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एके 47 की गोलियों से थर्रा उठा था बनारस, बाहुबली धनंजय सिंह पर जानलेवा हमले के मामले में सपा विधायक अभय सिंह बरी

बाहुबली धनंजय सिंह पर जानलेवा हमले के मामले में सपा के बागी विधायक अभय सिंह और अन्य को बरी किया गया है. वाराणसी के नदेसर शूटआउट केस में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है.

एके 47 की गोलियों से थर्रा उठा था बनारस, बाहुबली धनंजय सिंह पर जानलेवा हमले के मामले में सपा विधायक अभय सिंह बरी
Rebel SP MLA Abhay Singh vs Dhananjay Singh
  • वाराणसी के नदेसर शूटआउट मामले में एमपी एमएलए कोर्ट ने 6 आरोपियों को दोषमुक्त कर बड़ी राहत दी है
  • यह मामला 2002 में टकसाल सिनेमा के पास धनंजय सिंह पर हुए हमले से जुड़ा था, जिसमें अंधाधुंध गोलीबारी हुई थी
  • आरोपियों में सपा के बागी विधायक अभय सिंह और एमएलसी विनीत सिंह शामिल थे, जिन्हें कोर्ट ने बरी किया है
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वाराणसी के नदेसर शूटआउट केस में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सपा के बागी विधायक अभय सिंह और एमएलसी विनीत सिंह सहित छह आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए एमपी एमएलए कोर्ट ने जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह पर हमले के आरोप में सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया. वाराणसी का नदेसर शूटआउट केस को टकसाल सिनेमा शूटआउट भी कहा जाता है, जो दो बाहुबली नेता धनंजय सिंह और अभय सिंह की दुश्मनी से जुड़ा है. 4 अक्टूबर 2002 को वाराणसी का नदेसर इलाका टकसाल सिनेमा हॉल के पास हुआ था. तब धनंजय सिंह जौनपुर की रारी सीट से निर्दलीय विधायक थे.

धनंजय सिंह पर अंधाधुंध फायरिंग हुई थी

आरोपों के मुताबिक, 4 अक्टूबर 2002 को धनंजय सिंह अपने काफिले के साथ नदेसर इलाके से गुजर रहे थे. तभी टकसाल सिनेमा के पास घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. यह वाराणसी के इतिहास में एके-47 से हुआ पहला ओपन शूटआउट माना जाता है. हमले के दौरान धनंजय सिंह के काफिले पर दर्जनों गोलियां चलीं और धनंजय सिंह ने भी जवाबी फायरिंग की थी. इस शूटआउट में धनंजय सिंह और उनके कई समर्थक गंभीर रूप से घायल हुए थे, लेकिन धनंजय सिंह की जान बच गई.

24 साल पहले फर्जी मुकदमा - अभय सिंह

अभय सिंह ने कहा कि न्याय की जीत हुई है. 24 साल पहले हमारे ऊपर फर्जी मुकदमा कराया गया था. जब एक मुकदमा हुआ था तो उन्होंने बहुजन समाजवादी पार्टी का समर्थन लिया हुआ था. अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए मेरे ऊपर फर्जी मुकदमा कराया गया था. धनंजय सिंह बिना अपराध के नहीं रह सकता. अभय सिंह ने कहा कि सरकारी सुरक्षा के आड़ में उसकी वसूली करना, अपराध करना उसका काम है.धनंजय सिंह अपराध जीवी हैं और उनका अपराध करना पेशा है. उसने राजनीतिक कुंठा के कारण मुकदमा दर्ज कराया. ऊपर की अदालत में अगर वो जाते हैं तो न्याय की प्रक्रिया है, वहां पर भी हम लोग लड़ेंगे.

मुकदमे में मुझे फर्जी फंसाया गया -अभय सिंह

अभय सिंह ने कहा, सगे संबंधियों के साथ मुकदमे में मुझे फर्जी फंसाया गया है. हम हमेशा कोर्ट में बोलते आए हैं कि इनको गलत तरीके से मुकदमे में डाला गया है. लेकिन मेरे खिलाफ कोई शख्स नहीं था. न्यायालय पर पूरा विश्वास था आज हमें बाबा भोलेनाथ माता विंध्यवासिनी की कृपा से न्याय मिला है. एमएससी विनीत सिंह ने कहा कि बहुत दिनों से लंबित यही एक मुकदमा मेरे खिलाफ था जिसमें हमें न्याय मिला है.

लखनऊ यूनिवर्सिटी की जंग?

धनंजय सिंह ने इस हमले का आरोप अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी और समाजवादी पार्टी के विधायक अभय सिंह पर लगाया था. अभय सिंह, विनीत सिंह और संजय रघुनंदन को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था. आरोप था कि लखनऊ यूनिवर्सिटी के समय से चली आ रही वर्चस्व की लड़ाई के कारण यह जानलेवा हमला किया गया था.पुलिस ने इस मामले में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया था. यह मामला करीब 24 साल तक अदालत में चला. खुद धनंजय सिंह ने अदालत में पेश होकर अभय सिंह के खिलाफ गवाही दी थी और हमलावरों की पहचान की थी.

पूर्वांचल में बाहुबलियों की जंग

 बुधवार को वाराणसी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रहा. चश्मदीदों के बयानों में विरोधाभास और ठोस सबूतों की कमी के कारण विधायक अभय सिंह और अन्य को बाइज्जत बरी कर दिया गया. नदेसर शूटआउट ने पूर्वांचल में उस वक्त माफिया और बाहुबलियों के वर्चस्व को उजागर किया था. इसके बाद धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच की दुश्मनी गैंगवार में तब्दील हो गई थी. इसका असर जौनपुर, वाराणसी और लखनऊ से गोरखपुर तक देखा गया.
 

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