- BJP ने बिहार में विधायक दल की बैठक के लिए शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है
- शिवराज सिंह चौहान के प्रशासनिक अनुभव से बिहार की जटिल राजनीतिक परिस्थिति को संभालने में मदद मिलेगी
- वे ओबीसी समुदाय से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में पिछड़े वर्ग का निर्णायक प्रभाव दर्शाता है
बिहार की सियासत में हलचल तेज है. भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार का पर्यवेक्षक (Observer) नियुक्त किया है. वे कल पटना पहुंच रहे हैं, जहां उनके नेतृत्व में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक होगी. भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश के अनुसार, इस बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. आखिर पार्टी ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए 'मामा' यानी शिवराज सिंह चौहान को ही क्यों चुना? आइए समझते हैं.
1. अनुभव का विशाल भंडार
शिवराज सिंह चौहान भाजपा के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक हैं. उन्होंने उमा भारती और कल्याण सिंह जैसे कद्दावर नेताओं के दौर से लेकर वर्तमान में पीएम मोदी और अमित शाह की टीम तक में अपनी उपयोगिता साबित की है. लंबे समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने का उनका प्रशासनिक अनुभव बिहार की जटिल राजनीति को संभालने में बेहद कारगर साबित होगा.
2. हिंदी हार्टलैंड के 'सर्वमान्य' नेता
शिवराज सिंह चौहान की छवि एक मृदुभाषी और सबको साथ लेकर चलने वाले नेता की है. पार्टी का मानना है कि वे सर्वमान्य नेता हैं, जिनकी बात सभी गुटों के विधायक मानेंगे. बिहार जैसे राज्य में, जहां गुटीय समीकरण साधने होते हैं, शिवराज की तटस्थता और स्वीकार्यता पार्टी को एक सूत्र में पिरोने का काम करेगी.
3. OBC कार्ड और सोशल इंजीनियरिंग
शिवराज सिंह चौहान स्वयं ओबीसी (OBC) समुदाय से आते हैं. बिहार की राजनीति में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है. हालांकि, भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश का कहना है कि भाजपा 'सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर चलती है और यहां जाति-धर्म नहीं देखा जाता. लेकिन अनुभवी नेता के तौर पर शिवराज की उपस्थिति एक सकारात्मक संदेश देगी.
4. संघ का अटूट विश्वास और चुनावी ट्रैक रिकॉर्ड
शिवराज सिंह चौहान पर आरएसएस (RSS) का गहरा भरोसा रहा है. इसके अलावा, हाल ही में उन्होंने झारखंड विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के प्रभारी के तौर पर कमान संभाली थी. हिंदी भाषी राज्यों की नब्ज पहचानने की उनकी कला उन्हें बिहार के लिए सबसे फिट उम्मीदवार बनाती है.
5. सर्वसम्मति से नेता का चुनाव
पर्यवेक्षक के तौर पर शिवराज सिंह का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि विधायक दल के नेता का चुनाव पूर्ण बहुमत और सर्वसम्मति से हो. उनकी मौजूदगी में होने वाली बैठक यह तय करेगी कि बिहार की कमान किस चेहरे को सौंपी जाएगी, जो राज्य को विकास के पथ पर आगे ले जा सके.
यह भी पढ़ें: बिहार में सत्ता परिवर्तन से पहले सियासी संग्राम, JDU-BJP में खींचतान, CM चेहरे पर मंथन तेज
कल पटना पहुंचेंगे शिवराज सिंह चौहान
शिवराज सिंह चौहान कल पटना पहुंचेंगे. वो विधायक दल की बैठक में रहेंगे और कल ही सीएम उम्मीदवार का चयन हो जाएगा. शिवराज सिंह को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. उन्हें गुटबाजी को खत्म कर सर्वसम्मति बनाना है. बिहार की सत्ता के गलियारों में अब सबकी नजरें कल होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं. क्या बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा? शिवराज सिंह चौहान का अनुभव इस प्रक्रिया को कितनी गति देता है, यह देखना दिलचस्प होगा.
यह भी पढ़ें: 14 को नीतीश कैबिनेट की आखिरी बैठक, 14 को ही BJP विधायक दल की बैठक, क्या 14 को मिलेगा नया बिहार CM?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं