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बरसने से पहले ही हवा में गायब हो रहा 25% मॉनसून, किसानों और खेती पर मंडराया 'सूखे' का नया संकट

Rainfall Deficit: पुणे के IITM की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि मॉनसून के दौरान बरसने वाला करीब 25% पानी जमीन पर पहुंचने से पहले ही हवा में भाप बन जाता है.

बरसने से पहले ही हवा में गायब हो रहा 25% मॉनसून,  किसानों और खेती पर मंडराया 'सूखे' का नया संकट
जमीन तक क्यों नहीं पहुंचती बारिश? स्टडी में खुलासा
IANS

देशभर में इस साल कमजोर मॉनसून ने किसानों से लेकर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. मौसम वैज्ञानिक भी इसे लेकर लगातार अलर्ट जारी कर रहे हैं. कम बारिश और मॉनसून की बेरुखी को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (IITM) की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि मॉनसून के दौरान आसमान से बरसने वाला करीब एक चौथाई यानी 25% पानी जमीन पर गिरने से पहले ही हवा में भाप बनकर उड़ जाता है. स्टडी कहती है कि देश में कम बारिश और सूखे जैसे हालात के पीछे एक वजह ये भी है. देश में मॉनसून की बारिश में पहले ही 18% की कमी दर्ज की गई है और ऐसे में इस खुलासे ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता को और बढ़ा दिया है.

आसमान में ही उड़ जाता है बारिश का पानी

IITM की स्टडी के अनुसार, बादलों से गिरने वाली बारिश का एक बड़ा हिस्सा जमीन पर पहुंचने से पहले ही 'सब-क्लाउड लेयर' यानी बादलों के नीचे की परत में भाप बन जाता है. रिपोर्ट कहती है कि यह सटीक औसत वाष्पीकरण 23% है. लेकिन यह आंकड़ा हर दिन बदलता है. स्टडी के अनुसार, वाष्पीकरण न्यूनतम 4% से लेकर अधिकतम 61% तक दर्ज किया गया. अगर 45% से अधिक वाष्पीकरण वाले चार चरम दिनों को हटा दिया जाए, तो यह औसत लगभग 18% बैठता है.

कैसे मापा गया वाष्पीकरण?

यह पहली बार था जब बारिश के पानी के वाष्पीकरण को मापा गया हो. स्टडी में वैज्ञानिकों ने बारिश और हवा की वाष्प में मौजूद हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के स्टेबल आइसोटॉप्स का विश्लेषण किया और बारिश की बूंदों के विकास को ट्रैक करने के लिए 'बिलो क्लाउड इंटरेक्शन मॉडल (BCIM)' का इस्तेमाल किया.

बारिश हवा में क्यों और कैसे सूखती है?

स्टडी कहती है कि वाष्पीकरण तीन मुख्य कारकों पर निर्भर करता है. बूंदों का आकार, हवा का तापमान और आर्द्रता. जब तापमान ज्यादा हो, हवा में नमी कम हो और बारिश की बूंदों का आकार छोटा हो, तो पानी सबसे अधिक हवा में उड़ता है. हल्की बारिश में वाष्पीकरण का असर सबसे ज्यादा होता है. क्योंकि हल्की बारिश में बूंदों का आकार काफी छोटा होता है.

यह स्टडी उत्तरी पश्चिमी घाट पर होने वाली मॉनसूनी बारिश पर की गई है. स्टडी पीयर-रिव्यू जर्नल 'एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड फिजिक्स' में छपा है.

देश में बारिश की कमी 19% तक पहुंची

देश में 14 जुलाई तक मॉनसून के दौरान कुल बारिश में करीब 19% की कमी दर्ज की गई है. जुलाई की शुरुआत में व्यापक बारिश के बाद देश में बारिश का घाटा कम होकर 14% तक आ गया था, लेकिन पिछले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश में कमी आने से यह आंकड़ा फिर से बढ़ गया है. देश के 741 में से 397 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिनमें से 326 जिलों में स्थिति 'कमी' और 71 जिलों में 'भारी कमी'की श्रेणी में है. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत (जैसे बिहार, झारखंड) में बारिश की कमी अभी भी 40% से 50% के बीच बनी हुई है.

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