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AIADMK और बीजेपी गठबंधन का लिटमस टेस्ट, अन्नामलई की दूरी कितना पड़ेगी भारी

Tamil Nadu Election Result 2026: तमिलनाडु चुनाव नतीजों पर सबकी नजर है. इस बार बीजेपी और AIADMK का अलग होना और अन्नालमई फैक्टर क्या असर करता है, यह देखना होगा

AIADMK और बीजेपी गठबंधन का लिटमस टेस्ट, अन्नामलई की दूरी कितना पड़ेगी भारी
  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे और यह राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं
  • AIADMK ने सितंबर 2023 में बीजेपी के साथ अपने गठबंधन को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया था
  • के. अन्नामलई की विवादास्पद टिप्पणियों ने बीजेपी और AIADMK के गठबंधन टूटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों का ऐलान कल यानी 4 मई को होगा. तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर सियासी जंग के नतीजे सियासत के लिहाज से काफी अहम हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह AIADMK और बीजेपी का गठबंधन टूटना है. आसान शब्दों में कहें तो तमिलनाडु चुनाव के नतीजे बीजेपी और AIADMK के बीच टूटे हुए गठबंधन का लिटमस टेस्ट है. AIADMK ने सितंबर 2023 में आधिकारिक तौर पर बीजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था. ऐसे में एक तरफ सीएम स्टालिन के नेतृत्व वाला DMK गठबंधन है, तो पहले से तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज है. वहीं दूसरी ओर एडप्पादी पलानीस्वामी (EPS) के लिए यह चुनाव अग्निपरीक्षा है.

इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा में के. अन्नामलई हैं. AIADMK के बीजेपी से नाता तोड़ने की वजह भी अन्नामलाई द्वारा सी.एन. अन्नादुरई और जयललिता पर की गई विवादास्पद टिप्पणियां थीं. अन्नामलई ने जिस आक्रामक अंदाज में 'द्रविड़ राजनीति' को चुनौती देते हुए बीजेपी को अकेले चुनावी मैदान में उतारा, उसकी असल कीमत कल ईवीएम खुलने के साथ साफ हो जाएगी. क्या अन्नामलई का यह अनोखा रवैया बीजेपी को अपने दम पर तमिलनाडु की तीसरी बड़ी ताकत बना पाएगा या फिर विपक्ष के और कमजोर होने का कारण बनेगा?

अन्नामलई की दूरी का क्या होगा असर?

सिविल अफसर से नेता बने अन्नामलई तमिलनाडु की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. बीजेपी के लोकप्रिय नेताओं में उनकी गिनती की जाती है. उन्होंने अपनी आक्रामक हिंदुत्व और द्रविड़ राजनीति के विकल्प की जो छवि पेश की है, उसने राज्य में बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक को जरूर बढ़ाया है, लेकिन इसी रवैये ने गठबंधन का खेल भी बिगाड़ दिया. तमिलनाडु जैसे राज्य में बीजेपी को अकेले बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करना एक बड़ा टास्क है. AIADMK बीजेपी को जमीन पर मजबूत करने में मदद कर सकती थी, लेकिन गठबंधन टूटने से यह खेल और बिगड़ गया. हालांकि अन्नामलई ने लगातार पदयात्राएं की, जिससे बीजेपी के वोट प्रतिशत में इजाफा हो सकता है, लेकिन वह सीटों में बदलेगा या नहीं? यह अभी भी बड़ा सवाल है.

AIADMK के लिए कैसा रहेगा चुनाव?

बीजेपी से अलग होने के बाद AIADMK के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है. AIADMK अपनी द्रविड़ पहचान को बचाने की कोशिश कर रही है. बीजेपी से अलग होकर एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) फिर से मुस्लिम और ईसाई समुदायों के उन वोटों को साधने की कोशिश कर रहे हैं जो गठबंधन की वजह से दूर हो गए थे. लेकिन गठबंधन टूटने से एंटी इंक्बेंसी वोटों का बंटवारा होगा और इसका सीधा फायदा DMK को मिल सकता है.

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