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गुफा में मां तपस्या कर रही हैं और आप हॉर्न बजा रहे हो... वैष्णो देवी में तबाही के बाद छलका भक्तों का दर्द

Vaishno Devi Landslide Reason: कुदरत ने काफी इशारे किए थे, तबाही से पहले जोर की बिजली चमकी थी. पत्थर के छोटे छोटे छोटे टुकड़े पहले ही रास्ते पर गिर रहे थे और मौसम काफी ज्यादा खराब हो रहा था.

तबाही के लिए इन लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं भक्त

  • माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए लैंडस्लाइड में तीस से अधिक लोगों की मौत हुई और कई लोग दब गए
  • जम्मू में भारी बारिश ने 115 साल का रिकॉर्ड तोड़ा, जिससे पहाड़ों से चट्टानें खिसकने लगीं
  • भक्तों का मानना है कि विकास कार्यों ने माता की तपस्या में खलल डाला जिससे यह प्राकृतिक आपदा आई
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Vaishno Devi Landslide: माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर ऐसी त्रासदी देखी गई, जिसे लोगों ने पहले कभी नहीं देखा. यहां लैंडस्लाइड होने से 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और कई लोग दब गए. माता के भक्तों के लिए ये किसी प्रलय से कम नहीं था, इसीलिए वो अब इसे माता का प्रकोप बता रहे हैं. भक्तों का कहना है कि माता की तपस्या में खलल पड़ी है, जिससे सब कुछ तबाह हो जाएगा. भावुक होकर भक्त कह रहे हैं कि अब माता को बख्श दो, इधर पेड़ लगाओ... ये सब अब नहीं देखा जाता है. 

सूना पड़ा वैष्णो देवी मार्ग

वैष्णो देवी के जिन रास्तों पर माता के जयकारे सुनाई देते थे, वहां कुछ दिन पहले चीख पुकार मच गई थी. अपनी आंखों के सामने लोगों ने अपने परिजनों को बहता देखा तो उनके लिए ये मौत से कम नहीं था. भक्तों से गुलजार रहने वाली जगह अब पूरी तरह से सुनसान है, लोगों की सिसकियां इस सन्नाटे को तोड़ने का काम रही हैं.  

आखिर क्यों हो रही तबाही?

जम्मू में बारिश ने 115 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है, जिस तरह की तबाही और सैलाब अभी दिख रहा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ. ऐसे में भक्तों के मन में सवाल हैं कि पहाड़ों से चट्टानें क्यों खिसक रही हैं? सैलाब में घर और लोग क्यों बह रहे हैं? क्या ये सब देवी का तप में खलल का नतीजा है? ये वो तमाम सवाल हैं, जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है.

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भक्त बोले- माता को बख्श दो

वैष्णो देवी में हुए हादसे में जिंदा बचे भक्त कह रहे हैं कि ये लोग युगों पुरानी माता की तपस्या को भंग कर रहे हैं. माता वैष्णो देवी में आस्था रखने वाले भक्त ने कहा, मेरा दिल कह रहा है, माता रानी गुस्से में है. गुफा में माता रानी तपस्या कर रही है और आप बाहर हॉर्न बजा रहे हो. माता रानी श्रीराम के लिए तपस्या कर रही हैं और आप उन्हें ये नहीं करने दे रहे हैं. दिन रात यात्रा शुरू की है... यहां त्रिकुटा पर्वत पर हजारों लाखों सालों से माता रानी तपस्या कर रही हैं. 

माता वैष्णो देवी में आई इस प्रलय से नाराज भक्त ने आगे कहा कि माता रानी के पहाड़ों की जड़ें लेके रख दी हैं आपने...कितनी डेवलपमेंट करनी है? और कहीं जाकर डेवलपमेंट करो, इधर नहीं... मैं अकेला कितना बोलूं, कोई बोलता ही नहीं है. जिसे अच्छे दर्शन चाहिए वो श्राइन बोर्ड के खिलाफ बोलता ही नहीं है. 

कुछ ऐसी है माता वैष्णो देवी की कहानी

देवी की तपस्या से जुड़ी कहानियों के मुताबिक माता वैष्णो देवी के बचपन का नाम त्रिकुटा था, उनका जन्म दक्षिण भारत में भगवान विष्णु के अंश से हुआ. त्रिकुटा ने प्रभु श्रीराम को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या शुरू कर दी, माता सीता की खोज में निकले राम रामेश्वरम तट पर त्रिकुटा से मिले, जहां त्रिकुटा ने उन्हें पति के रूप में पाने की इच्छा जाहिर की. श्रीराम ने उन्हें वचन दिया था कि लंका से लौटते हुए वो उनके पास आएंगे, अगर देवी ने उन्हें पहचान लिया तो वो उनसे विवाह करेंगे. हालांकि साधु वेश में आए श्रीराम को देवी नहीं पहचान पाईं, तब श्रीराम ने कल्कि अवतार लेने के बाद देवी से विवाह का वादा किया. तभी से माता वैष्णो देवी त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान हैं. 

कुदरत ने दी थी चेतावनी 

ऐसा नहीं है कि कुदरत ने इस तबाही की चेतावनी नहीं दी थी. इससे पहले काफी इशारे किए थे, तबाही से पहले जोर की बिजली चमकी थी. पत्थर के छोटे छोटे छोटे टुकड़े पहले ही रास्ते पर गिर रहे थे और मौसम काफी ज्यादा खराब हो रहा था. ये बातें भी उन्हीं लोगों ने बताई हैं, जो इस सैलाब के चश्मदीद हैं. ये लोग माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड पर आरोप लगा रहे हैं और उनका कहना है कि यात्रा को पहले ही रोका जा सकता था.

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