- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के साथ हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के नागरिकों को भी लाभ पहुंचाएगा.
- फरीदाबाद-जेवर और पलवल-नोएडा एक्सप्रेसवे हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों को एयरपोर्ट से सीधे जोड़ेंगे.
- फेज-1 में एयरपोर्ट की क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी और कार्गो टर्मिनल भी विकसित होगा.
उत्तर प्रदेश का जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के बड़े हिस्सों को भी सीधा लाभ पहुंचाने जा रहा है. एक तरह से यह एयरपोर्ट चार राज्यों के नागरिकों, व्यापारियों, पर्यटकों और उद्योगों के लिए एक साझा हवाई हब बनेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन करने जा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है.
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित इस ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की रणनीतिक लोकेशन इसे दिल्ली-एनसीआर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दक्षिणी हरियाणा और पूर्वी राजस्थान और उत्तराखंड के लिए अत्यंत सुविधाजनक बनाती है. विकसित हो रही मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी इसे क्षेत्रीय विकास का मजबूत इंजन बना रही है.

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चार राज्यों का साझा कैचमेंट एरिया
जेवर एयरपोर्ट का कैचमेंट एरिया सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ आदि) तक सीमित नहीं है. यह हरियाणा के फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम और नूह क्षेत्रों और राजस्थान के भरतपुर, अलवर जैसे पूर्वी हिस्सों को भी प्रभावी रूप से कवर करता है. साथ ही यह उत्तराखंड से भी कनेक्टेड होगा. इस वजह से लाखों लोगों को निकटतम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मिलने जा रहा है.
हरियाणा के इन इलाकों से होगी कनेक्टिविटी
हरियाणा के औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों के लिए जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक गेम-चेंजर साबित होने जा रहा है. इसकी बेहतर कनेक्टिविटी फरीदाबाद, पलवल और आसपास के इलाकों को एयरपोर्ट से सीधे जोड़ेगी.
फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे इसका मुख्य हिस्सा है. यह लगभग 31 किमी लंबा छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसका निर्माण तेजी से चल रहा है. वर्तमान में फरीदाबाद से जेवर की दूरी करीब 90 किमी है, जो इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने पर मात्र 30-35 किमी रह जाएगी. यात्रा का समय दो घंटे से घटकर मात्र 15-20 मिनट रह जाएगा.
पलवल-नोएडा एयरपोर्ट एक्सप्रेसवे (लगभग 31 किमी) भी हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ पहुंचाएगा. इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिससे पलवल और आसपास के इलाकों से एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी.
इसके अलावा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने हरियाणा रोडवेज के साथ MoU साइन किया है. इसके तहत पलवल, फरीदाबाद समेत हरियाणा के कई शहरों से एयरपोर्ट तक सीधी बस सेवाएं शुरू होंगी.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का वल्लभगढ़ लिंक भी हरियाणा से जेवर एयरपोर्ट तक एक्सेस को और मजबूत बना रहा है. इन सभी प्रोजेक्ट्स से हरियाणा के निवासियों, उद्योगपतियों और व्यापारियों को यात्रा समय, लॉजिस्टिक्स लागत और नए आर्थिक अवसरों में बड़ा सुधार मिलेगा.
उत्तराखंड से कनेक्टिविटी
जेवर एयरपोर्ट के कैचमेंट एरिया में उत्तराखंड एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. एयरपोर्ट प्रबंधन ने उत्तराखंड परिवहन निगम के साथ एक समझौता (MoU) किया है, जिसके तहत एयरपोर्ट के संचालन के साथ ही देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी जैसे प्रमुख शहरों के लिए सीधी बस सेवाएं शुरू की जाएंगी. यह एयरपोर्ट उत्तराखंड के यात्रियों के लिए दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट के एक सुलभ विकल्प के रूप में उभरेगा, जिससे पहाड़ी राज्य के पर्यटन और व्यापार को नई गति मिलेगी. कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए इसे एक्सप्रेसवे और भविष्य में प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल लिंक से भी जोड़ा जा रहा है.
राजस्थान से भी मजबूत कनेक्टिविटी
राजस्थान के पूर्वी हिस्सों के लिए भी यह एयरपोर्ट सुविधाजनक साबित होगा. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से भरतपुर-मथुरा रूट से पहुंच बेहतर होगी. इंटरस्टेट बस सेवाओं में राजस्थान को शामिल करने की योजना है, जिससे पर्यटक और व्यापारी आसानी से जेवर पहुंच सकेंगे.
जेवर एयरपोर्ट से मिलेंगे ये लाभ
जेवर एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. फेज-1 में सालाना 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों की क्षमता के साथ शुरू होने वाला यह एयरपोर्ट एनसीआर के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों (खासकर यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर) के लोगों के लिए निकटतम विकल्प बनेगा. इससे यात्रा समय और सड़क पर ट्रैफिक जाम दोनों में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है.
YEIDA क्षेत्र में तेज औद्योगिक विकास हो रहा है. एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे लॉजिस्टिक्स हब के कारण हरियाणा और राजस्थान के व्यापारी अब कार्गो निर्यात-आयात के लिए जेवर को प्राथमिकता दे सकेंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत और समय दोनों बचेंगे.
ताजमहल, मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों की निकटता के कारण यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के तीनों राज्यों के पर्यटकों को बड़ा लाभ पहुंचाएगा. बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से पर्यटन क्षेत्र में नई गति आने की संभावना है. एयरपोर्ट, होटल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में लाखों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. YEIDA क्षेत्र को उत्तर भारत के प्रमुख मल्टी-मोडल इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना भी इसी से जुड़ी हुई है.
उत्तर भारत का प्रमुख कार्गो हब
जेवर को उत्तर भारत के बड़े कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है. फेज-1 में 87 एकड़ में मल्टी-मोडल कार्गो टर्मिनल तैयार है, जिसकी शुरुआती क्षमता 2.5 लाख टन प्रति वर्ष है (भविष्य में और विस्तार संभव). यह एयरसाइड से सीधे वेयरहाउसिंग से जुड़ा होगा, जिससे हरियाणा और राजस्थान के व्यापारियों को निर्यात-आयात में लागत और समय की बचत होगी.
पूर्वी राज्यों तक विस्तारित कनेक्टिविटी
एक्सप्रेसवे नेटवर्क (यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और भविष्य की परियोजनाओं) के जरिए जेवर की पहुंच पश्चिमी UP, हरियाणा और राजस्थान से आगे बढ़कर बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों तक भी प्रभावी लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी स्थापित करेगी. समूचा उत्तर भारत के साथ-साथ पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक राजमार्गों के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्शन विकसित होगा, जिससे कार्गो आवागमन में नई गति आएगी.
भविष्य को लेकर क्या है संभावनाएं
फेज-1 के बाद एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जाएगा. अंतिम चरण में इसमें 5 से 6 रनवे होंगे और पैसेंजर क्षमता 70 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है. स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख एयरपोर्ट मॉडल पर आधारित यह एयरपोर्ट नेट-जीरो एमिशन लक्ष्य के साथ भारत का पहला IGBC-प्रमाणित ग्रीन एविएशन हब बनेगा, जो पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन का बेहतरीन उदाहरण होगा.
जेवर एयरपोर्ट केवल उत्तर प्रदेश का नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत का साझा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है. यह हरियाणा के औद्योगिक शहरों, राजस्थान के पर्यटन-केंद्रित क्षेत्रों और पश्चिमी यूपी के विकास को एक साथ जोड़कर क्षेत्रीय समृद्धि को नई गति देगा. बेहतर कनेक्टिविटी, कम यात्रा समय, नए रोजगार और आर्थिक अवसरों के साथ 28 मार्च 2026 को जब पहली उड़ानें भरेंगी, तो यह तीन राज्यों की साझा उड़ान का प्रतीक बनेगा.
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