तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों हलचल काफी तेज है. दरअसल, हाल ही में थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के नेताओं ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राज्य में विजय के नेतृत्व वाली सरकार बनाने के लिए IUML का समर्थन हासिल करना था. हालांकि, इस बैठक के बाद जो बयान सामने आए, उन्होंने प्रदेश के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है.
मुलाकात के बाद IUML ने अपनी प्राथमिकताओं को पूरी स्पष्टता के साथ सामने रखा. पार्टी नेताओं ने जोर देकर कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रति उनकी वफादारी अडिग है. उन्होंने 'कल, आज और कल' का हवाला देते हुए साफ किया कि उनका गठबंधन कल भी DMK के साथ था, आज भी है और भविष्य में भी बना रहेगा. पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल वह अपने पुराने और भरोसेमंद साथी को छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं है.
समर्थन की पेचीदा शर्त और सियासी 'लूपहोल'
भले ही IUML ने DMK के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई हो, लेकिन उन्होंने TVK के लिए एक छोटा सा दरवाजा खुला छोड़ दिया है. पार्टी की ओर से एक दिलचस्प शर्त रखी गई है कि यदि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोई आपत्ति नहीं होती है, तो IUML भविष्य में TVK को समर्थन देने पर विचार कर सकती है. इस 'लूपहोल' ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भविष्य में किसी नए समीकरण की गुंजाइश बन सकती है.
राज्यपाल की भूमिका पर उठाए सवाल
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए IUML के नेताओं ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया. उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए राज्यपाल आरएन आर्लेकर को विजय को सरकार बनाने या शपथ लेने के लिए आमंत्रित करना चाहिए. साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि राज्यपाल के पद का उपयोग करके 'दबाव बनाने' (Arm Twisting) की कोई भी कोशिश लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है. पार्टी ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर देते हुए राजनीतिक स्थिरता की वकालत की.
यह भी पढ़ें- 76 जवानों की शहादत वाले ताड़मेटला नक्सली हमले के सभी आरोपी हाईकोर्ट से भी बरी, राज्य सरकार की अपील खारिज
ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब गवर्नर आरवी आर्लेकर ने गुरुवार को विजय को सरकार बनाने का दावा पेश करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है. उन्होंने बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए विजय द्वारा प्रस्तुत की गई योजना को भी स्वीकार नहीं किया. सूत्रों का कहना है कि दो दिनों में दूसरी बार हुई मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने अभिनेता से राजनेता बने विजय से 118 विधायकों के समर्थन पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया. वहीं, राजभवन से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्यपाल ने "स्पष्ट किया कि तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत का समर्थन स्थापित नहीं हो पाया है.
यह भी पढ़ें- MP News: शादी की खुशियों के बीच पहुंची पुलिस, फिर हुआ कुछ ऐसा, दूल्हा-दुल्हन को जोड़े में ही जाना पड़ा थाने
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं