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बड़े रिटर्न का लालच और सारा पैसा हजम! Apexa Group पर अब ED का 'डंडा', 38 संपत्तियां अटैच

ED की जांच में यह भी सामने आया है कि निवेशकों से जुटाया गया पैसा ज़मीन खरीदने, नए बिज़नेस खड़े करने और आरोपियों की निजी ऐशो-आराम पर खर्च किया गया, न कि निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए. फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है.

बड़े रिटर्न का लालच और सारा पैसा हजम! Apexa Group पर अब ED का 'डंडा', 38 संपत्तियां अटैच
Apexa Group फ्रॉड केस में ED का एक्शन.
  • Apexa Group ने निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच देकर करीब 195 करोड़ रुपये की धनराशि जमा कराई थी
  • प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA कानून के तहत 38 संपत्तियां और एक बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया है
  • जांच में पता चला कि फर्जी स्कीमों के माध्यम से बिना वास्तविक बिजनेस मॉडल के निवेशकों को धोखा दिया गया
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जयपुर:

बड़े रिटर्न के लालच में अस्कर लोग अपने जीवनभर की कमाई गवा बैठते हैं. एपेक्सा ग्रुप ने भी कछ ऐसा ही किया. उसने लोगों को भारी भरकम रिटर्न का लालच देकर निवेश करवाया. जब निवेशकों ने अपना पैसा वापस मांगा तो इसकी सारी पोल खुल गई. ईडी ने Apexa Group फ्रॉड केस में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 15 करोड़ 97 लाख रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं. यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत प्रवर्तन निदेशालय के जयपुर ज़ोनल ऑफिस ने की है. 

Apex Group की 38 संपत्तियां अटैच

ED ने इस मामले में कुल 37 अचल संपत्तियों और एक चल संपत्ति को अटैच किया है. अटैच की गई संपत्तियों में खेती की ज़मीन और रिहायशी प्लॉट शामिल हैं, जो बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं ये संपत्तियां मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गा शंकर मेरोथा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, शोभा रानी समेत अन्य आरोपियों के नाम पर हैं.

इसके अलावा Apexa Group का एक बैंक अकाउंट, जिसमें करीब 1.50 करोड़ रुपये जमा थे, उसे भी फ्रीज़ कर दिया गया है. ED ने यह जांच राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कई FIRs के आधार पर शुरू की थी. जांच में सामने आया कि Apexa Group ने निवेशकों से करीब 194.76 करोड़ रुपये इकट्ठा किए.

फर्जी और धोखाधड़ी वाली स्कीमों से लोगों को फंसाया

जांच में ED को पता चला कि मुरली मनोहर नामदेव और उसके साथियों ने जानबूझकर फर्जी और धोखाधड़ी वाली स्कीमें शुरू कीं. इन स्कीमों में निवेशकों को बहुत कम समय में बेहद ज़्यादा रिटर्न देने का लालच दिया गया. हकीकत यह थी कि इन वादों के पीछे कोई असली बिज़नेस मॉडल या वित्तीय आधार ही नहीं था.

2012 से 2020 के बीच निवेशकों को कभी-कभार जो पैसा लौटाया गया, वह भी नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों से या फिर पुराने निवेशकों को दोबारा निवेश करने के लिए बहलाकर दिया गया. इससे लोगों को यह भ्रम होता रहा कि कंपनी अच्छा मुनाफा कमा रही है, जबकि असल में यह पूरा सिस्टम टिकाऊ ही नहीं था.

Apexa Group ने कैसे किया फ्रॉड?

कोरोना काल के दौरान जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपना पैसा और वादा किया गया रिटर्न वापस मांगना शुरू किया, तब Apexa Group की असलियत सामने आ गई. कंपनी निवेशकों को पैसा लौटाने में नाकाम रही और पूरी स्कीम ढह गई. इस तरह सैकड़ों लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. ED की जांच में यह भी सामने आया है कि निवेशकों से जुटाया गया पैसा ज़मीन खरीदने, नए बिज़नेस खड़े करने और आरोपियों की निजी ऐशो-आराम पर खर्च किया गया, न कि निवेशकों को फायदा पहुंचाने के लिए. फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है.
 

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