बृहस्पति ग्रह पर जारी तूफान 'ग्रेट रेड स्पॉट' की यह तस्वीर जूनो अंतरिक्षयान से मिली तस्वीरों को जोड़कर बनाई गई है...
- बृहस्पति ग्रह पर पिछले 350 साल से जारी है सौरमंडल का सबसे बड़ा तूफान
- अंतरिक्षयान जूनो ने 'ग्रेट रेड स्पॉट' के चित्र 2200 मील की ऊंचाई से खींचे
- यह तूफान इतना बड़ा है कि पूरी की पूरी पृथ्वी इसमें समा सकती है
नई दिल्ली:
क्या आप कभी इतने बड़े तूफान की कल्पना कर सकते हैं, जो पूरी धरती को लील सकता हो, यानी पूरी की पूरी पृथ्वी उसमें समा सकती हो, और जो इतना शक्तिशाली हो कि 350 साल से लगातार चल रहा हो... जी हां, ऐसा ही तूफान है बृहस्पति ग्रह, यानी ज्यूपिटर का ग्रेट रेड स्पॉट...
समाचार वेबसाइट 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, सोमवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का जूनो अंतरिक्षयान उस तूफान की जगह पर छाए बादलों से सिर्फ 2,200 मील (लगभग 3,540 किलोमीटर) ऊपर पहुंच गया, और तस्वीरें भेजीं... गौरतलब है कि हमारे सौरमंडल में मौजूद सबसे बड़े इस तूफान के इससे ज़्यादा नज़दीक कभी कोई मानव-निर्मित वस्तु नहीं पहुंची थी...

अब जूनो का यह अभियान बिना किसी दिक्कत के पूरा हो गया है, और नासा को दिल लुभा लेने वाली मनमोहक तस्वीरें और आंकड़े (डाटा) मिल रहे हैं, और विज्ञानी मिल रही जानकारी को जल्द से जल्द प्रोसेस करने में जुटे हुए हैं... कुछ हफ्तों, या कुछ महीनों में इससे जुड़ी वैज्ञानिक जानकारियां दुनिया के सामने आने लगेंगी, और विज्ञानी आने वाले कई साल तक इसका अध्ययन करते रहेंगे...
वैसे, ग्रेट रेड स्पॉट सिर्फ 'मनमोहक' अंतरिक्षीय घटना नहीं है, और इससे प्रकृति के बारे में बहुत कुछ नया सीखने को मिल सकता है - बेहद वृहद मौसम प्रणाली, उसकी बनावट और अंदरूनी खासियतें अब भी धरती के विज्ञानियों के लिए रहस्य हैं - सो, इससे पृथ्वी के मौसम को समझने में तो मदद मिलेगी ही, हमारे सौरमंडल से बाहर की दुनिया के बारे में भी जानकारी बढ़ेगी...

गॉडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में ग्रहीय वातावरण की विशेषज्ञ एमी साइमन ने नासा की प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "अगर आप सौरमंडल के बाहर के किसी ग्रह से परावर्तित होती रोशनी को देखेंगे, तो आप यह भी नहीं बता सकते कि वह किस वस्तु से बनी है... सो, ज़्यादा से ज़्यादा अलग-अलग मामलों पर नज़र डालने से हम इस लायक हो सकते हैं कि मिली जानकारी को अन्य सौरमंडलों के ग्रहों के बारे में सीखने के लिए इस्तेमाल कर सकें..."
समाचार वेबसाइट 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, सोमवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का जूनो अंतरिक्षयान उस तूफान की जगह पर छाए बादलों से सिर्फ 2,200 मील (लगभग 3,540 किलोमीटर) ऊपर पहुंच गया, और तस्वीरें भेजीं... गौरतलब है कि हमारे सौरमंडल में मौजूद सबसे बड़े इस तूफान के इससे ज़्यादा नज़दीक कभी कोई मानव-निर्मित वस्तु नहीं पहुंची थी...

अब जूनो का यह अभियान बिना किसी दिक्कत के पूरा हो गया है, और नासा को दिल लुभा लेने वाली मनमोहक तस्वीरें और आंकड़े (डाटा) मिल रहे हैं, और विज्ञानी मिल रही जानकारी को जल्द से जल्द प्रोसेस करने में जुटे हुए हैं... कुछ हफ्तों, या कुछ महीनों में इससे जुड़ी वैज्ञानिक जानकारियां दुनिया के सामने आने लगेंगी, और विज्ञानी आने वाले कई साल तक इसका अध्ययन करते रहेंगे...
वैसे, ग्रेट रेड स्पॉट सिर्फ 'मनमोहक' अंतरिक्षीय घटना नहीं है, और इससे प्रकृति के बारे में बहुत कुछ नया सीखने को मिल सकता है - बेहद वृहद मौसम प्रणाली, उसकी बनावट और अंदरूनी खासियतें अब भी धरती के विज्ञानियों के लिए रहस्य हैं - सो, इससे पृथ्वी के मौसम को समझने में तो मदद मिलेगी ही, हमारे सौरमंडल से बाहर की दुनिया के बारे में भी जानकारी बढ़ेगी...

गॉडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में ग्रहीय वातावरण की विशेषज्ञ एमी साइमन ने नासा की प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "अगर आप सौरमंडल के बाहर के किसी ग्रह से परावर्तित होती रोशनी को देखेंगे, तो आप यह भी नहीं बता सकते कि वह किस वस्तु से बनी है... सो, ज़्यादा से ज़्यादा अलग-अलग मामलों पर नज़र डालने से हम इस लायक हो सकते हैं कि मिली जानकारी को अन्य सौरमंडलों के ग्रहों के बारे में सीखने के लिए इस्तेमाल कर सकें..."
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