
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 राज्यसभा में पारित हो गया है. इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है. ऊपरी सदन में गुरुवार को पेश होने के बाद 12 घंटे चली चर्चा के उपरांत शुक्रवार तड़के विधेयक पारित हुआ. इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े. लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी. इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है. विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा की बैठक (शुक्रवार) रात 2:30 बजे के बाद तक चली.
विपक्ष से सभी संशोधन गिर गए. तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुचि शिवा के एक संशोधन पर मत विभाजन हुआ, हालांकि यह संशोधन भी गिर गया.
राज्यसभा में पास हुआ वक्फ बिल तो सांसदों ने लगाए 'जय श्री राम' के नारे
— NDTV India (@ndtvindia) April 3, 2025
राज्यसभा में वक्फ बिल के पक्ष में 128, विरोध में 95 मत पड़े
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विधेयक से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा: रिजिजू
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि सरकार अल्पसंख्यकों को डराने के लिए यह विधेयक लाई है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को डराने और गुमराह करने का काम विपक्ष कर रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधेयक से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा.
विपक्षी सांसदों से मुसलमानों को गुमराह न करने की अपील करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है, वह बहुत सोच-समझकर किया है. वे (विपक्षी सदस्य) बार-बार कह रहे हैं कि हम मुसलमानों को डरा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. हम नहीं, बल्कि आप मुसलमानों को डराने का काम कर रहे हैं. जिन लोगों ने कहा था कि सीएए पारित होने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छिन जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आप इस बिल को लेकर मुसलमानों को गुमराह नहीं कीजिए."
जेपीसी में ज्यादातर लोगों के सुझाव स्वीकार हुए: रिजिजू
मंत्री ने कहा कि जब यह बिल ड्राफ्ट हुआ तो उसमें सभी के सुझाव को ध्यान में रखा गया. वक्फ बिल के मूल ड्राफ्ट और मौजूदा ड्राफ्ट को देखें तो उसमें हमने कई बदलाव किए हैं. ये बदलाव सबके सुझाव से ही हुए हैं. जेपीसी में ज्यादातर लोगों के सुझाव स्वीकार हुए हैं. सारे सुझाव स्वीकार नहीं हो सकते. जेपीसी में शामिल दलों के सांसदों ने आरोप लगाया कि उनके सुझाव को नहीं सुना गया. लेकिन ऐसी स्थिति में हमने बहुमत से फैसला किया. लोकतंत्र में ऐसा ही होता है.
मंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में तीन से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगे, इसका प्रावधान किया गया है, ताकि मुसलमानों के हितों के साथ समझौता न हो. साथ ही उन्होंने कहा कि जेपीसी में विपक्ष की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया गया है.
क्या मुसलमानों की चिंता नहीं करनी चाहिए?: रिजिजू
उन्होंने कहा कि हर जिले में जो भी जमीनी विवाद होता है, उसे कलेक्टर देखता है. आपको वक्फ में कलेक्टर को रखने पर आपत्ति थी, इसलिए हमने उससे ऊपर के अफसर को रखा है. वे बार-बार बोलते हैं कि मुसलमानों के बारे में भाजपा क्यों चिंता करती है. लोगों ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया, तो क्या उन्हें मुसलमानों की चिंता नहीं करनी चाहिए?
उन्होंने कहा, "हमने बार-बार कहा कि वक्फ संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है. विपक्ष ने बहुत से मंदिरों की बात की है. वहां की काउंसिल में गैर-धार्मिक व्यक्ति सदस्य नहीं होता है. वक्फ बोर्ड का कोई विवाद हिंदू-मुस्लिम के बीच होगा, तो उसे कैसे निपटाया जाएगा?"
#WATCH | Delhi: In the Rajya Sabha, Union Minister Kiren Rijiju says, "The Waqf Board is a statutory body and why should only Muslims be included in the statutory body? If there is a dispute between Hindus and Muslims, how will that dispute be resolved?... There can be disputes… pic.twitter.com/6xqQDl3yhD
— ANI (@ANI) April 3, 2025
रिजिजू ने कहा, "आप कहते हैं कि मुसलमानों में बहुत गरीबी है और गरीबों के बारे में सरकार को सोचना चाहिए. आजादी के बाद कांग्रेस दशकों तक सरकार में थी. तो ऐसे में कांग्रेस ने इसके लिए काम क्यों नहीं किया? अब हमें गरीबों के बारे में सोचना पड़ रहा है. हमने बार-बार कहा है कि वक्फ की संपत्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है. अगर हिंदू और मुसलमान के बीच वक्फ की जमीन को लेकर विवाद होता है, तो उसका निर्णय कैसे होगा?"
इससे पहले, चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसके फायदे गिनाए और विपक्ष पर देश के मुसलमानों को गुमराह करने के आरोप लगाए. दूसरी ओर, विपक्ष के नेताओं ने इसे संविधान के खिलाफ बताया.
किरेन रिजिजू ने बिल पेश करते हुए बताया था कि वक्फ संशोधन विधेयक के समर्थन में छोटे-बड़े एक करोड़ सुझाव मिले हैं. संयुक्त संसदीय समिति ने 10 शहरों में जाकर विधेयक को लेकर लोगों की राय जानी और 284 संगठनों से बातचीत की गई. आज 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं.
वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना उद्देश्य: नड्डा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मूल उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ की प्रॉपर्टी का उचित प्रबंधन करना है. उन्होंने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश की जनता को बताना चाहता हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों का पालन करके आगे बढ़ रही है. वक्फ संपत्तियों के सही रखरखाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 70 साल तक किसने मुस्लिम समुदाय को डर में रखा? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक इस नीति को अपनाया, लेकिन अब जनता ने इसका परिणाम देख लिया है.
राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा: खरगे
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह वक्फ विधेयक कोई सामान्य कानून नहीं है. इस कानून को राजनीतिक फायदे के लिए हथियार बनाया जा रहा है. यह देश की विविधता को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने के लिए मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.
'यह मुसलमानों के लिए ठीक नहीं है,यह संविधान के खिलाफ है' - राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे #Malliakarjun pic.twitter.com/ybNEeseBR4
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उन्होंने कहा कि लोकसभा में देर रात यह विधेयक पारित हुआ तो इसके पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े. इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि विभिन्न दलों के विरोध के बाद भी मनमानी से यह विधेयक लाया गया. भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण की काफी बात कर रही है. सशक्तिकरण की बातें हो रही हैं. लेकिन सच्चाई सरकार के पांच साल के अल्पसंख्यक विभाग के बजट आवंटन से साफ है. वित्त वर्ष 2019-20 में इस विभाग का बजट आवंटन 4,700 करोड़ रुपये था जो घटकर 2023-24 में 2,608 करोड़ रह गया. वित्त वर्ष 2022-23 में बजट आवंटन 2,612 करोड़ रुपये था, जिसमें से 1,775 करोड़ रुपये का खर्च मंत्रालय नहीं कर पाया. कुल मिलाकर पांच साल में बजट मिला 18,274 करोड़ रुपये, जिसमें से 3,574 करोड़ खर्च नहीं हो पाए.
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