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4 बच्चे, एक परीक्षा और 20 लाख रुपये का राज... जयपुर से शुरू हुई NEET पेपर लीक की कहानी

दिनेश और मांगीलाल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्होंने यह पेपर गुरुग्राम के आयुर्वेदिक चिकित्सा के छात्र यश यादव से भारी रकम देकर खरीदा था. यश यादव को लेकर दावा है कि वह पेपर लीक और नकल गिरोहों का पुराना खिलाड़ी है.

4 बच्चे, एक परीक्षा और 20 लाख रुपये का राज... जयपुर से शुरू हुई NEET पेपर लीक की कहानी
NEET Paper Leak: मांगीलाल-दिनेश

जयपुर ग्रामीण के दो भाई दिनेश बिवाल और मांगीलाल अब NEET पेपर लीक मामले की जांच के केंद्र में हैं. जिस परिवार के 4 बच्चे 2025 से NEET परीक्षा में शामिल हुए हैं, उसी परिवार के ये दोनों भाई अब उस कथित नेटवर्क की अहम कड़ी माने जा रहे हैं, जिसने राजस्थान पुलिस को इस मामले की मनी ट्रेल तक पहुंचाया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिनेश और मांगीलाल ने यह कथित लीक पेपर सीकर के NEET अभ्यर्थियों तक राकेश कुमार मंडावरिया के जरिए पहुंचाया. राकेश मंडावरिया सीकर में आरके कंसल्टेंसी नाम से एक करियर गाइडेंस सेंटर चलाता है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यहीं से यह कथित NEET गेस पेपर सीकर में तेजी से फैलना शुरू हुआ. बाद में सीकर के ही एक व्हिसलब्लोअर ने NTA को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पूरे कथित घोटाले का खुलासा हुआ. 

15 लाख में खरीदा NEET गेस पेपर

राकेश ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने यह पेपर जयपुर ग्रामीण के दो भाइयों दिनेश और मांगीलाल से 15 लाख रुपये में खरीदा था. दिनेश और मांगीलाल जयपुर के बाहरी इलाके जमवारामगढ़ में रहते हैं. दोनों प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं और किसान परिवार से आते हैं. दिनेश का बेटा ऋषि सीकर के एक कोचिंग संस्थान में NEET की तैयारी कर रहा था और दिनेश जमवारामगढ़ से सीकर के लगातार चक्कर लगाता था.

राजस्थान पुलिस ने सीकर कनेक्शन की जांच तब शुरू की, जब राकेश मंडावरिया से पूछताछ की गई. जांच में वह उस केंद्र के रूप में सामने आया, जहां से कथित “गेस पेपर” का प्रसार शुरू हुआ था. 

संयोग से मांगीलाल के तीन बच्चे भी 2025 में NEET परीक्षा में बैठे थे. हालांकि परिवार का दावा है कि उनमें से केवल दो ही परीक्षा पास कर पाए और उनके अंक भी बहुत कम थे. एक बच्चा पास नहीं हो पाया और वो अब भी नीट की तैयारी कर रहा है. 2025 में दो बच्चे जो पास हुए, उनके अंक कम थे और पढ़ाई के लिए उन्हें फिर अलग से मैनेजमेंट कोटा से एडमिशन लेना पड़ा. राकेश मंडावरिया से मिले इनपुट के बाद जब पुलिस ने दिनेश और मांगीलाल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, तब जांच एजेंसियों को लगा कि वे इस मामले की सबसे अहम कड़ी तक पहुंच चुके हैं. जो उन्हें मनी ट्रेल और हरियाणा कनेक्शन तक ले जा सकती थी. 

आमने-सामने बैठाकर तीनों से पूछताछ

दिनेश और मांगीलाल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्होंने यह पेपर गुरुग्राम के आयुर्वेदिक चिकित्सा के छात्र यश यादव से भारी रकम देकर खरीदा था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कथित NEET “गेस पेपर” यश यादव से 15 से 20 लाख रुपये के बीच खरीदा गया था. सूत्रों का कहना है कि अब CBI यश यादव, दिनेश और मांगीलाल को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है, ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके. पुलिस सूत्रों का यह भी दावा है कि यश यादव पेपर लीक और नकल गिरोहों का पुराना खिलाड़ी है और 2024 के NEET पेपर लीक मामले में भी उसकी कथित भूमिका रही हो सकती है. 

जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर खरीदने के बाद दिनेश और मांगीलाल ने इस सौदे से मुनाफा कमाने का फैसला किया और इसे सीकर में राकेश मंडावरिया को 15 लाख रुपये में बेच दिया. इसके बाद राकेश ने कथित तौर पर इस “गेस पेपर” को 3 से 5 लाख रुपये तक में आगे बेचा. दिनेश बिवाल का बेटा भी 3 मई 2026 को हुई NEET परीक्षा में शामिल हुआ था. पुलिस को शक है कि यह पेपर उसे परीक्षा पास कराने के लिए खरीदा गया था. NDTV जब जमवारामगढ़ स्थित दिनेश और मांगीलाल के घर पहुंचा, तो परिवार के सदस्यों ने इन आरोपों को साजिश बताया और दोनों भाइयों को निर्दोष कहा. 

दिनेश बिवाल की पत्नी रजनी ने NDTV से कहा कि उनका बेटा ऋषि सोमवार से घर नहीं लौटा है. वहीं मांगीलाल की पत्नी सोनू ने कहा कि उनके चार बच्चों में से केवल दो ने 2024 में परीक्षा पास की थी और उनके नंबर भी बहुत कम थे. परिवार ने दावा किया कि दिनेश और मांगीलाल या उनके बच्चों का NEET परीक्षा में किसी भी तरह की नकल या धोखाधड़ी से कोई संबंध नहीं है. इस बीच, दिनेश बिवाल अब राजनीतिक हमलों का भी केंद्र बन गए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली जैसे कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर दिनेश की बीजेपी नेताओं के साथ तस्वीरें साझा की हैं और दावा किया है कि दिनेश ग्रामीण जयपुर में बीजेपी से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ दिखाई देता है.

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