- कांग्रेस के दो नेताओं ने मिडिल ईस्ट युद्ध से निपटने के लिए सरकार के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया है.
- आनंद शर्मा ने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय सहमति और दृढ़ संकल्प पर आधारित होनी चाहिए.
- कमल नाथ ने स्पष्ट किया कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सिर्फ एक माहौल बनाया जा रहा है.
कांग्रेस के दो नेताओं ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से निपटने के एनडीए सरकार के तरीके का समर्थन है. हालांकि पार्टी नेताओं के बयान कांग्रेस के आधिकारिक रुख से बिलकुल अलग है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने साफ तौर पर कहा कि एलपीजी का कोई संकट नहीं है, वहीं यूपीए सरकार में विदेश मंत्री रहे आनंद शर्मा ने ट्विटर पर कई पोस्ट लिखकर भारत द्वारा संकट से निपटने के कूटनीतिक तरीके की सराहना की है. इससे पहले, कांग्रेस के शशि थरूर और मनीष तिवारी ने मिडिल ईस्ट युद्ध के संबंध में पार्टी के रुख से हटकर बयान दिए थे. हालांकि पार्टी ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की थी. इन दोनों नेताओं की टिप्पणियों के कारण पहले भी पार्टी को अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ा था, खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के मामले में. इसके बाद पार्टी ने संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान दोनों नेताओं को दरकिनार कर दिया था.
कांग्रेस के दो नेताओं ने इस बार पार्टी लाइन से हटकर रुख अपनाया है. आनंद शर्मा ने इस विषय पर अपनी 11 पोस्ट में से एक में कहा कि संभावित जोखिमों से बचते हुए संकट से निपटने में भारतीय कूटनीतिक प्रयास परिपक्व और कुशल रहे हैं. उन्होंने लिखा कि भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय सहमति और दृढ़ संकल्प पर आधारित होनी चाहिए. साथ ही कहा कि सरकार ने अप्रत्याशित और अस्थिर हालात में नीतिगत निर्णयों के बारे में राजनीतिक नेताओं को अवगत कराने के लिए सर्वदलीय बैठक आयोजित की.
भारतीयों के हितों का रखना होगा ध्यान: आनंद शर्मा
आनंद शर्मा ने कहा कि यह राष्ट्रीय संवाद जारी रहना चाहिए. राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हित द्वारा निर्देशित परिपक्व प्रतिक्रिया समय की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फारस के साथ ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों के अलावा ऊर्जा संकट का भी प्रश्न है.
उन्होंने लिखा कि युद्ध ने ऊर्जा, आर्थिक और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों में इजाफा किया है. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, दुनिया के बाजारों में अस्थिरता और रुपये और अन्य राष्ट्रीय मुद्राओं के तेजी से अवमूल्यन से उत्पन्न होने वाली चुनौतियां सामने आती हैं, जिनका तत्काल समाधान जरूरी है.
साथ ही कहा कि पेट्रोलियम, एलपीजी (पीएनजी) जैसी महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति, 200 अरब डॉलर का ट्रेड, 1 करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी भारतीयों के हित और सुरक्षा को भी ध्यान में रखना होगा.
यह रुख पार्टी की उस नीति से बिलकुल अलग है, जो सरकार की खुलकर आलोचना करती है और कहती है कि सरकार अमेरिका और इजरायल का अनुसरण कर रही है और अपने दीर्घकालिक सहयोगी के विरुद्ध जा रही है. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि सरकार ने आत्मसमर्पण कर दिया है.
देश में एलपीजी की कमी नहीं: कमलनाथ
एलपीजी की कमी की कई खबरों के जवाब में कमल नाथ ने कहा कि ऐसी कोई कमी नहीं है. यह सिर्फ एक माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है. उन्होंने कहा कि राज्य में खाना पकाने की गैस की कोई कमी नहीं है और कुछ गुटों पर जानबूझकर राजनीतिक लाभ के लिए दहशत फैलाने का आरोप लगाया. कमलनाथ की पार्टी लगातार केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को एलपीजी आपूर्ति में देरी और जनता को हो रही कठिनाइयों के लिए निशाना बना रही है.
कमलनाथ के बयान से सिंधिया को मौका
उनके इस बयान ने भाजपा को हमला करने का मौका दे दिया है. केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ ने खुद कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है. कांग्रेस पार्टी जो इतने लंबे समय से झूठ और भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रही है, उसे शर्म आनी चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस पार्टी जनता में भय और अविश्वास पैदा करके राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करना बंद कर दे.
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