यह सम्मेलन मायने रखता है. 

यही नहीं उत्तराखंड के अलावा पंजाब में भी इसका असर दिख सकता है. उत्तराखंड में सिख समाज का सम्मेलन करके भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जहां समुदाय अल्पसंख्यक है, वहां भी हम उसके साथ खड़े हैं. इस तरह पंजाब में भी हम आपके साथ हैं. रवनीत सिंह बिट्टू, कंवलजीत सिंह ढिल्लो जैसे सिख नेताओं को भाजपा पहले ही कमान दे चुकी है. उसकी कोशिश है कि शहरी और सवर्ण हिंदुओं के अलावा सिखों को भी साध लिया जाए. इसके अलावा अकाली दल के भी साथ आने की अटकलें हैं. साफ है कि भाजपा ने सिखों को साधने के लिए हर कोशिश की है और यह सिलसिला जारी है. 

उत्तराखंड के साथ पंजाब में भी चुनाव, इसलिए सिखों का मसला अहम

उत्तराखंड के साथ ही अगले साल पंजाब में भी विधानसभा चुनाव है. इसलिए सिखों को लेकर उठाया गया कोई भी कदम भले ही उत्तराखंड में हो या यूपी में, लेकिन उसका सीधा असर पंजाब तक दिखेगा. बता दें कि नितिन नवीन ने हर की पौड़ी में ज्ञान गोदरी साहिब गुरुद्वारा बनाने में मदद का भरोसा सिखों को दिया है. यहां राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की मदद से गुरुद्वारे के निर्माण के लिए 2003 में ही जगह चुनी गई थी. तब तरलोचन सिंह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन थे. हालांकि अभी यह मामला यूपी सरकार के स्तर पर रुका हुआ है. कहा जा रहा है कि यूपी सरकार ने पजेशन लेटर जारी नहीं किया है.  

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हर की पैड़ी में गुरुद्वारे के लिए मदद का भी भरोसा

इस स्थान पर लंबे समय से सिख प्रार्थना करते रहे हैं. लेकिन यह भूमि यूपी सरकार के अधिकार क्षेत्र में रही है. यूपी से अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत है, जो अब तक नहीं मिला है. उत्तराखंड में सिखों का कहना है कि यह भूमि हमें स्थायी तौर पर मिल जानी चाहिए. स्थानीय सिखों की लंबे समय से मांग है कि यह मसला अब समाप्त होनी चाहिए. कहा जाता है कि हर की पैड़ी पर गुरु नानक ने अपनी धार्मिक यात्रा के दौरान विश्राम किया था. इसलिए सिखों के धार्मिक इतिहास में इस जगह का विशेष महत्व है.

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