बजट सत्र पर राष्ट्रपति का संबोधन : कृषि कानूनों से लेकर हिंसा तक पर कहीं यह 10 अहम बातें

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने भाषण में कृषि कानूनों और गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा को लेकर टिप्पणी की और पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार के तहत उठाए गए बड़े कदमों और उपलब्धियों की जानकारी दी.

बजट सत्र पर राष्ट्रपति का संबोधन : कृषि कानूनों से लेकर हिंसा तक पर कहीं यह 10 अहम बातें

राष्ट्रपति कोविंद ने बजट अभिभाषण में कृषि कानूनों का किया समर्थन.

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए अपने बजट अभिभाषण से बजट सत्र की शुरुआत कर दी है. राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कृषि कानूनों और गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा को लेकर टिप्पणी की और पिछले कुछ सालों में मोदी सरकार के तहत उठाए गए बड़े कदमों और उपलब्धियों की जानकारी दी. राष्ट्रपति ने कोरोना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने कोरोना के खिलाफ की लड़ाई को जनआंदोलन में बदला और आज देश दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सीनेशन का अभियान भी चला रहा है. राष्टपति ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार कृषि कानूनों पर लोगों के भ्रम दूर करने की कोशिश कर रही है और कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के आखिरी फैसले का सम्मान किया जाएगा.

राष्ट्रपति के भाषण की अहम बातें

  1. राष्ट्रपति कोविंद ने अपने भाषण के शुरुआत में आत्मनिर्भर भारत का आह्वान करते हुए कृषि कानूनों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत में निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भी अभियान है. सरकार ने बीते 6 वर्षों में बीज से लेकर बाज़ार तक हर व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है, ताकि भारतीय कृषि आधुनिक भी बने और कृषि का विस्तार भी हो.'

  2. कृषि कानूनों पर राष्ट्रपति ने कहा कि 'मेरी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना MSP देने का फैसला भी किया था. मेरी सरकार आज न सिर्फ MSP पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है.' राष्ट्रपति ने कहा कि 'मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है. बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं.'

  3. उन्होंने गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा को लेकर कहा कि 'पिछले दिनों हुआ तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए.'

  4. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन कानूनों को स्थगित किए जाने के आदेश पर राष्ट्रपति ने कहा कि 'वर्तमान में इन कानूनों का अमलीकरण देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है. मेरी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी.'

  5. राष्ट्रपति ने अर्थव्यवस्था और उसकी जरूरतों के हिसाब से उठाए गए कदमों पर कहा कि 'अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ ही सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न रहना पड़े. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना' के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निशुल्क सुनिश्चित किया गया. सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की.'

  6. कोरोना के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि 'सरकार के समय पर लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा है. आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेजी से घट रही है और जो संक्रमण से ठीक होने वालों संख्या भी बहुत अधिक है.' उन्होंने इस महामारी से जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि भी दी और कहा कि 'महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में हमने अनेक देशवासियों को असमय खोया भी है. मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और संसद के 6 सदस्य भी कोरोना की वजह से असमय हमें छोड़कर चले गए. मैं सभी के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.'

  7. महिलाओं से जुड़े कदमों पर जानकारी देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 'मेरी सरकार ने महिलाओं को स्वरोज़गार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं. मुद्रा योजना के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं.' राष्ट्रपति ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार एक रुपए में ‘सुविधा' सैनिटरी नैपकिन देने की योजना भी चला रही है.

  8. राष्ट्रपति ने नए संसद भवन के निर्माण का भी जिक्र अपने भाषण में किया. उन्होंने कहा कि इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी और नए संसद भवन में सांसदों को कई नई सुविधाएं मिलेंगी. उन्होंने कहा, 'संसद की नई इमारत को लेकर पहले की सरकारों ने भी प्रयास किए थे लेकिन आजादी के 75वें वर्ष की तरफ बढ़ते हुए हमारे देश ने, संसद की नई इमारत का निर्माण शुरू कर दिया है. नए संसद भवन के बनने से अपने संसदीय दायित्वों को निभाने में हर सदस्य को अधिक सुविधा मिलेगी.'

  9. पिछले साल जून में गलवान घाटी की हिंसक झड़प को लेकर राष्ट्रपति ने कहा कि 'जून 2020 में हमारे 20 जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए गलवान घाटी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. हर देशवासी इन शहीदों का कृतज्ञ है.' उन्होंने कहा कि सरकार देश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है. LAC पर भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्यबलों की तैनाती भी की गई है.

  10. राष्ट्रपति ने अपने भाषण में मलयालम के श्रेष्ठ कवि वल्लथोल के श्लोक का भी जिक्र किया- 'भारतम् ऐन्ना पेरू केट्टाल अभिमाना पूरिदम् आगनम् अंतरंगम्' अर्थात, जब भी आप भारत का नाम सुनें, आपका हृदय गर्व से भर जाना चाहिए. वहीं, भाषण की शुरुआत में उन्होंने असम केसरी कवि अंबिकागिरि रायचौधरी की यह पंक्तियां भी दोहराईं- 'ओम तत्सत् भारत महत, एक चेतोनात, एक ध्यानोत, एक साधोनात, एक आवेगोत, एक होइ ज़ा, एक होइ ज़ा' (भारत की महानता परम सत्य है. एक ही चेतना में, एक ही ध्यान में, एक ही साधना में, एक ही आवेग में, एक हो जाओ, एक हो जाओ).