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'बोलने की आजादी का मतलब गाली देना नहीं...' पवन कल्याण ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर लगाई लताड़

पवन कल्याण ने ये बातें उन सोशल मीडिया यूजर्स को लताड़ लगाते हुए कहीं, जिन्होंने चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण और उनके परिवार को निशाना बनाने वाले कथित अपमानजनक पोस्ट किए थे.

'बोलने की आजादी का मतलब गाली देना नहीं...' पवन कल्याण ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर लगाई लताड़
पवन कल्याण ने सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करने वालों को लताड़ा.
  • पवन कल्याण ने सोशल मीडिया पर गाली, धमकी और बदनाम करने वालों की कड़ी निंदा की है
  • उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी को गाली देना या अपमानित करना नहीं है
  • पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि संविधान अनुच्छेद 19(2) के तहत बोलने की आजादी पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं

आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने सोशल मीडिया के जरिए गाली देने, धमकाने या बदनाम करने वालों को जमकर लताड़ लगाई है. उन्होंने साफ कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी को गाली देना नहीं है. उन्होंने कहा कि ये संविधानिक मौलिक अधिकार अपने साथ जिम्मेदारी भी लाता है. उन्होंने कहा कि लोगों को सरकार से सवाल पूछने, उसके फैसलों की आलोचना करने और अपनी अलग राय रखने का पूरा अधिकार है. लेकिन ये आलोचना सम्मानजनक और कानून के दायरे में होनी चाहिए. 

बोलने की आजादी का मतलब गाली देना नहीं

पवन कल्याण के कहा कि बोलने की आजादी का मतलब गाली देने की आजादी नहीं है. संविधान ने बोलने की आजादी बिल्कुल दी है, लेकिन जैसे चाहें वैसा गलत बोलने की नहीं. डिप्टी सीएम ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(2) सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, नैतिकता, शालीनता और लोगों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए उचित प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है. 

 धमकी देना, झूठे आरोप लगाना, महिलाओं का अपमान करना, नफरत फैलाना, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और किसी शख्स की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना, बोलने की आजादी के नाम पर इन सब का बचाव नहीं किया जा सकता. 

गलत बोला तो होगा कानूनी एक्शन

उन्होंने कहा कि हमसे सवाल पूछें, हमारी आलोचना करें, अपनी राय रखें, लेकिन सम्मान और जिम्मेदारी के साथ. ये बातें कानून का सम्मान करते हुए कही जानी चाहिए. हमारा लोकतंत्र तभी मजबूत होगा. किसी को अगर लगता है कि वह बिना किसी नतीजे के कुछ भी कह सकता है तो उसे कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ेगी. 

पवन ने कहा कि सोशल मीडिया जन-मुद्दे उठाने और सरकारों को जवाबदेह ठहराने का एक सशक्त मंच है. साथ ही इसके जरिए महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक कंटेंट, फेक न्यूज़, मॉर्फ की गई तस्वीरें, ऑनलाइन उत्पीड़न और व्यक्तिगत हमले फैलाने के लिए फेक अकाउंट्स के बढ़ते दुरुपयोग भी बढ़ रहे हैं. 

सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर लताड़

बता दें कि पवन कल्याण ने ये बातें उन सोशल मीडिया यूजर्स को लताड़ लगाते हुए कहीं, जिन्होंने चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण और उनके परिवार को निशाना बनाने वाले कथित अपमानजनक पोस्ट किए थे. जिसके बाद आंध्र पुलिस ने तेलंगाना के कई लोगों को गिरफ्तार किया है. सरकार का कहना है कि यह एक्शन गैर-कानूनी ऑनलाइन व्यवहार के खिलाफ है, न कि निष्पक्ष आलोचना या राजनीतिक असहमति के खिलाफ. बता दें कि गिरफ्तार लोगों पर सोशल मीडिया के जरिए पवन कल्याण और दूसरों के खिलाफ गाली-गलौज और बदनामी वाले पोस्ट करने का आरोप है.

पवन कल्याण ने ऐलान किया कि डिप्टी सीएम कार्यालय जल्द ही सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतें दर्ज करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करेगा, जहां सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट, लिंक और वीडियो जमा किए जा सकेंगे. हर शिकायत की जांच की जाएगी और कानून के तहत एक्शन लिया जाएगा. 

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