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This Article is From Nov 12, 2025

निठारी कांड: डी-5 कोठी, बच्चियों के कंकाल और पकाकर खाने के आरोप... 2006 का केस, 2025 में सभी बरी

निठारी कांड में गरीब परिवार की बच्चियों के साथ मार दिया गया. किसी ने दावा किया कि उन्हें पकाकर खा लिया गया तो किसी ने कुछ और. इससे भी ज्यादा पीड़ा वाली बात ये है कि इस मामले के दोनों आरोपी सभी मामलों में बरी कर दिए गए. जानिए क्यों...

निठारी कांड: डी-5 कोठी, बच्चियों के कंकाल और पकाकर खाने के आरोप... 2006 का केस, 2025 में सभी बरी
  • निठारी गांव के सेक्टर 31 में 2006 में मानव खोपड़ियां और कंकाल मिलने से एक बड़ा हत्याकांड उजागर हुआ था.
  • सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को इस हत्याकांड के मुख्य आरोपियों के रूप में गिरफ्तार किया गया था.
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को सभी मामलों में दोषमुक्त करते हुए रिहाई का आदेश दिया है.

निठारी. कभी नोएडा के अन्य जगहों की तरह एक सामान्य सा इलाका था, मगर 29 दिसंबर 2006 से पूरे देश में ये खौफ का नाम बन गया. अक्टूबर 2006 में या उससे पहले ही नोएडा के सेक्टर 31 से ऐसी खबरें लगातार आ रही थीं कि वहां से कुछ गरीब परिवारों के बच्चे लगातार गायब हो रहे हैं और पुलिस उन बच्चों को ढूंढ़ नहीं पा रही है. इसी दौरान पायल नाम की एक लड़की नोएडा के सेक्टर 31 की गायब हो गई है. उस लड़की की तलाश करती पुलिस को उसके मोबाइल की जानकारी मिली. पायल का मोबाइल पुलिस को एक रिक्शे वाले के पास मिला. रिक्शे वाले ने पुलिस को बताया कि उसे यह मोबाइल सेक्टर 31 की डी-5 कोठी के एक शख्स ने दिया है. पुलिस रिक्शे वाले को लेकर वहां पहुंची. वहां से 16 मानव खोपड़ियां, कंकाल के अवशेष और कपड़ों के टुकड़े मिले. कहा गया ये उन्हीं गायब बच्चियों की खोपड़ियां थीं. बंगले के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और घरेलू सहयोगी सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया. उससे पूछताछ हुई और फिर खुलासा हुआ देश और दुनिया को चौंका देने वाले निठारी कांड का.  

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आज रिहा होगा कोली

निठारी हत्याकांड का आरोपी सुरेंद्र कोली दो साल से गौतमबुद्ध नगर की लुक्सर जेल में बंद है और सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी करने का आदेश जारी कर दिया है. जेल अधीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि करीब दो साल पहले गाजियाबाद जेल से सुरेंद्र कोली को लुक्सर जेल भेजा गया था. उसकी पत्नी और बेटे अक्सर उससे मिलने आते थे, इसके अलावा उसके कुछ रिश्तेदार भी कई बार उससे मिलने आए थे. जेल अधीक्षक ने बताया कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद आदेश की कॉपी गाजियाबाद जिला न्यायाधीश को भेजी जाएगी और इसके बाद आदेश की कॉपी लुक्सर जेल आएगी. बुधवार तक यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है और इसके बाद कोली को रिहा किया जाएगा. 

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क्यों बरी किया गया 

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को इस तरह के आखिरी मामले में आरोपों से बरी कर दिया और आदेश दिया कि अगर किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता न हो, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए. निठारी हत्याकांड का यह 13वां मामला था, जिसमें कोली को बरी किया गया. उसे पहले ही 12 अन्य संबंधित मामलों में बरी किया जा चुका है. निठारी में 15 वर्षीय लड़की के कथित बलात्कार और हत्या से संबंधित मामले में कोली की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली सुधारात्मक याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून अनुमान या पूर्वधारणा के आधार पर दोषसिद्धि की अनुमति नहीं देता है. पुनर्विचार याचिका सहित अन्य सभी विकल्पों का उपयोग करने के बाद किसी पक्ष के लिए उपलब्ध अंतिम कानूनी सहारा सुधारात्मक याचिका होती है. प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि निठारी में हुए अपराध जघन्य थे और परिवारों की पीड़ा अथाह थी.

  1. पीठ ने कहा, ‘‘यह अत्यंत खेद की बात है कि लंबे समय तक की गई जांच के बावजूद, वास्तविक अपराधी की पहचान इस तरह से स्थापित नहीं हो सकी है, जो कानूनी मानकों को पूरा करे.'' न्यायालय ने कहा कि संदेह, चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, उचित संदेह से परे सबूत का स्थान नहीं ले सकता, तथा न्यायालय वैधता के स्थान पर आसान समाधान को प्राथमिकता नहीं दे सकते.
  2. पीठ ने कहा, ‘‘निर्दोष होने की धारणा उस समय तक बनी रहती है जब तक अपराध साबित न हो जाए, और यह साबित होना चाहिए स्वीकृत और विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से; और जब साक्ष्य विफल हो जाते हैं, तो केवल वैध परिणाम यह है कि सजा को रद्द कर दिया जाए, भले ही मामला भयानक अपराध से संबंधित ही क्यों न हो. जब जांच समय पर, पेशेवर तरीके से और संवैधानिक मानकों के अनुसार की जाती है, तो सबसे कठिन रहस्यों को भी सुलझाया जा सकता है और कई अपराधों को शुरुआत में ही हस्तक्षेप से रोका जा सकता है.''
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  3. पीठ ने कहा कि इस मामले में असली अपराधी की पहचान करने की प्रक्रियाओं में लापरवाही और देरी ने तथ्यों की खोज की प्रक्रिया को कमजोर किया और उन रास्तों को बंद कर दिया, जो असली अपराधी की पहचान कर सकते थे. पीठ ने कहा, ‘‘खुदाई शुरू होने से पहले स्थल को सुरक्षित नहीं किया गया, कथित खुलासे को उसी समय दर्ज नहीं किया गया, रिमांड कागजात में विरोधाभासी विवरण थे, और याचिकाकर्ता (कोली) को समय पर अदालत निर्देशित चिकित्सीय परीक्षण के बिना लंबी अवधि तक पुलिस हिरासत में रखा गया.''
  4. पीठ ने गौर किया कि महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अवसर गंवा दिए गए, जब पोस्टमार्टम सामग्री और अन्य फॉरेंसिक निष्कर्ष समय पर और सही तरीके से रिकॉर्ड में नहीं लाए गए और जब घर की तलाशी में कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिसे फॉरेंसिक तरीके से कथित घटनाओं से जोड़ा जा सके. न्यायालय ने कहा कि जांच ने परिवार और पड़ोस के स्पष्ट गवाहों से पर्याप्त पूछताछ नहीं की और सामग्रीगत सुरागों का पालन नहीं किया, जिसमें सरकारी समिति द्वारा उठाया गया अंग व्यापार का पहलू भी शामिल था. पीठ ने कहा, ‘‘प्रत्येक चूक ने साक्ष्य की विश्वसनीयता और उत्पत्ति को कमजोर किया और सच तक पहुँचने के रास्ते को संकीर्ण कर दिया.''

निठारी हत्याकांड का घटनाक्रम

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  • 29 दिसंबर, 2006: निठारी गांव से सटे नोएडा के सेक्टर 31 में बंगला संख्या डी-5 के पीछे नाले में बोरियों में भरे 16 मानव खोपड़ियां, कंकाल के अवशेष और कपड़ों के टुकड़े मिले.
  • 30 दिसंबर, 2006: कुछ और कंकाल मिले, जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में पांच पुलिसकर्मी निलंबित.
  • 11 जनवरी, 2007: सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली.
  • 13 फरवरी, 2009: गाजियाबाद की अदालत ने निठारी के पहले मामले में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को मौत की सजा सुनाई.
  • 12 फरवरी, 2009: गाजियाबाद की विशेष सत्र अदालत ने पंढेर और कोली को 2005 में 14 वर्षीय रिम्पा हलदर की हत्या का दोषी ठहराया.
  • 12 मई, 2010: कोली को दूसरे मामले में मौत की सजा सुनाई गई.
  •  2010 से 2012: कोली को तीन और मामलों में मौत की सजा सुनाई गई.
  • 16 जनवरी, 2021: कोली को निठारी के 12वें मामले में मौत की सजा सुनाई गई, पंढेर बरी.
  • 26 मार्च, 2021: गाजियाबाद की अदालत ने सबूत नष्ट करने से जुड़े मामले में कोली को बरी कर दिया.
  • 16 अक्टूबर, 2023: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोली और पंढेर को बरी किया.
  •  3 मई, 2024: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया.
  • 3 अप्रैल, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई शुरू की.
  • 30 जुलाई, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आरोपी को बरी करने के फैसले के खिलाफ 14 याचिकाएं खारिज कीं.
  • 7 अक्टूबर, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने कोली की सुधारात्मक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा, जिसमें उसने एक मामले में अपनी दोषसिद्धि और मौत की सजा को चुनौती दी थी.
  • 11 नवंबर, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने कोली की सुधारात्मक याचिका स्वीकार की और उसे मामले में बरी कर दिया.

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