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This Article is From Jan 04, 2016

पठानकोट अभियान पूरा होने के बाद ही भारत-पाक विदेश सचिव स्तर वार्ता पर कोई फैसला : जेटली

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पठानकोट अभियान पूरा होने के बाद ही भारत-पाक विदेश सचिव स्तर वार्ता पर कोई फैसला : जेटली
अरुण जेटली
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने  सोमवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ इस महीने के अंत में प्रस्तावित विदेश सचिव स्तर की वार्ता पर आगे बढ़ने के बारे में फैसला भारत पठानकोट में वायु सेना के अड्डे से आतंकवादियों के सफाये के लिए चल रहे अभियान के पूरा होने के बाद ही करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में अनेक मुद्दों के साथ आतंकवादी हमले के मुद्दे पर चर्चा होने के बाद जेटली ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अभियान पूरा हो जाए और उसके बाद ही सरकार ऐसे मामलों में कोई विचार कर सकती है।’’ जेटली से भारत-पाक वार्ता की योजना पर आतंकी हमले के असर के बारे में पूछा गया था।

आतंकवादियों की पहचान के संबंध में पूछे गये सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अभी हम उस स्तर पर हैं जहां अभियान जारी है और इसलिए मेरे लिए इससे ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा।’’ जेटली ने कहा कि तलाशी अभियान में समय लग रहा है क्योंकि वायु सैनिक अड्डा बड़े परिसर में फैला है जिसका घेरा 24 किलोमीटर का है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल आतंकवादियों को एक इलाके तक सीमित करने में सफल रहे हैं और वायु सैनिक अड्डे पर किसी भी सामरिक संपत्ति को संभावित नुकसान को रोकने में कामयाब रहे हैं। धरपकड़ अभियान इसलिए लंबा हो रहा है क्योंकि वहां विस्फोटक हो सकते हैं।

जेटली ने कहा कि सुरक्षा बलों ने तत्काल कार्रवाई की। उनके मुताबिक आतंकवादी पठानकोट वायु सैनिक अड्डे पर सामरिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के मुख्य मकसद से आये थे।

उन्होंने कहा, ‘‘ये कुशल प्रशिक्षित आतंकवादी थे और आत्मघाती दस्ते का हिस्सा थे। जब इस तरह के फिदायीन हमले होते हैं तो बड़ा नुकसान होने की आशंका होती है। परिसर बहुत बड़ा है।’’ वित्त मंत्री के मुताबिक चार आतंकवादियों के शव मिल गए हैं और दो और के शव खोजे जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा बल इस बाबत घोषणा करेंगे।’’ जेटली ने कहा कि सुरक्षा बलों का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जगह को कोई नुकसान नहीं हो और हमारे सुरक्षा बल ऐसा करने में पूरी तरह सफल रहे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों का दूसरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कम से कम नुकसान हो।

जेटली के अनुसार, ‘‘इसमें भी सुरक्षा बल काफी हद तक कामयाब रहे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआती हमले में आतंकवादियों पांच सुरक्षाकर्मियों की जान ली, मुठभेड़ में वे केवल एक जवान को मार सके और एक लेफ्टिनेंट कर्नल की दुर्घटनावश मृत्यु हो गई।’’ वित्तमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों का तीसरा उद्देश्य आतंकवादियों को जिंदा पकड़ना या उन्हें मार गिराना था ताकि वे बहुत ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के अभियान लंबे चलते हैं। अभियान लंबे चलने की वजह होती है कि बड़ी मात्रा में विस्फोटक होते हैं और इलाका बड़ा है। अभियान की जानकारी पठानकोट से आएगी।’’ जेटली ने कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में सुरक्षा बलों की तत्काल कार्रवाई पर विस्तार से बातचीत हुई।

खुफिया जानकारी उपलब्ध होने पर भी अभियान तीसरे दिन तक चलने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के अभियान बहुत लंबे समय तक चलते हैं। अगर आपको याद हो तो मुंबई में भी 26-11 का अभियान बहुत लंबे समय तक चला था।’’ मुंबई आतंकी हमलों से सबक सीखे जाने के सवाल पर जेटली ने कहा कि काफी कुछ सीखा गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी फुरती की वजह से सुरक्षा बलों ने उन्हें प्रवेश बिंदु पर ही फौरन काबू में कर लिया।’’ जेटली के अनुसार, ‘‘इसी खुफिया जानकारी से उन्हें मदद मिली और उन्होंने विशेष बलों आदि को बुलाकर एहतियातन कदम उठाया, शुरुआती बिंदु पर ही उन्हें काबू में कर लिया, उन्हें सामरिक संपत्तियों से उचित दूरी पर रोके रखा गया और उन्हें मार गिराने में सफल रहे। मेरा मानना है कि यह पूरे खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों की फुरती का सामूहिक प्रयत्न है।’’
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