- यूपी का गंगा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो चुका है. इसी महीने के अंत में इसकी शुरुआत होने वाली है
- एक्सप्रेसवे पर पेट्रोल पंप, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग, फूड कोर्ट, ट्रामा सेंटर और मोटेल जैसी सुविधाएं मिलेंगी
- गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के लिए हर किलोमीटर पर हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं
एक दौर था जब लोग एक कहावत कहते थे. इस कहावत में कहानी यूपी से जुड़ी थी. कहावत ये थी कि सड़क पर चलते रहो और जब सड़कों पर गड्ढे आ जायें, तो समझ लेना यूपी आ गया. पर ये एक दौर था, अब दौर बदल चुका है. वो बीमारी राज्य वाला दौर था और आज ग्रोथ इंजन वाला दौर है. इसी ग्रोथ इंजन में विकास की एक नई इबारत लिखी जा चुकी है और ये इबारत “गंगा एक्सप्रेसवे” की है. इस एक्सप्रेसवे का एक तिहाई काम प्रतिष्ठित अदानी समूह ने किया है.
गंगा एक्सप्रेसवे, वो ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जो अब बनकर तैयार हो चुका है. मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेसवे की शुरुआत इसी महीने के अंत में होने वाली है. जैसे ही ये एक्सप्रेसवे शुरू होगा, आप लगभग 600 किलोमीटर की दूरी मात्र 5 घंटे में पूरी कर पाएंगे. यही नहीं, इस एक्सप्रेसवे पर चलते हुए आपको जो सुविधाएं मिलेंगी, वो तो वर्ल्ड क्लास ही हैं. इसके अलावा इस एक्सप्रेसवे पर एक ऐसा रन-वे तैयार किया गया है, जिस पर लड़ाकू विमानों से लेकर बड़े कैरीअर फ्लाइट्स की लैंडिंग कराई जा सकती है.
कितना लंबा है गंगा एक्सप्रेसवे?
चलिए अब आपको गंगा एक्सप्रेसवे के बारे में बताते हैं. ये गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाएगा. इसकी लंबाई 594 किलोमीटर है. ये फ़िलहाल छह लेन का एक्सप्रेसवे है लेकिन भविष्य में अगर ज़रूरत पड़ी तो बिना लंबी क़वायद के इसे आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है. ये यूपी में 12 ज़िलों से होकर गुज़रेगा और भविष्य में इसे मेरठ के आगे उत्तराखंड के हरिद्वार तक जोड़ने की भी योजना है.
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे क्या होता है?
सवाल ये ज़हन में ज़रूर आया होगा कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे क्या होता है. इसका जवाब ये है कि वो एक्सप्रेसवे जो पूरी तरह नया बनाया गया है. इस एक्सप्रेसवे पर एक इंच भी पहले से बनी सड़क का हिस्सा नहीं लिया गया है. ये एलिवेटेड एक्सप्रेसवे छह लेन का है. बीच में दोनों साइड एक एक लेन सड़क बनाने की जगह छोड़ी गई है. साथ ही एक्सप्रेसवे के बाहर साइड लगभग एक लेन से ज़्यादा जगह पार्किंग के लिए भी रखी गई है.
सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के कई बेहतरीन इंतज़ाम किए गए हैं. एक्सप्रेसवे के दोनों तरह सीमेंटेड फेंसिंग की गई है. इसके अलावा स्पीड चेक करने के लिए हर दस किलोमीटर पर मॉनिटरिंग कैमरे लगाए गए हैं. इस एक्सप्रेसवे पर हर एक किलोमीटर पर हाई रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं. इसकी वजह से एक्सप्रेसवे पर चलती हर हर हर सेकंड सीसीटीवी कैमरा की नज़र में रहेगी. दूसरी साइड सामने से आ रही गाड़ियों की लाइट ना पड़े, इसके लिए डिवाइडर पर पेड़ पौधे लगाए गए हैं. रोड पर ऐड स्ट्रिप पर छोटे छोटे ब्रेकर नुमा पट्टे बनाए गए हैं, ताकि अगर ड्राइवर को नींद आ जाये या कोई गलती से लेन से बाहर जाये तो टायर से गड़गड़ाहट की आवाज़ से ड्राइवर अलर्ट हो जाये.
फैसिलिटी सेंटर का क्लास अलग है
इस 594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर कुल नौ फैसिलिटी सेंटर बनाये गए हैं. हर फैसिलिटी सेंटर पर पेट्रोल/डीज़ल पम्प, सीएनजी पम्प, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, फ़ूड कोर्ट, कार पिक अप फ़ूड ऑर्डर पॉइंट, कैफेटेरिया, ढाबा, मोटेल, डॉरमेट्री, ट्रामा सेंटर, मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर, टॉयलेट्स और बड़ी पार्किंग बनाई गई है. ये सुविधाएं सभी फैसिलिटी सेंटर पर मुहैया कराये जाने की योजना है.
वर्ल्ड क्लास अनुभव के इंतज़ाम
देश में बने एक्सप्रेसवे में गंगा एक्सप्रेसवे पहला है, जहां फैसिलिटी सेंटर में ट्रामा सेंटर की सुविधा दी गई है. देश के बड़े प्राइवेट अस्पतालों के साथ टाई-अप करके दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जल्द से जल्द बेहतर उपचार की सुविधा देने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा बड़े फ़ूड चैन के साथ मिलकर फ़ूड कोर्ट और कैफेटेरिया चलाया जाएगा. ट्रक ड्राइवर्स या सस्ता खाना चाहने वालों के लिए ढाबे की भी सुविधा हर फैसिलिटी सेंटर पर दी गई है.
आप बेधड़क कार लेकर एक्सप्रेसवे पर जायेंगे
एक्सप्रेसवे पर कार से चलने वालों को टेंशन होती है कि एक्सप्रेसवे पर सुविधाएं क्या मिलेंगी. तो आपको बतायें कि हर फैसिलिटी सेंटर पर पेट्रोल/डीज़ल पम्प, सीएनजी पम्प, चार कार और दो ट्रक्स को एक साथ चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट, हर सेंटर पर सर्विस स्टेशन के साथ साथ हर 50 किलोमीटर पर टो-अवे व्हीकल, क्रेन और एम्बुलेंस भी मुहैया कराये जायेंगे.
लाइटिंग की बेहतरीन सुविधा
एक्सप्रेसवे पर चलने वाले जानते हैं कि अगल-बगल खेतों की वजह से काफ़ी अंधेरा दिखाई देता है. ऐसे में एक्सप्रेसवे पर लाइटिंग के ख़ास इंतज़ाम किए गए हैं. हर इंटरचेंज पर बिजली के खंबे लगाए गए हैं. इसके अलावा जहां जहां पुल बने हैं, वहां भी स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई है. इसके अलावा पूरी सड़क पर लाल रंग के रेडियम लाइट वाले ब्लिंकर्स सड़क के दोनों तरफ़ लगाए गए हैं. बेरिकेड पर पीले रेडियम पट्टी लगाई गई है ताकि ढाने कोहरे में भी सड़क के किनारों की समझ मिल सके.
सीसीटीवी के ज़बरदस्त इंतज़ाम
जब आप गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ेंगे तो जब तक आप एक्सप्रेसवे से उतर नहीं जाते, आपकी गाड़ी सीसीटीवी की नज़र से एक सेकंड भी बाहर नहीं जाएगी. यहां हर एक किलोमीटर पर एक टू साइडेड हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी लगाया गया है. हर कैमरे की रेंज 500 मीटर है. यानी हर सेकंड गाड़ियां कैमरे की रेंज पर रहेंगी. इसके अलावा स्पीड रोकने के लिए हर दस किलोमीटर पर ट्रैकिंग कैमरे और स्पीड बताने वाले साइन बोर्ड्स लगाए गए हैं.
साइड लेन पर भी सुरक्षा के इंतज़ाम
गंगा एक्सप्रेसवे के बगल में साइड लेन बनाए गए हैं. किसी एक साइड ये लेन तैयार किए गए हैं, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को अंडरपास से एक्सप्रेसवे को पार करने में कोई दिक्कत ना आए. साथ ही एक्सप्रेसवे पर कोई ग्रामीण या आवारा जानवर ना घुसे, इसके लिए तार वाली फेंसिंग की जगह सीमेंटेड बैरियर लगाए गए हैं. जहां अंडरपास है, वहां लोहे की जाली वाली बैरियर से फेंसिंग की गई है.
सड़क पर उतरेंगे लड़ाकू विमान
गंगा एक्सप्रेसवे यूपी का तीसरा ऐसा एक्सप्रेस है, जिस पर फ्लाइट्स की लैंडिंग के लिए रन-वे बनाया गया है. इससे पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर रन-वे बनाया गया था. गंगा एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर ज़िले में 3.5 किलोमीटर लंबा रन-वे बना है. इस पर पिछले साल फाइटर प्लेन्स और कैरियर फ्लाइट्स की लैंडिंग करा के टेस्टिंग की जा चुकी है. किसी भी इमरजेंसी या युद्ध जैसे हालात में इस रन-वे का इस्तेमाल किया जा सकता है.
आपको टोल कितना देना होगा
एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वालों के मन में टोल की चिंता भी होती है. ऐसे में आपको बहुत टेंशन नहीं लेनी है. इस 594 किलोमीटर की दूरी के लिए आपको लगभग 1300 रुपए देने होंगे. ये सुनने में शायद ज़्यादा लगे लेकिन अगर आप ध्यान से सोचेंगे तो आपको इसमें किफ़ायत नज़र आएगी. अगर आप मेरठ से हाईवे से प्रयागराज तक जाते हैं तो आपको करीब 800 रुपए टोल के देने होते हैं. आपको इसमें लगभग 10 घंटे लगते हैं. ऐसे में बिना ट्रैफिक के भरपूर सुविधाओं के साथ एक्सप्रेसवे के सफ़र में आप काफ़ी तेल बचा लेते हैं.
रिकॉर्ड समय में काम पूरा हुआ
गंगा एक्सप्रेसवे का काम नवंबर 2022 में शुरू हुआ और अप्रैल 2026 में ये बनकर तैयार है. यानी लगभग सवा 3 साल में एक्सप्रेसवे बनकर तैयार है. इसकी स्पीड समझनी हो तो लगभग 1000 दिनों में करीब 600 किलोमीटर बनकर तैयार हुआ है. यानी औसत लगाए हैं तो एक किलोमीटर की छह लेन सड़क बनाने में दो दिन से भी कम समय लगा है. सड़क के अलावा सुरक्षा और सुविधा के इंतज़ाम भी इसमें शामिल हैं.
यूपी के 12 जिलों से गुज़रेगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कुल 12 ज़िलों से होकर गुज़रेगा, इसमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जिले शामिल हैं. ये एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव तक जाएगा. भविष्य में इसको हरिद्वार तक ले जाने की योजना है. जब ये योजना पूरी होगी तब इसमें अमरोहा और बिजनौर भी जुड़ जायेंगे.
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तैयार होगा
एक्सप्रेसवे सिर्फ़ आवाजाही की सुविधा का माध्यम नहीं बल्कि यूपी के विकास की इबारत लिखने का ज़रिया है. गंगा एक्सप्रेसवे के अगल बगल कई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स बनाए जाने की तैयारी है. एक्सप्रेस-वे के किनारे लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और औद्योगिक क्लस्टर तैयार करने की योजना है. यूपीडा ने इसकी शुरुआत भी कर दी है. बदायूं में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लाजिस्टिक्स क्लस्टर बनाने के लिए इकाइयों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. किसानों को अपने फल, सब्ज़ी, अनाज और डेयरी जैसे अपराधों को बड़े शहरों में भेजने में भी बड़ी सहूलियत मिलेगी.
आस्था का कॉरिडोर भी होगा तैयार
गंगा एक्सप्रेसवे पर्यटन को बढ़ाने का एक बड़ा ज़रिया बनने वाला है. ये संगम नगरी प्रयागराज तक जाएगा. भविष्य में इसको हरिद्वार तक जोड़ने की योजना है. ऐसे में हरिद्वार के तट से संगम तट तक की सुगम यात्रा से लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं को आने जाने में काफ़ी सहूलियत मिलने वाली है. हापुड़ के गढ़ मुक्तेश्वर का गंगा घाट हो या तीर्थ नगरी संभल या फिर संगम नगरी तक एक्सप्रेसवे से जाकर सौ किलोमीटर सिक्स लेन हाईवे के रास्ते बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी जाने की सुविधा इसे आस्था का भी कॉरिडोर बनाती है.
अदाणी समूह ने बनाई वर्ल्ड क्लास रोड
देश के प्रतिष्ठित अदाणी समूह ने गंगा एक्सप्रेसवे के चार में से तीन हिस्से तैयार किए हैं. 594 किलोमीटर में से 464 किलोमीटर की सड़क का निर्माण अदानी समूह को तरफ़ से किया गया है. ये सड़क सीमेंटेड नहीं बल्कि तारकोल से बनाई गई है. सीमेंटेड सड़क पर गर्मी के मौसम में हादसों को देखते हुए तारकोल वाली सड़क तैयार की गई है,ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.
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