- अप्रैल में उत्तर भारत के कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें भारी नुकसान झेल रही हैं
- राजस्थान के भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर और लालसोट में तेज बारिश और ओलों ने गेहूं, सरसों और चने की फसल बर्बाद कर दी
- झारखंड में बेमौसम बारिश और आंधी से सब्जी और रबी की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा
Weather News Update: अप्रैल का महीना मौसम के लिहाज से काफी अच्छा जा रहा है. बारिश, आंधी और गरज चमक ने अब तक गर्मी के तेवर ढीले किए हुए हैं, लेकिन सुकून के बीच कुछ तस्वीरें ऐसी भी हैं जो आपका भी दिल तोड़ देंगी. उत्तर भारत के कई राज्यों जैसे यूपी-एमपी, हरियाणा, राजस्थान और झारखंड जैसे प्रदेशों में मौसम ने जो तांडव मचाया है उसने किसानों के सारे अरमानों और मेहनत पर पानी फेर दिया है. हालांकि यहां बारिश के साथ ओलों ने भी खूब खेल खराब किया है. कहीं खेतों में पानी भर गया है तो कहीं पूरा खेत किसी बर्फीली पहाड़ी की तरह पटा पड़ा है. कहना गलत नहीं होगा कि अप्रैल में मौसम के बदले रुख ने राहत से ज्यादा नुकसान करा दिया है.
राजस्थान में किसानों का हाल बेहाल
राजस्थान के भी कई इलाके ओले और बेमौसम बारिश ने किसानों की सारी फसलें खराब कर दी हैं. शुक्रवार देर शाम को तेज हवा के साथ हुई बरसात से खेतों में पानी भर गया तो वहीं खेतों में कटी फसल भी भीग गई.भीलवाड़ा की रायला और चांदरास हुई बरसात से खेतों में पानी भर गया. ग्रामीण अंचलों में मौसम में हो रहे बदलाव के चलते बिजली की लाइनों में आ रहे फॉल्ट के चलते बिजली आपूर्ति भी बाधित हो रही है.रायला कस्बे सहित क्षेत्र में मौसम बदलने से तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों के खेतों में पड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
श्रीगंगानगर जिले में बीती शाम मौसम ने ऐसा खौफनाक रूप अख्तियार किया कि चंद मिनटों में लहलहाती फसलें मिट्टी में मिल गईं. जिले के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की खून-पसीने की कमाई को लील लिया है.सबसे ज्यादा तबाही सूरतगढ़ के राजियासर उपतहसील और आसपास के टिब्बा क्षेत्रों में देखी गई. यहां ओले गिरने की तीव्रता इतनी अधिक थी कि देखते ही देखते खेत सफेद चादर से ढक गए. मोकलसर (92 RD, 99 RD, 110 RD), बछरारा, देवनगर और बिरधोल मैं हालत काफी खराब है. गेहूं की बालियां टूटकर बिखर गईं, सरसों के दाने झड़ गए और ईसबगोल की खेती पूरी तरह जमींदोज हो गई. किसानों का कहना है कि अब खेतों में पशुओं के लिए चारा तक नहीं बचा है.श्रीगंगानगर का किसान अब नम आंखों से सरकार की ओर देख रहा है कि शायद समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद उनके उजड़े हुए आशियाने और डूबते भविष्य को सहारा दे सके.
Hailstorm and Strong Winds Lash Areas Near Jaipur, Visuals Surface
— Atulkrishan (@iAtulKrishan1) April 3, 2026
Dramatic visuals have emerged from areas near Jaipur, Rajasthan, showing intense hailstorm accompanied by strong winds.
The sudden weather change disrupted normal life, with heavy gusts and hailstones causing… pic.twitter.com/jv4L3nvfWA
Hailstorm and Strong Winds Lash Areas Near Jaipur, Visuals Surface
— Atulkrishan (@iAtulKrishan1) April 3, 2026
Dramatic visuals have emerged from areas near Jaipur, Rajasthan, showing intense hailstorm accompanied by strong winds.
The sudden weather change disrupted normal life, with heavy gusts and hailstones causing… pic.twitter.com/jv4L3nvfWA
लालसोट में आसमान से गिरे ओलों ने जैसे खेतों पर सफेद सन्नाटा बिछा दिया.बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने लालसोट विधानसभा क्षेत्र के किसानों की मेहनत पर गहरी चोट कर दी है.आतरी, राहुवास और रामगढ़ पचवारा गांवों में फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रामविलास मीणा जयपुर से तुरंत लौटकर सीधे प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और हालात का जायजा लिया. उन्होंने खेतों में जाकर किसानों से बातचीत की और नुकसान का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया.उनके साथ भाजपा नेता शंभू लाल कुई भी मौजूद रहे.
प्रदेश में पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि से अन्नदाता कहे जाने वाला किसान अब फसल खराबे के कारण लाचार नजर आ रहा है। शेखावाटी और सीकर जिले में भी पिछले दिनों हुई लगातार बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण किसानों की खेतों में तैयार खड़ी व कटी हुई रबी की फसल लगभग खराब हो चुकी है.सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, सरसों और चने की फसल में हुआ है जो इस समय कटाई के कगार पर थी.आसमानी आफत से सीकर जिले के किसानों के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं और किसान अब सरकार से जल्द फसल खराबी का आंकलन कर मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठा है. अब देखना है कि प्रशासन और सरकार की ओर से किसानों को कब और कितनी राहत मिल पाती है.(रिपोर्ट- नवीन जोशी, जगदेव सिंह पंवार)

झारखंड में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान
झारखंड में गर्मी के बीच मौसम की अचानक करवट, तेज हवाएं, गरज के साथ बारिश और वज्रपात के हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है और अगले तीन-चार दिनों तक बेमौसम बारिश की पूरी संभावना जताई गई है. इस बदले मौसम का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ रहा है. बीते तीन-चार दिनों के अंदर हुई बेमौसम बारिश ने कई किसानों की कमर तोड़ डाली है. सबसे अधिक नुकसान गिरिडीह जिला में बगोदर के किसानों को उठाना पड़ा है. यहां के कई किसान की सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है. जिन किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है उनमें अटका पश्चिमी पंचायत के उमेश मंडल भी शामिल हैं.
भुक्तभोगी उमेश मंडल ने बताया कि उन्होंने पहली बार तरबूज की खेती की है. खेती में लगभग तीन लाख रुपए लागत लग चुका हैं. इसी तरह से अटका पश्चिमी पंचायत के दिलीप प्रसाद डेढ़ एकड़ में पहली बार तरबूज लगाया है. हजारों की संख्या में तरबूज फला था जो तैयार होने की स्थिति में था. इसी बीच बर्फबारी के कारण तरबूज व पौधे नष्ट हो गए. बताया कि हजारीबाग से तरबूज के पौधे मंगाए थे. तरबूज के अलावा खीरा, टमाटर, लौकी, सिमला मिर्च आदि के पौधे एवं तैयार फसलें भी नष्ट हो गया. उन्होंने बताया कि ढाई लाख रुपए से अधिक खर्च हुए थे और मेहनत की थी सो अलग. मुंडरो पंचायत के गम्हरिया के छोटीलाल प्रसाद के खेतों में लगे फसलों का भी कुछ ऐसा हीं हाल है. उन्होंने बताया कि लगभग 50000 रुपए की लागत से दस कट्टा जमीन पर समेकित खेती की थी. जिसमें तरबूज, लौकी, खीरा, बोदी आदि के पौधे और फसलें नष्ट हो गया है. भुक्तभोगी किसानों ने आपदा राहत के तहत क्षतिपूर्ति की भरपाई की मांग की है. (रिपोर्ट- हरिवंश शर्मा)
#WATCH | Hailstorm, rain showers, and strong winds lash Gwalior city in Madhya Pradesh. IMD has issued a yellow alert in the city, forecasting "thunderstorm accompanied by lightning." pic.twitter.com/bgQehpUOgL
— ANI (@ANI) April 4, 2026
पूर्वी सिंहभूम जिले में बीते दो दिनों से जारी तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है. तैयार खड़ी रबी फसलें खेतों में बिछ गई हैं, जिससे नुकसान हो रहा है. विशेषकर गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें, जो अब पकने की अवस्था में थीं, उनके लिए यह मौसम काल बन गया है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में टमाटर, मिर्च और गोभी जैसी सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचा है. किसान संतोष कुमार के अनुसार, तेज हवाओं के कारण फूल और फल झड़ गए हैं. खेतों में पानी जमा होने से पौधों की जड़ों में सड़न और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ गया है. बिगड़ते हालात को देखते हुए झारखंड के कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कृषि विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि नुकसान का आकलन हो सके साथ ही प्रभावित किसानों को बिरसा फसल बीमा योजना व आपदा प्रबंधन कोष के माध्यम से उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है.
यूपी में भी हाल-बेहाल
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश और ओलों की वजह से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. खासतौर पर एनसीआर के इलाकों फसलों को नुकसान हुआ है. आगरा, नोएडा और रामपुर जैसे जिलों में 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार से चली आंधी और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की खड़ी फसलें खेतों में गिर गई हैं. गौतमबुद्धनगर सहित एनसीआर क्षेत्र में रबी की फसलें बड़े स्तर पर खराब हो गई हैं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है. इस संकट को देखते हुए जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तत्काल सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा देने की मांग की है.
उत्तरकाशी जिले में भी ओले की मार
उत्तरकाशी जिले के यमुना घाटी और गंगा घाटी क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है.किसानों की खड़ी फसल ओलावृष्टि से नष्ट हो गई है, नगदी फसलों में धनिया, प्याज, मटर इत्यादि फसले मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई है.मौसम विज्ञान की ओर से पूर्व में तेज हवाओं और आसमानी बिजली ओलावृष्टि का पूर्वानुमान जारी किया था जो यमुना घाटी क्षेत्र में सटीक साबित हुआ है, घाटी के निचले क्षेत्रों में आसमानी बिजली और उसकी गड़गड़ाहट के साथ जमकर बारिश ओलावृष्टि हुई है.बदले मौसम से जहां गर्मी से राहत मिली है तो वही किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है जिससे किसानो की चिंता भी बढ़ गई है.आपको बता दें कि घाटी के पुरोला और बडकोट क्षेत्र के ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर रहते है और अच्छी खेती से अपनी साल भर की दिनचर्या को भी तय करते हैं. ऐसे में मौसम की मार किसानों की फसलों पर पानी फेर और ज्यादा परेशान कर रही है.(रिपोर्ट- नितिन चौहान)
MP में भी वही कहानी
मध्य प्रदेश के श्योपुर मे देर शाम अचानक से बदले मौसम के मिजाज के बीच तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के बीच आसमान से ओले बरसने से अन्नदाताओं की परेशानी बढ़ा दी है.बेमौसम हुई बारिश और ओलों ने किसानों के खेतों में पक कर खड़ी फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है. देर शाम श्योपुर के विजयपुर से लेकर कराहल सेसईपुरा मानपुर ढोढर सोइकला दातरदा के साथ कई ग्रामीण इलाकों में जोरदार बारिश के साथ ओले पड़े.ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ गिरे ओलों से कई जगह सफेद चादर सी दिख रही है.ग्वालियर में 50 साल का मौसम रिकॉर्ड टूट गया.
शिवपुरी में भारी ओलावृष्टि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है.चना सब्जी और अन्य फसलों को भी नुकसान की आशंका है. शिवपुरी जिले के डेढ़ दर्जन गांव से ज्यादा गांव प्रभावित हुए हैं. 3000 हेक्टर फसल में नुकसान की आशंका है.शनिवार को जिले के कई इलाकों में बारिश तेज हवाओं के साथ आसमान से गिरे ओलों ने खेतों में खड़ी गेहूं,चना, सब्जी और अन्य फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. शनिवार देर शाम शुरू हुई ओलावृष्टि ,तेज हवाएं और बारिश की वजह से इलाका पूरी तरह से तरबतर नजर आया.
#WATCH | ग्वालियर, मध्य प्रदेश: ग्वालियर के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। pic.twitter.com/jChgps1oCq
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 4, 2026
जानकारी के मुताबिक शिवपुरी बदरवास और पिछोर तहसील में फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचा है.शिवपुरी-कोलारस अनुविभाग के अकाझिरी, माढागणेशखेड़ा, डगपीपरी और देहरदा गुरूकुदवाया गांवों में लगभग 10 मिनट तक तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. इसी तरह बदरवास तहसील के ग्राम बामोरखुर्द में भी बारिश और ओले गिरे.पिछोर तहसील के बाचरौन, भरतपुर, सेमरी, भगवा और लभेड़ा जराय सहित कई गांवों में बारिश के कारण मौसम ठंडा हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई. बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल और कटाई के बाद रखी उपज को भारी नुकसान होने की आशंका है.पीड़ित किसानों ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा देने की मांग की है.(रिपोर्ट- अजय राठौड़)
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नोट- झारखंड, एमपी, यूपी, उत्तराखंड, झारखंड के दिए रिपोर्टर्स इनपुट के साथ
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