14 फरवरी को तेलंगाना स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे घोषित होने के दो दिन बाद भी राज्य की राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है. कांग्रेस की जीत के बाद BJP ने कांग्रेस से सवाल किया है कि अब 'वोट चोरी' का मुद्दा क्यों नहीं उठा रहे, वोट चोरी कहां गई? बता दें कि ये चुनाव 12 फरवरी को कराए गए थे और चेयरपर्सन, मेयर तथा उनके डिप्टी पदों के लिए मतदान प्रक्रिया 16 फरवरी तक पूरी की गई, हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने 11 नगरपालिकाओं में मतदान को स्थगित कर दिया था.
'सेलेक्टिव तरीके से हल्ला मचाती है कांग्रेस'
इस पूरे विवाद के केंद्र में BJP ने भी आरोप लगाया है. पार्टी की प्रवक्ता रचना रेड्डी ने कांग्रेस पर 'राजनीतिक पाखंड' का आरोप लगाते हुए कहा कि वह कथित वोट हेरफेर के मुद्दे पर चयनात्मक तरीके से आक्रोश जताती है.
कांग्रेस नेताओं द्वारा कई राज्यों में हार के बाद 'वोट चोरी' के आरोप उठाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'जब वे जीतते हैं तो वोट चोरी नहीं होती, लेकिन जब हारते हैं तो सिस्टम को दोष देते हैं.'
उन्होंने यह भी दावा किया कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार अपने सात प्रमुख वादों को पूरा करने में नाकाम रही है और कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव सीधे तौर पर फंड आवंटन और विकास कार्यों से जुड़े होते हैं.
कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन चर्चा में
बहरहाल आलोचनाओं के बावजूद आंकड़े कांग्रेस की बड़ी जीत की ओर इशारा करते हैं. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने पूरे राज्य में 86 चेयरपर्सन और मेयर पदों पर जीत दर्ज की है, जबकि 84 डिप्टी पद भी उनके खाते में गए हैं. BRS को 18 चेयरपर्सन और 14 डिप्टी पद मिले हैं. BJP को 2 मेयर या चेयरपर्सन पद और 5 डिप्टी पद हासिल हुए हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों ने 4 चेयरपर्सन और 4 डिप्टी पद जीते हैं. CPI ने 1 मेयर पद, AIFB ने 1 चेयरपर्सन और 1 डिप्टी पद, CPM ने 1 डिप्टी चेयरपर्सन पद और AIMIM ने 3 डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की है.
ज्यादातर शहरी निकायों में कांग्रेस ने BRS से बेहतर प्रदर्शन किया है. नगर निगमों में कांग्रेस का दबदबा देखने को मिला, जबकि BJP केवल करीमनगर में एक निगम जीतने में सफल रही.
इन नतीजों को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने के तौर पर देखा जा रहा है. 2023 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत दिलाने के बाद उन्होंने विधानसभा उपचुनावों, लोकसभा सीटों और अब स्थानीय निकायों तक पार्टी की स्थिति को मजबूत करना जारी रखा है.
सीएम रेड्डी की राहुल गांधी से मुलाकात भी चर्चा में
राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री की हालिया राहुल गांधी से मुलाकात भी चर्चा का विषय बनी हुई है. चुनाव प्रक्रिया की घोषणा के बाद पिछले हफ्ते रेवंत रेड्डी ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी, जिसे राज्य और केंद्रीय कांग्रेस नेतृत्व के बीच अहम राजनीतिक समन्वय के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
अब जब स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं, मुख्यमंत्री का फोकस राष्ट्रीय मंच की ओर भी बढ़ता दिख रहा है. रेवंत रेड्डी अगले दो दिनों तक राष्ट्रीय राजधानी में रहेंगे, जहां वे इंडिया AI समिट में हिस्सा लेंगे. इस समिट में कई बड़े नेता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं. उनकी मौजूदगी को तेलंगाना को उभरते AI और टेक इकोसिस्टम में एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
फिलहाल कांग्रेस मजबूत जमीनी जनादेश का जश्न मना रही है, BRS अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है और BJP सरकार की कार्यशैली व राजनीतिक निरंतरता दोनों पर सवाल उठाते हुए अपने हमले तेज कर रही है.
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