- गुजरात के वाडीनगर बंदरगाह पर जग वसंत जहाज 16 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर पहुंच चुका है और लंगर डाले खड़ा है
- एलपीजी को एमटी रोज जहाज में ट्रांसफर करने में लगभग 16 से 18 घंटे का समय लगेगा
- ईरान के हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य असुरक्षित हो गया है और लगभग 500 टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं
मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारतीयों के लिए एक और राहत की खबर है. 'जग वसंत' जहाज में 16 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के वाडीनगर बंदरगाह पर पहुंच गया है. 'जग वसंत' जहाज देर रात पहुंचा और अब लंगर डाले खड़ा है. जल्द ही एलपीजी को एमटी रोज में ट्रांसफर किया जाएगा. 1 हजार मीट्रिक टन एलपीजी को स्थानांतरित करने में 1 घंटा लगता है. इसलिए पूरे स्टॉक को ट्रांसफर करने में लगभग 16 से 18 घंटे लगेंगे. यह एक गहरे समुद्र में होने वाला ऑपरेशन है. इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं. यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है.

ईरान के हमलों के कारण होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित नहीं है. ऐसे में लगभग 500 टैंकर जहाज फारस (अरब) की खाड़ी में फंसे हुए हैं. इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं. जानकारों का कहना है कि ईरान कुछ चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे रहा है. इसमें भारत के जहाज भी शामिल हैं.
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कितना तेल आयात करता है भारत?
भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है. युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता था. इन क्षेत्रों से आने वाले जहाज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं. एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है. हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है, लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कटौती हुई है.
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