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BJP नहीं, TMC विधायक करते हैं मुसलमानों को परेशान, फुरफुरा शरीफ वाले पीरजादा तोहा सिद्दीकी के ममता से सवाल

पश्चिम बंगाल का फुरफुरा शरीफ मुसलमानों का एक बड़ा तीर्थस्थल है. यह पश्चिम बंगाल की राजनीति को भी प्रभावित करता है. यहां के एक इशारे पर लाखों मुसलमान वोट करते हैं. इस साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीटीवी ने फुरफुरा शरीफ के प्रबंध निदेशक पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी से बातचीत की. यहां पढ़िए पूरी बातचीत.

BJP नहीं, TMC विधायक करते हैं मुसलमानों को परेशान, फुरफुरा शरीफ वाले पीरजादा तोहा सिद्दीकी के ममता से सवाल
हुगली:

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दुनिया में फुरफुरा शरीफ वह जगह मानी जाती है, जहां से तय होता है कि सरकार कौन बनाएगा और कौन सत्ता से बाहर बैठेगा. हर बार यह लड़ाई और दिलचस्प हो जाती है, क्योंकि फुरफुरा शरीफ का फैसला बदलने या वहीं टिके रहने से सत्ता का संतुलन बदल जाता है. इसी विषय पर एनडीटीवी ने फुरफुरा शरीफ के प्रबंध निदेशक पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी से बातचीत की. आइए देखते हैं कि उन्होंने हमारे सवालों के क्या जवाब दिए.  

कहा जाता है कि यहां की बात 2500 से ज़्यादा मस्जिदों से भी ज़्यादा असर डालती है. क्या इस बार भी ऐसा ही है? इस बार फुरफुरा शरीफ क्या कह रहा है?

सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि फुरफुरा शरीफ से ऊपर लोग हैं. बंगाल की आबादी कम से कम 10–11 करोड़ है, जिसमें करीब पांच करोड़ मुसलमान हैं. हम राजनीति को बहुत अच्छे से समझते हैं. हम लोगों से कहते हैं कि उसे वोट दो, जो जनता के भले के लिए काम करेगा. जो राजनीतिक पार्टी लोगों के लिए अच्छा काम करेगी, हम उसी के पास जाएंगे. हम चाहते हैं कि अस्पताल हों, मदरसे हों, स्कूल हों, कॉलेज हों. हम लोगों के लिए अच्छा काम चाहते हैं. और जो यह काम करेगा, हम उसके पास जाएंगे और उसे वोट देंगे.

आपके हिसाब से लोगों के लिए अच्छा काम कौन करेगा?

आजादी के बाद जब कांग्रेस आई, तब हम छोटे थे. लेकिन 34 साल तक यहां सीपीएम की सरकार रही और उस सरकार ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया. फुरफुरा शरीफ एक तीर्थस्थल है. फरवरी महीने में हर साल 21, 22, 23 तारीख को यहां बहुत बड़ा मेला लगता था. करीब 30 लाख लोग आते थे, कम से कम 20 लाख तो आते ही थे. लेकिन 34 साल सरकार में रहते हुए उन्होंने यहां एक गिलास पानी तक की व्यवस्था नहीं की. हालांकि इस सरकार ने सिर्फ यहां नहीं, पूरे बंगाल में काफी काम किया है. लेकिन इस समय अल्पसंख्यक समुदाय और सरकार के बीच टकराव चल रहा है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के कुछ एमएलए-एमपी, समर्थक और पदाधिकारी दिन में टीएमसी करते हैं और रात में आरएसएस की वर्दी पहन लेते हैं. इसी वजह से लोग नाराज़ हैं. पिछले चार साल से ममता सरकार मुसलमानों के लिए ठीक से काम नहीं कर रही. पहले एसआईआर का विरोध किया गया, खुद ममता बनर्जी ने कहा था, लेकिन फिर भी एसआईआर हुआ. वक्फ बोर्ड को लेकर कहा गया कि चिंता की जरूरत नहीं है, लेकिन वक्फ बोर्ड को पूरी तरह पटलाल बना दिया गया. इसलिए मैंने केस किया. मैंने सुप्रीम कोर्ट में केस किया. पहले केस आगे नहीं बढ़ा, फिर वकील ने जाकर उसे आगे बढ़ाया.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी आरोप लगाते हुए कहते हैं कि अपने 34 साल के शासनकाल में सीपीएम ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी आरोप लगाते हुए कहते हैं कि अपने 34 साल के शासनकाल में सीपीएम ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया. Photo Credit: ManogyaLoiwal

आपके और दीदी के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं. आप दीदी को पसंद करते हैं. क्या चुनाव के समय आप उनके खिलाफ बोलते हैं?

नहीं, नहीं. मैं दीदी के खिलाफ नहीं बोलता. मैं दीदी से प्यार करता हूं. मैं उस इंसान से प्यार करुंगा जो लोगों के लिए काम करेगा. जो लोगों के साथ खड़ा रहेगा. ममता बनर्जी ने सड़कों के लिए, घाटों के लिए बहुत अच्छा काम किया है. लेकिन उनके दिमाग में यह बात क्यों आई कि सरकार को मंदिर बनाना चाहिए? हम कहते हैं कि हिंदू मंदिर बनाएंगे, मुसलमान मस्जिद बनाएंगे. सरकार को सरकारी पैसे से न मंदिर बनाना चाहिए और न मस्जिद. बीजेपी का सिर्फ एक ही मुद्दा है- मंदिर, मस्जिद, हिंदू-मुसलमान. राज्य सरकार का मुद्दा पहले ऐसा नहीं था. सरकार ने पूरे बंगाल में अच्छा काम किया है, लेकिन जब सरकार मंदिर में घुसी, तो हम, बंगाल के लोग, इसके खिलाफ हैं.

तो क्या आप ममता बनर्जी के खिलाफ हैं क्योंकि उन्होंने मंदिर बनवाया?

हां. सरकार मंदिर क्यों बनाए? मंदिर बने, मस्जिद बने, गुरुद्वारा बने- सबका हक है. लेकिन ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई—सब उनके हैं. फिर सरकार क्यों सरकारी पैसे से मस्जिद या मंदिर बनाए?

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाई जा रही है.

हां, बाबरी मस्जिद बन रही है. सौ मस्जिदें बनें, कोई दिक्कत नहीं. हम समर्थन करेंगे. लेकिन अगर मस्जिद बनाकर राजनीति की जाएगी, हिंदू-मुसलमान को लड़ाने के लिए, तो हम ऐसी मस्जिद में नमाज़ नहीं पढ़ेंगे. मक्का-मदीना के बारे में आपने सुना है? मदीना में कुछ मुसलमानों ने मिलकर एक मस्जिद बनाई थी. उस मस्जिद के बारे में कुरान में आयत उतरी थी कि वहां नमाज़ पढ़ना अलग बात है, लेकिन उसमें प्रवेश मत करो. मस्जिद बनाने का मकसद क्या है? अगर मकसद हिंदू-मुसलमान को लड़ाना है, तो हम उसके खिलाफ हैं.

अगर बाबरी मस्जिद बनी तो क्या आप वहां जाएंगे?

नहीं. मैं सौ बाबरी मस्जिदों में जाऊंगा. लेकिन मस्जिद बनाने का मकसद क्या है? क्या वह राजनीतिक मकसद है? हिंदू-मुसलमान को लड़ाने का?

यह कौन कर रहा है?

हुमायूं कबीर. उसे तृणमूल कांग्रेस से निकाल दिया गया. मस्जिद बनाने के नाम पर देश में अराजकता फैलाई जाएगी. हिंदू-मुसलमान का झगड़ा होगा. मैं यह नहीं चाहता.

 पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी का आरोप है कि मुसलमानों को बीजेपी से नाराज करने के लिए एसआईआर किया जा रहा है.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी का आरोप है कि मुसलमानों को बीजेपी से नाराज करने के लिए एसआईआर किया जा रहा है. Photo Credit: ManogyaLoiwal

ममता बनर्जी भी कहती हैं कि बीजेपी हिंदू-मुसलमान के बीच नफरत फैलाती है. क्या आप इससे सहमत हैं?

बीजेपी की सरकार सीधे आरएसएस के इशारे पर चलती है, यह हम जानते हैं. लेकिन पिछले चार साल से तृणमूल सरकार भी अप्रत्यक्ष रूप से आरएसएस की बात सुन रही है.

आप बहुत बड़ा आरोप लगा रहे हैं.

मैं सच बोल रहा हूं. बीजेपी सीधे आरएसएस से चलती है और तृणमूल सरकार परोक्ष रूप से.

आपके परिवार के लोग तो तृणमूल में हैं.

वह पागल है. वह हर समय ममता बनर्जी की बात करता है. मैं कासेम सिद्दीकी की बात कर रहा हूं. उसे छोटी-सी जिम्मेदारी देकर चुप करा दिया गया. इस साल हालात बहुत खराब हैं. आज कासेम सिद्दीकी की कब्र करबस्तान में है. वहां कौन जाएगा? ममता बनर्जी? अभिषेक?

बीजेपी का आरोप है कि ममता बनर्जी मुसलमानों के लिए बहुत काम करती हैं.

बीजेपी जो चाहे कहे, टीएमसी जो चाहे कहे. सवाल यह है कि जनता क्या कहेगी.

इस बार बंगाल के मुसलमान आपकी अगुवाई को कैसे देख रहे हैं?

इस साल एसआईआर मुसलमानों को परेशान कर रहा है. बीजेपी मुसलमानों को केंद्र से परेशान करती है, लेकिन बीएलओ और लोकल लोग टीएमसी के हैं. इसलिए लोग कहते हैं कि बीजेपी और टीएमसी मिलकर काम कर रहे हैं. पहले 100 फीसदी मुसलमान टीएमसी को वोट देते थे, लेकिन 2026 में यह बदलेगा.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी का आरोप है कि ममता बनर्जी तो ठीक हैं, लेकिन उनके एमपी-एमएलए मुसलमानों के खिलाफ काम करते हैं.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी का आरोप है कि ममता बनर्जी तो ठीक हैं, लेकिन उनके एमपी-एमएलए मुसलमानों के खिलाफ काम करते हैं. Photo Credit: pti

तो आप किसे वोट देंगे?

अगर एक आदमी मुझे वोट दे देगा, तो क्या सरकार बन जाएगी? मैं इंसान हूं, मैंने सब सोचा है.

आपने मंदिरों और मस्जिदों में CCTV लगाने की बात कही थी.

मस्जिद, मंदिर, गुरुद्वारे, सब जगह CCTV होना चाहिए. राजनीतिक पार्टियां नीचे गिर चुकी हैं. कभी मंदिर में गोमांस फेंक देंगे, कभी मस्जिद में सूअर का मांस, और फिर एक-दूसरे पर आरोप लगाएंगे.

पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था कैसी है?

कानून-व्यवस्था के लिए सबको दोषी नहीं ठहराया जा सकता. ठीक-ठाक है.

पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर आपका क्या कहना है?

यह बहुत दुखद है. इंसान है, इंसान. बंगाल में एक आदमी को जला दिया गया, मार दिया गया. यह बहुत दुखद है. लेकिन मीडिया कहता है कि यह बांग्लादेश में हुआ. बंगाल में हुआ, यह क्यों नहीं कहते?

आख़िरकार, इस बार आपके लिए सबसे बड़े मुद्दे क्या हैं?

एसआईआर. एसआईआर अब सबका मुद्दा बन गया है. हमने दस्तावेज़ दिए हैं. लेकिन एसआईआर के नाम पर जो नाटक चल रहा है, वह सिर्फ मुसलमानों को परेशान करने के लिए है. मुसलमानों को बीजेपी से नाराज़ करने के लिए एसआईआर किया जा रहा है. वे एसआईआर को वोट नहीं देंगे, यह ठीक नहीं है.

अगर हुमायूं कबीर आकर आपसे समर्थन मांगें, तो आप क्या कहेंगे?

सबसे पहले हम उनसे कहेंगे कि अपना काम करो. काम देखने के बाद चाहे सीपीएम हो, कांग्रेस हो, तृणमूल हो, आईएसएफ हो, जो भी यहां आए हम किसी से यह नहीं कहेंगे कि हम तुम्हारा समर्थन करते हैं. और हम यह कैमरे पर कहेंगे, बंगाल के सभी लोगों से कहेंगे, जो भी काम तुम करते हो, उसे एक तरफ रखो. जो भी विश्वासघात करता है, उसे एक तरफ रखो.

बार-बार विश्वासघात क्यों किया जा रहा है? केंद्र में बीजेपी है और बंगाल में तृणमूल है, तो फिर आपको धोखा कौन दे रहा है?

बहुत समय हो गया है, 15 साल हो गए हैं. ममता बनर्जी अच्छी इंसान हैं, है ना? लेकिन ममता बनर्जी के एमएलए-एमपी ही धोखा दे रहे हैं. जहां-जहां मुसलमान हैं, आप देखिए—वहां झगड़ा है, मारपीट है, झूठे केस लगाए जा रहे हैं. कौन से टीएमसी के एमएलए-एमपी? सभी नहीं, सभी नहीं.

लेकिन BJP मुसलमानों की पहली दुश्मन है. और TMC में भी कुछ एमएलए-एमपी ऐसे हैं जो ठंडे बस्ते में बीजेपी के लिए काम करते हैं. यहां पश्चिम बंगाल में सतियारिया बहादुर की बीजेपी की एमएलए की सीट है. सतियारिया बहादुर. बहुत अच्छी बात है, ले लो. सतियारिया बहादुर बीजेपी के एमएलए हैं. उसी इलाके से कोई मुसलमान हमारे पास आकर नहीं बोला कि बीजेपी हमारा एमएलए है और वह हमें सताता है, मस्जिद तोड़ता है, मदरसे तोड़ता है, हमें मस्जिद में घुसने नहीं देता. उस इलाके से ऐसी शिकायत नहीं आई.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी का कहना है कि जो हर इंसान के लिए, सिर्फ मुसलमान के लिए नहीं, अच्छा काम करेगा, वोट उसी को जाएगा.

पीरज़ादा तोहा सिद्दीकी का कहना है कि जो हर इंसान के लिए, सिर्फ मुसलमान के लिए नहीं, अच्छा काम करेगा, वोट उसी को जाएगा.
Photo Credit: ManogyaLoiwal

लेकिन यहां के लोग, मुसलमान, जिन्होंने टीएमसी को वोट दिया, उनके बहुत सारे एमएलए मुसलमानों पर अत्याचार करते हैं. बहुत अत्याचार करते हैं. झूठे केस में फंसा देते हैं. जिस टीएमसी को हमने वोट दिया, उन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया. यह सतियारिया बहादुर की सीट है. उसी इलाके से किसी ने नहीं कहा कि बीजेपी का एमएलए हमें सताता है, मस्जिद तोड़ता है, मदरसे तोड़ता है. शिकायतें दूसरी जगहों से आई हैं. टीएमसी के एमएलए से आई हैं.

शौकत मुल्ला—क्या आपने उसका नाम सुना है? वह हमें बहुत सताता है. बहुत सताता है. उसने अपनी मां और भाभी का गला तक काट दिया.

हमारे यहां के एमएनलए, शिनासी चक्रवर्ती—शिनासी चक्रवर्ती—यह जगह भारत में फुरफुरा शरीफ के बाद दूसरी सबसे अहम जगह है. 15 साल हो गए. 15 साल में उसने पांच लाख रुपये का भी काम नहीं किया. इतनी मशहूर जगह, सिर्फ पांच लाख. वे आते हैं, सोने का चूर्ण मांगते हैं और भाग जाते हैं. इतने पैसे का क्या किया? एमएलए को हर साल 60 लाख मिलते हैं, वो पैसा कहां गया?

आपने यह बात कभी अपनी बहन से नहीं कही?

मैं उन्हें बहुत परेशान करता हूं. उसे छोड़िए. ऐसे बहुत सारे एमएलए हैं.

जब जनसांख्यिकीय बदलाव की बात आती है तो बंगाल का नाम आता है.कई जिलों में मुसलमानों की आबादी काफी बढ़ी है. इसे लेकर नए सवाल खड़े किए जा रहे हैं. आप इसे कैसे देखते हैं?

नहीं, नहीं, यह अलग मुद्दा है. यह सच्चाई है. यहां मुसलमानों की आबादी है. हम इसे आईएसएफ कहते हैं.

आप अपने चाचा की सुनेंगे या भतीजे की?

राजनीति में भतीजे की सुनूंगा. और निजी तौर पर चाचा की. मैं अपने चाचा की सुनूंगा.

आपके चाचा और भतीजे के बीच कोई सेटिंग है?

हां, हां. जब वह मरेंगे, मैं जाऊंगा. जब मैं मरूंगा, वह आएगा.

यह कैसी सेटिंग है?

ऐसी ही है. वह कहेगा—चाचा, मुझे वोट दीजिए. मैं सोचूंगा. उसका काम देखूंगा, फिर वोट दूंगा.

इस बार क्या आप अपने भतीजे को वोट देंगे?

मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा.

आखिरी सवाल—इस बार बहुत सारे मुद्दे सामने आ रहे हैं. आपके लिए सबसे बड़ा मुद्दा क्या होगा? कश्मीर की धारा 370, तीन तलाक—ये आपके लिए कितने बड़े मुद्दे हैं?

यह बीजेपी का मुद्दा है. बीजेपी करेगी. बीजेपी करेगी. लेकिन करेगी नहीं. उन्होंने पहले ही शुरू कर दिया है. मैंने आपको बताया—दीघा. दीघा एक प्रोजेक्ट सेंटर है. वहां 100 फीसदी पर्यटकों में 40 फीसदी मुसलमान जाते हैं. वहां आपने मंदिर बनाया, मुझे बहुत खुशी हुई. दिल से कह रहा हूं.

लेकिन 40 फीसदी के लिए आपने ऐसी मस्जिद बनाई. कोलकाता में, राजारहाट में आपने दुर्गा मंदिर बनाया. मस्जिद क्यों नहीं बनाई? मुझे लगता है मुसलमानों का वोट हमारे पास जाएगा. हमें यह नहीं चाहिए. हमने कहा—मस्जिद मत बनाइए.मंदिर मत बनाइए. काम कीजिए.

यहां शिक्षा व्यवस्था अच्छी हो. करोड़ों लोग—लड़कियां और लड़के—अच्छी शिक्षा पाएं. नौकरियों की चिंता मत कीजिए. अस्पतालों की चिंता मत कीजिए. क्या लोग मंदिर खाएंगे? क्या लोग मस्जिद खाएंगे? हम पेट भरेंगे. हमें मस्जिद नहीं चाहिए. हमें मंदिर नहीं चाहिए.

ममता बनर्जी सोचती हैं कि मंदिर बनाएंगी तो हिंदू वोट देंगे. हुमायूं सोचता है—मस्जिद बनाएंगे तो मुसलमान वोट देंगे. हमें यह नहीं चाहिए. जो हर इंसान के लिए, सिर्फ मुसलमान के लिए नहीं, अच्छा काम करेगा—वोट उसी को जाएगा.

हमें नहीं पता कि कौन किसे वोट देगा, लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव दिलचस्प होगा.

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