Kolkata:
पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि एएमआरआई अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जहां आग लगने की घटना में 40 रोगियों की मौत हो गई। लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने अस्पताल का मुआयना करने के बाद संवाददाताओं से कहा, राज्य सरकार राहत अभियानों के बाद इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की मौत के लिए एएमआरआई समूह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। मुखर्जी ने कहा, हैरानी की बात है कि अस्पताल के अधिकारियों ने आग में फंसे रोगियों को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी आग लगते ही वहां से भाग गए।पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने बताया कि स्थानीय लोगों ने तड़के करीब साढ़े तीन बजे आग देखी और वे अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें निजी सुरक्षा कर्मियों ने भगा दिया। मार्ग के संकरा होने के कारण दमकल गाड़ियों को अस्पताल परिसर में पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इमारत से जैसे-जैसे मरीजों को निकाला जा रहा था, बाहर मौजूद लोग अपने मरीज की तलाश में उसकी तरफ दौड़ पड़ते थे।अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन सरकार एवं अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से नाराज हो कर अपने गुस्से इजहार कर रहे थे। प्रदीप सरकार नामक इस शख्स ने अग्निशमन कर्मी पर चिल्लाते हुए कहा, अब आने का क्या मतलब है?...प्रशासन निकम्मा एवं बेकार है। प्रदीप के ससुर इस अस्पताल में दिल की बीमारी के चलते भर्ती थे। रात भर अस्पताल में रहे प्रदीप ने आरोप लगाया कि अग्निशमन कर्मी देर से आए और उनके पास पूरे उपकरण भी नहीं थे। उन्होंने कहा, वे (अग्निशमन कर्मी) सामान्य सीढ़ी लेकर आए थे। अगर वे स्काई लिफ्ट पहले लेकर आए होते तो कई जीवन बचाए जा सकते थे। मरीजों के रिश्तेदार उनकी खबर लेने के लिए एक से दूसरे अधिकारी के पास चक्कर लगा रहे थे। अपनी चाची को तलाश रहीं जयंता बोस ने कहा, मैंने अपनी चाची की तलाश तीन बजे से कर रही हूं। न तो अस्पताल प्रशासन और नहीं पुलिस को इस बारे में कोई सूचना है। स्थानीय लोगों ने मरीजों को बचाने के लिए अस्पताल में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन उन्हें रोक दिया गया। अन्य स्थानीय निवासियों की तरह राहत कार्यो में हाथ बंटा रहे रंजीत मंडल ने कहा, हमने दो बजे इमारत से धुआं निकलते देखा। हम तुरंत सहायता के लिए इकट्ठे हो गए। लेकिन हमें प्रवेश करने से मना कर दिया गया। अगर हमें इसकी इजाजत मिल जाती तो कई लोगों को बचाया जा सकता था। एक अन्य निवासी इरफान ने कहा, जब हम यहां पहुंचे तो मरीज सहायता के लिए आवाज दे रहे थे। लेकिन हमें घुसने नहीं दिया गया। उन्हें इन मौतों के लिए मृत्युदंड मिलना चाहिए।
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