- समाजवादी पार्टी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करते हुए भाजपा पर जनगणना टालने का आरोप लगाया है.
- अखिलेश यादव ने कहा कि बिल जल्दबाजी में लाया गया है ताकि जाति आधारित आरक्षण की आवश्यकता न पड़े.
- सपा अध्यक्ष ने पिछड़े वर्ग की महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है.
देश में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाले प्रस्तावित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर समाजवादी पार्टी ने समर्थन जताते हुए बीजेपी पर बड़ा हमला किया है. सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने दावा किया है कि ये बिल जल्दबाजी में इसलिए लाया जा रहा है, ताकि जनगणना ना करानी पड़े. अखिलेश यादव ने कहा कि ये सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि जनगणना हुई तो जाति के आंकड़े भी देने पड़ेंगे और जाति आरक्षण भी देना होगा.
एक्स पर लिखे पोस्ट में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि वो महिला आरक्षण के साथ हैं. लेकिन उस भाजपाई चालबाजी के खिलाफ हैं, जो एक साजिश के तहत की जा रही है. उन्होंने कहा कि भाजपाई और उनके साथी देश की सबसे बड़ी आबादी के ‘पिछड़े वर्ग' की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठे हैं. ये लोकतंत्र के खिलाफ खुफिया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं है, जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं होगा.
हम महिला आरक्षण के साथ हैं पर उस भाजपाई चालबाज़ी के ख़िलाफ़ हैं, जो एक साज़िश के तहत की जा रही है। भाजपाई और उनके संगी-साथी देश की सबसे बड़ी आबादी के वर्ग मतलब ‘पिछड़े वर्ग' की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठे हैं। ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं दरअसल उसके पीछे…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 15, 2026
अखिलेश यादव ने कहा कि ये बीजेपी का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों का अधिकार लूटा जा रहा है. आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट पार्टियों को मिलनी चाहिए.
सपा के आंकड़ों की बात करें तो लोकसभा में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद हैं, वहीं राज्यसभा में कुल 4 सांसद हैं. यूपी के विधानसभा में समाजवादी पार्टी के कुल 104 विधायक मौजूद हैं. सपा लोकसभा में बीजेपी और कांग्रेस के बाद सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी है. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव अपने सांसदों को सीधे-सीधे बिल का समर्थन करने को कहेंगे या समर्थन के बीच विरोध की आवाज बुलंद करने की रणनीति पर चलेंगे.
महिला आरक्षण के नाम पर ये जल्दीबाज़ी बता रही है कि अब भाजपा जा रही है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 15, 2026
सच तो ये है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है क्योंकि जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की भी बात उठेगी और फिर आरक्षण की भी, जो भाजपा और उनके संगी-साथी कभी भी देना नहीं चाहते हैं। भाजपा को ये भी अच्छी तरह याद है… pic.twitter.com/W04aIYJPmw
महिला आरक्षण कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है. संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी.
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