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छात्रा की जान बचाने के लिए पथरीले रास्ते पर चली वार्डन, पीठ पर लादकर पहुंचाया अस्पताल

आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मन्यम जिले में एक महिला शिक्षक ने अपनी छात्रा की जान बचाने के लिए उसे अपनी पीठ पर लादकर तीन किमी लंबे उबड़-खाबड़ पथरीले रास्ते पर चली और उसे अस्पताल पहुंचाया. इस काम के लिए उनकी जमकर तारीफ हो रही है.

हैदराबाद:

आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मन्यम जिले के एक आदिवासी कल्याण स्कूल की वार्डन ने मानवीयता की मिसाल पेश की है. इस वार्डन ने एक बीमार आदिवासी छात्रा को पीठ पर लादकर तीन किलोमीटर लंबे पथरीले रास्ते का सफर तय कर उसे अस्पताल पहुंचाया. समय पर इलाज मिल जाने की वजह से छात्रा की जान बच गई. वार्डन के इस काम की हर कोई तारीफ कर रहा है. राज्य महिला, बला और आदिवासी कल्याण मंत्री ने वार्डन को शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया. महिला वार्डन का कहना है कि उन्होंने यह सब अपनी छात्रा की जान बचाने के लिए किया. 

कहां की है यह घटना

यह घटना 30 जून की है. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.इसके बाद लोगों ने गुरुवार को उनके बारे में जाना. मिली जानकारी के मुताबिक 11 साल की भुवनेश्वरी गुम्मालक्ष्मीपुरम के भद्रगिरि ट्राइबल वेलफेयर गर्ल्स आश्रम स्कूल में कक्षा सात की छात्रा है. वह छुट्टियों में अपने गांव वडापुट्टी गई हुई थी. पिता के निधन के बाद वह अपने चाचा के साथ रहती है. गांव पहुंचने के बाद उसे तेज पेट दर्द, उल्टियां और तेज बुखार हो गया. उसके परिजन पहले उसे कुरुपाम सरकारी अस्पताल ले गए. अस्पताल से लौटने के बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई. उसके गांव तक सड़क और एंबुलेंस की सुविधा न होने की वजह से उसके परिजनों ने उसकी बीमारी की सूचना स्कूल प्रशासन को दी.

अपनी छात्रा के बीमार होने की खबर पाकर स्कूल की वार्डन हेमानी तुरंत गांव पहुंचीं. उन्होंने देखा कि छात्रा की हालत लगातार खराब हो रही है. उन्हें लगा कि भुवनेश्वरी को समय पर अस्पताल पहुंचाना बहुत जरूरी है.उन्होंने एम्बुलेंस या किसी अन्य मदद का इंतजार नहीं किया. उन्होंने छात्रा को कपड़े से अपनी पीठ पर मजबूती से बांधा और करीब तीन किलोमीटर लंबे पथरीले और ऊबड़-खाबड़ जंगली रास्ते पर पैदल ही चल पड़ीं. इस दौरान छात्रा के परिजन भी उनके साथ रहे. नेल्लिकेक्कुवा गांव पहुंचने पर उन्हें एक गाड़ी मिली. उससे भुवनेश्वरी को तुरंत पार्वतीपुरम जिले सरकारी अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत आईसीयू में भर्ती किया.

कैसा है भुवनेश्वरी का स्वास्थ्य

जिला चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर भास्कर राव ने बताया कि वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों ने अस्पताल जाकर छात्रा का हाल जाना. अब वह डॉक्टरों की निगरानी में भुवनेश्वरी धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही है.

इस पूरी घटना का वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. लोगों ने वार्डन हेमानी की तारीफ कर रहे हैं. इस पर उन्होंने कहा,''मैं तो अपनी छात्रा की जान बचाना चाहती थी. ऐसे समय में मुश्किलों के बारे में नहीं सोचा जाता. सबसे पहले बच्चे की जान बचाना जरूरी होता है.'' 

आंध्र प्रदेश की महिला, बाल कल्याण और आदिवासी कल्याण मंत्री गुम्मडी संध्यारानी ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया. मंत्री ने उन्हें सम्मानित करने के बाद कहा,''हेमानी ने अपनी ड्यूटी से कहीं बढ़कर काम किया है. सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न होने के बावजूद उन्होंने बच्ची को अस्पताल पहुंचाया. उनकी सेवा-भावना सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है.''

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