- डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार ने भारत की सबसे खतरनाक अग्नि मिसाइल में तकनीकी सुधार कर उसकी ताकत बढ़ाई
- उन्होंने भारत का पहला स्वदेशी रनवे विजिबिलिटी सिस्टम विकसित किया
- उनके द्वारा विकसित रनवे विजिबिलिटी सिस्टम आज देश के 171 एयरपोर्ट पर उपयोग में है
भारत डिफेंस सेक्टर में काफी आगे बढ़ चुका है. आज भारत न सिर्फ हथियार बना रहा है बल्कि एक्पोर्ट भी कर रहा है. वहीं हमारी खतरनाक और एडवांस मिसाइलों से दुश्मन कांपता है. जब भी भारत की सबसे खतरनाक मिसाइलों की बात होती है, तो उसमें सबसे पहला नाम 'अग्नि' का आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मिसाइल में जान डालने का काम एक महिला वैज्ञानिक ने किया था. हम बात कर रहे हैं पद्मश्री डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार की. डॉ. शुभा ने न सिर्फ अग्नि मिसाइल में टेक्नोलॉजी के सुधार किए बल्कि भारत की पहला स्वदेशी 'रनवे विजिबिलिटी' सिस्टम बनाया.
कौन हैं डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार?
डॉ. शुभा वेंकटेश अय्यंगार भारत की एयरोस्पेस वैज्ञानिक हैं. उन्हें हाल ही में विज्ञान और इंजीनियरिंग से जुड़े क्षेत्र में पद्म श्री सम्मान दिया गया है. उन्हें भारत की 'सेफ फ्लाइट वूमन' भी कहा जाता है. उनका जन्म कर्नाटक में हुआ था. वह अपने 9 भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. वह दौर ऐसा था जब लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने के पक्ष में लोग नहीं होते थे. लेकिन डॉ. शुभा के पिता का अपनी बेटी पर अटूट विश्वास था. डॉ. शुभा को बचपन से ही फिजिक्स में गहरी दिलचस्पी थी. उन्होंने बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.
पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद, साल 1974 में वह बेंगलुरु स्थित प्रसिद्ध वैज्ञानिक संस्थान CSIR-NAL में एक रिसर्च स्टूडेंट के तौर पर शामिल हुईं. उन्होंने यहां 'मटेरियल साइंस डिवीजन' और 'एयरपोर्ट इंस्ट्रूमेंट डिवीजन' में काम करना शुरू किया. यहीं से उनके 46 सालों के उस लंबे ऐतिहासिक सफर की शुरुआत हुई, जिसने आगे चलकर भारत की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र को बदलकर रख दिया.
भारत का पहला रनवे विजिबिलटी सिस्टम बनाया
डॉ. शुभा ने भारत का पहली स्वदेशी 'दृष्टि' रनवे विजिबिलिटी सिस्टम डेवलेप किया. यह खास टेक्नोलॉजी घने कोहरे में भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग में मदद करती है. आज देश के लगभग सभी बड़े एयरपोर्ट पर इसका इस्तेमाल किया जाता है. यह सिस्टम उन्होंने महज तीन महीने में बनाया था. डॉ. शुभा और उनकी टीम ने 'दृष्टि' विजिबिलिटी सिस्टम और मौसम संबंधी जानकारी देने वाली टेक्नोलॉजी विकसित की. यह सिस्टम मजबूत, टिकाऊ और विदेशी तकनीक की तुलना में काफी सस्ता था.
आज दृष्टि सिस्टम 171 एयरपोर्ट पर काम कर रहा है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक है, जिसने सरकार के करोड़ों रुपये बचाए हैं और पायलटों को घने कोहरे में भी सुरक्षित लैंडिंग में मदद की है.
अग्नि मिसाइल को बनाया और ज्यादा ताकतवर
डॉ. शुभा ने भारत के कई डिफेंस प्रोग्राम में भी योगदान गिया है. उन्होंने 'अग्नि' मिसाइल के डेवलेपमेंट में बेहद अहम भूमिका निभाई. कहा जा सकता है कि उन्होंने अग्नि मिसाइल को और ज्यादा ताकतवर बनाया. दरअसल उन्होंने एक ऐसी बेहद जटिल तकनीकी खामी को दूर किया, जो मिसाइल को उसके सटीक लक्ष्य तक पहुंचने से रोक रही थी.
उन्होंने मिसाइल के रैमजेट-स्क्रैमजेट इंजनों के लिए ऐसे स्वदेशी पुर्जे बनाए, जो 3000 केल्विन यानी करीब 2726°C के अत्यधिक तापमान और Mach 5 यानी आवाज की रफ्तार से 5 गुना तेज को आसानी से झेल सकती हो.
डॉ शुभा के तीन रिसर्च पेपर को नासा ने अपनी आधिकारिक रिपोर्टों में प्रकाशित किया था.उन्होंने CSIR-NAL में 46 सालों तक काम किया. अपने करियर में उन्हें 43 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं.
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