पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट विवाद और गहरा हो गया है. कोलकाता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शाहिदुल्लाह मुंशी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है. उन्होंने इसे बेहद अपमानजनक और उत्पीड़न जैसा बताया है. सोमवार (27 मार्च) को जारी ‘विचाराधीन' मतदाताओं की पहली पूरक सूची में यह बात सामने आई. न्यायमूर्ति मुंशी ने कहा कि उनकी पत्नी और बड़े बेटे के नाम अभी भी विचाराधीन श्रेणी में हैं. उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को जारी फाइनल लिस्ट में उनके परिवार के नाम विचाराधीन चिह्नित थे.
रिटायर्ड जज बोले- यह बेहद कष्टदायक
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वे सुनवाई में उपस्थित हुए थे. पासपोर्ट जमा किया और आधार-पैन कार्ड देने की पेशकश भी की. रिटायर्ड जज ने कहा, “अभी तक सिर्फ मेरा नाम हटाया गया है. पत्नी और बेटे का नाम अभी विचाराधीन हैं. यह बेहद कष्टदायक और अपमानजनक है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि किस आधार पर यह फैसला लिया गया.”
बंगाल में अब तक कुल 63.66 लाख नाम हटे
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुल 63.66 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं. राज्य की मतदाता संख्या 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है. इसके अलावा 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं को अभी भी ‘विचाराधीन' रखा गया है. मुंशी ने बताया कि वे और उनकी पत्नी पहले बोबाजार विधानसभा क्षेत्र के मतदाता थे, बाद में एंटाली में स्थानांतरित हुए.
"जब जज का नाम कट सकता है..", टीएमसी ने उठाए सवाल
अब वे अपना नाम बहाल कराने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण में याचिका दायर करेंगे. इस मामले पर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है. तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्रवाई की आलोचना की. एक टीएमसी नेता ने कहा, “जब हाईकोर्ट के पूर्व जज का नाम कट सकता है तो आम गरीब और हाशिए वाले लोगों की क्या हालत होगी.” चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
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