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This Article is From Apr 04, 2025

बेबी तू आया नहीं मुझे लेने... जगुआर क्रैश के शहीद की मंगेतर का वीडियो नम कर देगा आंखें

जामनगर में क्रैश हुए फाइटर प्लेन जगुआर के शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव को शुक्रवार नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान उनकी मंगेतर भी श्मशान घाट पर मौजूद थी.

बेबी तू आया नहीं मुझे लेने... जगुआर क्रैश के शहीद की मंगेतर का वीडियो नम कर देगा आंखें
शहीद सिद्धार्थ के अंतिम संस्कार में विलाप करतीं उनकी मंगेतर सानिया व अन्य परिजन.

गुजरात के जामनगर में क्रैश हुए जगुआर प्लेन के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव का शुक्रवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. सिद्धार्थ सगाई के मात्र 10 दिन बाद ही शहीद हो गए. शहीद के अंतिम संस्कार के दौरान उनकी मंगेतर सानिया भी वहां मौजूद थी. जिनका विलाप सुन वहां मौजूद लोगों के आंखें नम हो गई. दरअसल शहीद सिद्धार्थ यादव के अंतिम संस्कार से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उनकी मंगेतर सानिया लगातार रोती हुई नजर आई. वो रोते-रोते लोगों से गुहार लगा रही थी, एक बार मुझे सिद्धार्थ का चेहरा दिखा दो. 

मालूम हो कि हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गांव माजरा भालखी में विमान दुर्घटना में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया. 28 वर्षीय सिद्धार्थ यादव बुधवार रात गुजरात में जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटना में शहीद हुए थे.

कई लोगों का जान बचाया, पर खुद हो गए शहीद

यह दुर्घटना जामनगर वायुसेना स्टेशन के पास हुई थी. सिद्धार्थ की बहादुरी और समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान जब आपे से बाहर हुआ तो उन्होंने इसे आबादी वाले इलाके से दूर खाली जगह में गिराया. ऐसा कर अंतिम सांस लेते हुए भी सिद्धार्थ कई लोगों की जान बचा गए.

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बेबी तू आया नहीं लेने... मंगेतर सानिया का विलाप 

जब सानिया सिद्धार्थ के पार्थिव शरीर के पास पहुंची तो रोते हुए वो बोल रही थी, 'बेबी तू आया नहीं मुझे लेने..तूने कहा था तू आएगा." मालूम हो कि सिद्धार्थ की 10 दिन पहले ही सगाई हुई थी. अंतिम संस्कार के मौके पर उनकी मंगेतर भी श्मशान घाट पहुंची थी. 


बाद में शांत होने पर सानिया ने कहा कि मुझे सिद्धार्थ पर गर्व है. बताते चले कि सिद्धार्थ की शादी 2 नवंबर को होनी थी. जिसके लिए घर में तैयारियां भी चल रही थीं.

'सिद्धार्थ यादव अमर रहे' के नारे से गूंजा माजरा भालखी गांव

फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव पहुंचा तो उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम देखने को मिला. शहीद के सम्मान में सभी लोग हाथों में तिरंगा लिए नम आंखों से उनको विदाई दे रहे थे. वहीं, जब सिद्धार्थ यादव का पार्थिव शरीर लिए सेना का  वाहन गुजरा तो सभी ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं.

'सिद्धार्थ यादव अमर रहे' का नारा हर जगह गूंज रहा था। शहीद सिद्धार्थ यादव के सम्मान में भारतीय वायुसेना के जवानों ने बंदूकों की सलामी दी. सिद्धार्थ यादव की बहादुरी की चर्चा पूरे रेवाड़ी गांव में हो रही है. 

पूरे परिवार ने की है देश की सेवा

सिद्धार्थ यादव का परिवार सदियों से देश की सेवा करता आ रहा है. सिद्धार्थ के परदादा ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल इंजीनियर्स में कार्यरत थे. उनके दादा अर्धसैनिक बल में थे तो वही उनके पिताजी वायुसेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे. सिद्धार्थ यादव ने वर्ष 2016 NDA से जुड़कर तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद सेना में शामिल हुए थे.

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10 दिन पहले हुई थी सगाई
विमान दुर्घटना के ठीक 10 दिन पहले 23 मार्च को सिद्धार्थ यादव की सगाई हुई थी. उनकी शादी आने वाले 2 नवंबर को तय थी. उनकी मौत पर पिता सुजीत यादव ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सिद्धार्थ शान से उड़ना और देश की सेवा करना चाहते थे. उन्होंने कहा कि वह एक बहुत ही होनहार छात्र था. हमें हमेशा उस पर गर्व रहेगा. सिद्धार्थ की मंगेतर ने रोते हुए कहा "बेबी तू आया नहीं मुझे लेने. तूने कहा था तू आएगा.

यह भी पढ़ें - इकलौते बेटे, 10 दिन पहले हुई थी सगाई, जामनगर जगुआर प्लेन क्रैश के शहीद हुए पायलट सिद्धार्थ यादव की कहानी

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