- देशभर में मई महीने की शुरुआत में बारिश के बावजूद तेज धूप और बढ़ते तापमान से गर्मी का दौर जारी है
- सुपर अल नीनो के कारण मई से जुलाई के बीच दुनिया भर में जोरदार जलवायु परिवर्तन और मौसम अस्थिरता की संभावना है
- भारत में सुपर अल नीनो के कारण मॉनसून कमजोर पड़ने से बारिश कम हो सकती है और सूखे की स्थिति बन सकती है
राजधानी दिल्ली समेत देशभर में भीषण गर्मी का दौर जारी है. भले ही मई महीने की शुरुआत झमाझम बारिश के साथ हुई है, लेकिन दिन में तेज धूप की वजह से तापमान लगातार बढ़ रहा है. अप्रैल में भी गर्मी ने कई रिकॉर्ड बनाए. मौसम विभाग लगातार लू का अलर्ट जारी कर रहा है. ऐसे केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है. मौसम में हो रहे इस बदलाव की वजह है 'सुपर अल नीनो'. दुनियाभर के मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल के आखिर में अल नीनो का एक जोरदार मौसम पैटर्न बन सकता है, जिसके पिछले तीन दशकों में सबसे मजबूत अल नीनो में से एक बनने की संभावना है.
दुनियाभर में सुपर अल नीना का अलर्ट
राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय संचालन यानी NOAD का कहना है कि मई और जुलाई के बीच अल नीनो के बनने की करीब 60% संभावना है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी ने भी हाल ही में कहा था कि अल नीनो की स्थितियां मई से जुलाई के बीच कभी भी बन सकती हैं. वहीं विश्व मौसम एजेंसी (WMO) ने कहा है कि शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि यह घटना काफी जोरदार हो सकती है और कुछ लोग तो इस आने वाली घटना को 'सुपर अल नीनो' भी कह रहे हैं. मौसम के इस पैटर्न का सबसे ज्यादा असर भारत जैसे एशियाई देशों पर पड़ेगा.

क्या है सुपर अल नीनो?
सुपर अल नीनो (Super El Nino) अल नीनो का एक अत्यंत शक्तिशाली रूप है, जो तब होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री या उससे अधिक बढ़ जाता है।यह एक दुर्लभ जलवायु घटना है जो दुनिया भर के मौसम में विनाशकारी बदलाव लाती है. यह स्थिति कई दशकों में एक बार देखने को मिलती है. इस साल जिस सुपर अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, वह करीब 30 साल बाद होगा.इस दौरान समुद्र के ऊपर चलने वाली व्यापारिक हवाएं बहुत कमजोर हो जाती हैं या अपनी दिशा बदल लेती हैं, जिससे गर्म पानी पूरे प्रशांत क्षेत्र में फैल जाता है. 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में सुपर अल नीनो की घटनाएं दर्ज की गई थीं. वैज्ञानिकों ने 2026 में भी इसके आने की संभावना जताई है. भारत में इसके कारण मॉनसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे बारिश कम होती है और भीषण सूखा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है. इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होता है और महंगाई बढ़ सकती है.

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भारत में क्या असर होगा?
भारत के मौसम विभाग (IMD) ने भी पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि मई में हिमालय के तराई क्षेत्र के कुछ हिस्सों, पूर्वी तटीय राज्यों, गुजरात और महाराष्ट्र में सामान्य से अधिक दिन लू चलने की संभावना है. मौसम विभाग ने यह भी कहा कि मई के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से ज्यादा होने की संभावना है, क्योंकि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून का आगमन 14-16 मई के आसपास होने की उम्मीद है.
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, ‘मई 2026 के दौरान देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का पूर्वानुमान है.' उन्होंने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों के साथ-साथ मध्य भारत के कुछ हिस्सों, प्रायद्वीपीय भारत के सटे क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के दक्षिणी हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने का पूर्वानुमान है.
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