वैष्णो देवी में प्रदूषण : सुप्रीम कोर्ट ने श्राइन बोर्ड और राज्य सरकार को संरक्षण करने के लिए कहा

सुप्रीम कोर्ट ने वैष्णो देवी में बाणगंगा नदी में गंदगी और पशुओं के अवशेषों को फेंकने पर चिंता व्यक्त की

वैष्णो देवी में प्रदूषण : सुप्रीम कोर्ट ने श्राइन बोर्ड और राज्य सरकार को संरक्षण करने के लिए कहा

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  • पर्यावरण संरक्षण के साथ खच्चर और टट्टू मालिकों को भी संरक्षण देना होगा
  • राज्य सरकार ने कहा राज्यपाल शासन लग जाने से पुनर्वास का काम अटका
  • याचिकाकर्ता गौरी मौलेखी ने बाणगंगा नदी की ताजा तस्वीरें कोर्ट में पेश कीं
नई दिल्ली:

वैष्णो देवी में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार और श्री माता वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड दोनों को ही संरक्षण करना होगा.   

उच्चतम न्यायालय ने जम्मू में वैष्णों देवी धर्मस्थल और आसपास के इलाकों में पर्यावरण की स्थिति का संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने वैष्णो देवी में बाणगंगा नदी में गंदगी फेंकने और पशुओं के अवशेषों को फेंकने पर चिंता  व्यक्त की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह से बाणगंगा नदी में गंदगी फेंकना बहुत गंभीर मसला है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि श्राइन बोर्ड ने प्रदूषण को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया जबकि काफी पैसा उन्हें प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मुहैया कराया गया था. 

केंद्र सरकार ने कहा कि जम्मू कश्मीर में कोई सरकार न होने की वजह से वहां की स्थिति स्टेबल है. सरकार ने कहा कि  पुनर्वास प्लान तैयार है. सुप्रीम कोर्ट ने श्राइन बोर्ड और जम्मू-कश्मीर सरकार से अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राज्य सरकार और श्राइन बोर्ड से कहा कि उन्हें खच्चर और टट्टू के मालिकों को भी संरक्षण प्रदान करना होगा जो लंबे समय से श्रृद्धालुओं को धर्मस्थल तक लाने और ले जाने का काम करते हैं. उनके पुनर्वास के मुद्दे पर मानवीय आधार पर गौर करना होगा. 

पीठ ने धर्मस्थल के निकट बाणगंगा नदी में डाले गए कचरे की तस्वीरों के अवलोकन के बाद कहा कि यदि ये तस्वीरें सही हैं फिर तो वहां बहुत ही अधिक समस्याएं हैं जिन पर गौर करने की आवश्यकता है. पीठ ने कहा, ‘‘यह एकदम स्पष्ट है कि आपको धर्मस्थल के साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण करना होगा. आपको खच्चर और टट्टू मालिकों को संरक्षण देना होगा. हमें नहीं पता कि आप मानवीय आधार पर इनके पुनर्वास के मुद्दे पर गौर भी कर रहे हैं या नहीं.’’ 

जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल मनिन्दर सिंह और वकील शोएब आलम ने कहा कि खच्चर मालिकों के पुनर्वास की योजना कैबिनेट की उपसमिति के समक्ष पेश की जानी थी परंतु आज की स्थिति में राज्य में कोई सरकार नहीं है और वहां राज्यपाल का शासन है. उन्होंने कहा कि उपसमिति का गठन किया गया था, लेकिन पुनर्वास के मसले पर उसके गौर करने से पहले ही राज्य में सरकार गिर गई. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण भी धर्मस्थल से संबंधित कुछ पहलुओं पर विचार कर रहा है और उसके कई आदेश भी पारित किए हैं. उन्होंने कहा कि चूंकि अब शीर्ष अदालत इस मामले पर गौर कर रही है, इसलिए अधिकरण को इसमें आगे कार्यवाही नहीं करनी चाहिए. 

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खच्चर और टट्टुओं को वहां से हटाने के लिए अधिकरण में याचिका दायर करने वाली गौरी मौलेखी ने बाणगंगा नदी की ताजा तस्वीरें पीठ के समक्ष पेश कीं और कहा कि इसमें कचरा डाले जाने की वजह से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. पीठ ने इस मामले को एक अगस्त के लिए सूचीबद्ध करते हुए हरित अधिकरण से अनुरोध किया कि उसके समक्ष इस मुद्दे से लंबित मामले में आगे कार्यवाही नहीं की जाए. पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह खच्चरों और टट्टुओं के मालिकों के पुनर्वास की योजना पेश करे. सुनवाई के दौरान श्राइन बोर्ड ने पीठ को सूचित किया कि नया पैदल पथ अब शुरू हो गया है.
(इनपुट भाषा से भी)


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