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This Article is From Jun 05, 2025

पाकिस्तानी जासूसी मामला: महिला पाक एजेंटों ने इस्तेमाल की इंडियन सिम, रवि को ऐसे हनी ट्रैप में फंसाया

पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) की कथित महिला एजेंटों ने आरोपी रवि वर्मा को हनी ट्रैप में फंसाने के लिए भारतीय सिमकार्डों का इस्तेमाल किया था.

पाकिस्तानी जासूसी मामला: महिला पाक एजेंटों ने इस्तेमाल की इंडियन सिम, रवि को ऐसे हनी ट्रैप में फंसाया
मुंबई:

पाकिस्तानी जासूसी मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाली पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) की महिला एजेंटों ने भारतीय सिम कार्डों का इस्तेमाल कर रवि वर्मा को हनी ट्रैप में फंसाया. भारत में रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के इस मामले में एटीएस ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

पाकिस्तानी महिला एजेंटों ने इंडियन सिम की यूज

एटीएस सूत्रों के अनुसार, पीआईओ की महिला एजेंटों ने जानबूझकर भारतीय सिम कार्डों का उपयोग किया ताकि रवि वर्मा और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को यह न पता चले कि बातचीत पाकिस्तान से हो रही है. इन एजेंटों ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर वर्मा से संपर्क साधा और उसे बहला-फुसलाकर युद्धपोतों और पनडुब्बियों जैसी संवेदनशील रक्षा सूचनाओं, फोटो और वीडियो की मांग की.

इंडियन सिम पाकिस्तानी एजेंटों तक कैसे पहुंचे ?

जांच में पाया गया कि 5-6 भारतीय मोबाइल नंबरों से वर्मा से संपर्क किया गया. यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये सिम कार्ड पाकिस्तानी एजेंटों तक कैसे पहुंचे. इस कड़ी में एटीएस ने अपनी जांच तेज कर दी है. सूत्रों ने बताया कि नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच रवि वर्मा को 9,000 रुपये का भुगतान किया गया. यह राशि डेड अकाउंट्स के जरिए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई, जिनका विश्लेषण अभी जारी है.

विदेश से आने वाली कॉल पर एडवाइजरी जारी

शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह हनी ट्रैप की साजिश रची गई थी. पीआईओ एजेंटों ने भारतीय सिम कार्डों का उपयोग कर न केवल वर्मा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी कई लोगों को निशाना बनाया है. इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने एक सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें नागरिकों से अनजान भारतीय या विदेशी नंबरों से आने वाले कॉल और मैसेज के प्रति सतर्क रहने की अपील की गई है. एटीएस ने लोगों से ऐसे किसी भी संदिग्ध संपर्क की तुरंत सूचना पुलिस को देने का अनुरोध किया है.

सिर्फ रवि तक सीमित नहीं जांच का दायरा

एटीएस की यह जांच न केवल रवि वर्मा के मामले तक सीमित है, बल्कि यह अन्य संभावित शिकारों की पहचान और ऐसी गतिविधियों को रोकने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है.एटीएस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई को और सख्त करते हुए संबंधित बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि इस जासूसी नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके. यह खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

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