केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘ड्रग-फ्री इंडिया' के संकल्प को दोहराते हुए बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन RAGEPILL' के तहत एजेंसियों ने पहली बार कैप्टागॉन (जिसे ‘जिहादी ड्रग' कहा जाता है) की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी कीमत करीब 182 करोड़ रुपये बताई गई है.
मिडिल ईस्ट भेजी जा रही थी खेप
अमित शाह के मुताबिक, यह ड्रग्स कंसाइनमेंट मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा था, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया. इस मामले में एक विदेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई भारत को ड्रग्स ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिशों पर बड़ा प्रहार मानी जा रही है.
अमित शाह का कड़ा संदेश
गृह मंत्री ने साफ कहा, भारत में ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस' नीति लागू है. देश में आने या यहां से गुजरने वाले हर ड्रग्स पर कड़ी कार्रवाई होगी. उन्होंने दोहराया, 'हम देश में आने या भारत की जमीन का इस्तेमाल कर बाहर भेजे जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर कार्रवाई करेंगे.'
Modi govt is resolved for a ‘Drug-Free India'.
— Amit Shah (@AmitShah) May 16, 2026
Glad to share that through ‘Operation RAGEPILL', our agencies have achieved the first-ever seizure of Captagon, the so-called “Jihadi Drug”, worth ₹182 crore.
The busting of the drug consignment destined for the Middle East and…
NCB की सराहना
अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारियों की तारीफ करते हुए कहा कि यह कार्रवाई एजेंसियों की सतर्कता और कड़ी मेहनत का नतीजा है. उन्होंने टीम को बहादुर और चौकस योद्धा बताते हुए बधाई दी.
क्या है कैप्टागॉन?
कैप्टागॉन एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसे आमतौर पर 'जिहादी ड्रग' कहा जाता है. इसे आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगते रहे हैं. मिडिल ईस्ट में इसका अवैध कारोबार काफी बड़ा है. ऑपरेशन RAGEPILL की यह कार्रवाई भारत की ड्रग्स के खिलाफ आक्रामक रणनीति का संकेत है. सरकार का साफ संदेश है, ड्रग्स नेटवर्क चाहे अंतरराष्ट्रीय हो या घरेलू, अब कहीं भी छूट नहीं मिलेगी.
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‘जिहादी ड्रग' क्यों कहते हैं?
‘जिहादी ड्रग' कोई आधिकारिक वैज्ञानिक नाम नहीं है, बल्कि मीडिया और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. इसका संबंध कैप्टागॉन (Captagon) नाम की एक सिंथेटिक ड्रग से है, जिसे कई रिपोर्ट्स में आतंकवादी गतिविधियों से जोड़कर देखा गया है.
कैप्टागॉन क्या है?
कैप्टागॉन एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट ड्रग है, जिसका असली नाम फेनेथिलीन (Fenethylline) है. इसे 1960 के दशक में दवाइयों के तौर पर बनाया गया था. बाद में इसके खतरनाक असर के कारण ज्यादातर देशों में बैन कर दिया गया.
इसे ‘जिहादी ड्रग' क्यों कहा जाता है?
इस ड्रग को लेकर दावा किया गया कि कुछ आतंकी संगठनों ने इसका इस्तेमाल किया. यह थकान कम करता है और व्यक्ति को ज्यादा साहसी, आक्रामक और डर-रहित बनाता है. युद्ध या हिंसक गतिविधियों में इसका उपयोग होने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि 'जिहादी ड्रग' नाम वैज्ञानिक टर्म नहीं, बल्कि एक प्रचलित लेबल है.
कैसे असर करता है शरीर पर?
कैप्टागॉन लेने के बाद नींद कम लगती है. ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है. दर्द का अहसास कम होता है और व्यक्ति ज्यादा आक्रामक हो सकता है. लंबे समय तक इसके सेवन से दिल और दिमाग पर गंभीर असर होता है. इसके मानसिक विकार भी लंबे वक्त के बाद देखने को मिलते हैं. यह बहुत हाई एडिक्टिव ड्रग है.
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क्यों मिडिल ईस्ट से जुड़ता है इसका नेटवर्क?
कैप्टागॉन का अवैध कारोबार खासकर मिडिल ईस्ट में बड़ा नेटवर्क माना जाता है. यह ड्रग तस्करी के जरिए अरब देशों में बड़े पैमाने पर सप्लाई होता है. अरबों रुपये का यह कारोबार संगठित अपराध और आतंकी फंडिंग से भी जुड़ा बताया जाता है.
भारत में खतरा क्या है?
भारत को ट्रांजिट रूट (आवागमन का रास्ता) की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश होती है. अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट भारत से होकर माल दूसरे देशों में भेजते हैं. इसलिए एजेंसियां ऐसी खेप पकड़ने को बड़ी सफलता मानती हैं.
क्यों खतरनाक है यह ड्रग?
- आसानी से लत लगती है.
- मानसिक नियंत्रण कमजोर करता है.
- हिंसक व्यवहार को बढ़ा सकता है.
- स्वास्थ्य पर गंभीर और स्थायी असर.
आसान भाषा में कहें तो कैप्टागॉन यानी तथाकथित जिहादी ड्रग सिर्फ एक नशा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध और तस्करी नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है. यही वजह है कि भारत समेत कई देश इस पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई कर रहे हैं.
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