- भारत की 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में ऑपरेशन सिंदूर में मिली निर्णायक विजय की झलक पहली बार प्रदर्शित होगी
- परेड में बैटल एरे फॉर्मेशन दिखाया जाएगा, जिसमें कॉम्बैट एलिमेंट्स और सपोर्ट एलिमेंट्स की ग्रुपिंग का प्रदर्शन
- पहली बार टी-90 और अर्जुन टैंक साथ में परेड में शामिल होंगे, जो सैन्य क्षमता की मजबूती दर्शाते हैं
भारत की 77वीं गणतंत्र दिवस परेड के लिए पूरा देश उत्साहित है, जिसको लेकर पूरे जोर-शोर से तैयारियां चल रही है. तमाम दस्ते इस बार कर्तव्य पथ पर अपने शौर्य और शक्ति का प्रदर्शन करेंगे. इस बीच एनडीटीवी ने परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार से बातचीत की. बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने बताया कि इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में क्या खास होने वाला है. लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं. गणतंत्र दिवस की परेड में इस बार क्या खास होगा, जानिए-

सवाल- इस बार गणतंत्र दिवस परेड में हर बार से क्या अलग है?
जवाब- इस बार गणतंत्र दिवस परेड में जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर में मिली निर्णायक जीत के बाद यह पहली गणतंत्र दिवस परेड है. उन्होंने बताया कि इस परेड में जो इक्विपमेंट है. मार्चिंग दस्ता है उसमें भारत में निर्मित नई टेक्नोलॉजी वाला उपकरणों को कैसे सेनाओं में शामिल किया है और ऑपरेशन्स में उसको शामिल किया है, यह साफ दिखाई देगा. साथ ही इस बार सेना में जो नई ऑर्गनाइजेशनल ट्रांसफॉर्मेशन हुई है, उसकी झलक भी देखने को मिलेगी.
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सवाल- क्या इस बार की परेड में ऑपरेशन सिंदूर की भी झलक देखने को मिलेगी? किस तरह से 88 घंटे में पाकिस्तान को भारत ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया?
जवाब- बिल्कुल, परेड में आपको देखने को मिलेगा कि हमारी फौज कितनी मजबूत है. हमारी एयर पावर, लॉन्ग रेंज वेक्टर, ब्रह्मोस जैसे हथियारों का इस्तेमाल और युद्ध के दौरान सेना कैसे पूरी तैयारी में रहती है. यह सब परेड में प्रदर्शित किया जा रहा है. इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ की झांकी और आर्मी के इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर की झांकी में भी ऑपरेशन की अनफोल्डिंग का संकेत मिलता है.

सवाल- परेड को एक बैटल एरे फॉर्मेशन में दिखाया जा रहा है जैसे सेना युद्ध लड़ती है ?
जवाब- कर्तव्य पथ पर हम इस बार बैटल एरे फॉर्मेशन दिखा रहे हैं. इसका मतलब है कि जब हम युद्ध में जाते हैं या किसी ऑफेंसिव (हमलावर) ऑपरेशन पर जाने से पहले कॉम्बैट एलिमेंट्स और कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स की ग्रुपिंग कैसे होती है. कैसे इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रेकी की जाती है, ताकि पूरे इलाके की स्थिति साफ समझ में आए. दुश्मन के स्ट्रैटेजिक एसेट्स को एयर पावर और लॉन्ग रेंज मिसाइलों से कैसे तबाह किया जाता है, ताकि ग्राउंड फोर्सेस को आगे बढ़ने का फ्रीडम मिल जाए.
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अब मेकनाइज्ड फोर्सेस के साथ अटैक हेलीकॉप्टर भी चलते हैं. कर्तव्य पथ पर अपाचे, भारत में निर्मित रुद्र और प्रचंड हेलीकॉप्टर भी दिखाई देंगे. ये जब मिलकर ग्राउंड ऑफेंसिव करते हैं तो दुश्मन के रिजर्व फॉर्मेशन और मेकनाइज्ड कॉलम को तबाह करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इनके साथ आगे रेकी एलिमेंट्स चलते हैं और पूरे इलाके में स्पेशल फोर्सेस के ऑपरेशन्स भी चल रहे होते हैं, ताकि मिशन को सफल बनाया जा सकें. हमारे स्पेशल फोर्सेस के आधुनिक उपकरण भी पहली बार दिखाए जा रहे हैं. कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स में फायर सपोर्ट के लिए धनुष और एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम पहली बार परेड में शामिल किए गए हैं.
सवाल- पहली बार टी-90 और अर्जुन टैंक एक साथ परेड में शामिल हो रहे हैं
जवाब- हमारे पास जितने भी एसेट्स हैं, हम उनको एक साथ दिखाना चाहते हैं ताकि भारत की सैन्य क्षमता की मजबूती दिख सकें. इसलिए अलग-अलग तरह का इक्विपमेंट को प्रदर्शित किया गया है.
सवाल- इस परेड में पहली बार भारत के लोग अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल की झलक भी दिखा रहे हैं, इस पर कुछ बताएं.
जवाब- DRDO की झांकी में भारत में निर्मित एंटी-शिप मिसाइल जैसे नए हथियार प्रदर्शित किए जा रहे हैं. ये उन्नत और शानदार हथियार भारत की नई, स्वदेशी टेक्नोलॉजी की क्षमताओं का प्रतीक हैं.

सवाल- परेड से पहले रिहर्सल में हमने देखा कि इस बार कर्तव्य पथ पर भारत के साइलेंट योद्धा भी दिखेंगे. इनमें बैक्ट्रियन ऊंट और देशी ब्रीड के डॉग्स भी दिख रहे हैं. ये कैसे हमारी मदद करते हैं?
जवाब- हम यह भी दिखाना चाहते हैं कि ऑपरेशंस में लोकल रिसोर्सेस किस तरह मदद करते हैं, जैसे लद्दाख रीजन में बैक्ट्रियन कैमल और जांस्कर पोनी है. यह वहां पर लोड लेकर हमें कार्रवाई में मदद करते हैं. ऐसे ही हमारे इंडियन ब्रीड की डॉग काफी मजबूत है. वह भी काफी अच्छा काम कर रहे हैं. आपको बाज भी देखने को मिलेंगे जो हमको सर्विलांस में मदद करते हैं.
सवाल- युद्ध की बदलती नीति के मुताबिक परेड में इस बार बड़ी तादाद में ड्रोन भी देखने को मिल रहे हैं. मॉडर्न युद्ध में ड्रोन का महत्व कितना बढ़ गया है?
जवाब- अब लड़ने का तरीका बदल चुका है. हमारी फोर्स फुर्तीली है और उनका ट्रांसफ्रोमशन हो चुका है. अब हमारे सबके पास सर्विलांस के लिए अलग-अलग तरह के ड्रोन मौजूद है. हमारे पास कामकाजी ड्रोन भी है. इससे हम दुश्मन को बर्बाद कर सकते हैं. हमारा जो शक्तिबाण रेजीमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी है, वो ये दिखाता है कि मॉडर्न युद्ध में हमारी क्षमता कितनी मजबूत हो गई है. परेड में आपको यूनिवर्सल रॉकेट सिस्टम भी देखने को मिलेगा. ब्रह्मोस तो दिखेगा ही. कह सकते हैं ऑपरेशनल काबिलियत की पूरी तस्वीर आपको परेड में देखने को मिलेगी. या ये कहें कि इसका एक छोटा सा नमूना देखने को मिलेगा.
सवाल- इस परेड में हमें किसी तरह से देश की संस्कृति की एक झलक भी देखने को मिलेगी?
जवाब- हमारे यहां विविधता में एकता है. परेड में सभी प्रान्तों की झांकियां आती हैं. मिनिस्ट्री की झांकी आती है. इस बार 30 झांकियां हिस्सा ले रही हैं. राम सिया की कल्चरल परफॉर्मेंस देख कर एक बहुत अच्छी फीलिंग आती है. हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि ऐसे शांति प्रिय देश मे हमारा जन्म हुआ है.

सवाल- देश में भी शांति तभी आ सकती है जब देश की सुरक्षा मजबूत हो. सैन्य ताकत के जरिए दुनिया को भी एक मैसेज दिया जा रहा है कि यह नया भारत है. अगर दुश्मन कोई हरकत करेगा तो नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहे.
जवाब- हमारा मुद्दा रहा है हमारा ग्रोथ पूरे रीजन में हो. साथ ही जो हमारे पड़ोसी हैं, सबकी सुरक्षा और ग्रोथ बढ़ती रहे. यह जरूरी है कि किसी भी स्ट्रांग नेशन के लिए फोर्सेज को मजबूत करना जरूरी है. इसका उदाहरण भी हमे पिछले साल देखने को मिला.
सवाल- इस बार परेड में कैसा जोश है?
जवाब- जोश काफी हाई हैं. फुल ड्रेस ड्रेस रिहर्सल में बारिश होने के बावजूद जोश काफी हाई था. आपने देखा कि सबने काफी मजे से मार्च किया. अप देखेंगे कि सभी मर्चिंग दस्तों में जोश और उत्साह काफी हाई है. इस परेड में आपको एनर्जी लेवल काफी तगड़ा दिखेगा.
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