सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलर पासपोर्ट और वीजा सर्विस (CPV) की आउटसोर्सिंग के लिए केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है. केंद्र ने अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा में भारतीय मिशनों में काउंसलर पासपोर्ट और वीजा सर्विस (CPV) की आउटसोर्सिंग के लिए प्राइवेट फर्मों को दिए गए टेंडर को रद्द करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थीं.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया है.
हालांकि, कॉन्सुलर सेवाओं को जारी रखने के लिए कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में SC ने बदलाव किया और MEA को या तो मौजूदा सर्विस प्रोवाइडर्स को जारी रखने या उन L-1 बिडर्स को कुछ समय के लिए काम पर रखने की अनुमति दी, जिनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए थे, जब तक कि नया टेंडर प्रोसेस पूरा नहीं हो जाता.
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसले में क्या कहा था?
केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीमित समय के लिए वीजा पासपोर्ट की सुविधा दी जाए ताकि इस बीच टेंडर आमंत्रित कर उचित फर्म को सर्विस का जिम्मा दिया है सके.
अभी तक इन देशों में वीजा पासपोर्ट प्रक्रिया देखने वाली फर्म अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा स्थित दूतावास में पासपोर्ट, वीजा और कांसुलर सेवाओं को लेकर दिक्कत पैदा हो गई है. इससे विदेशों में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की दिक्कत बढ़ गई है.
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