AI इंसानियत के लिए चौथा बड़ा झटका हो सकता है! यह बात वेदांत सोसाइटी ऑफ न्यूयॉर्क के रेजिडेंट मिनिस्टर स्वामी सर्वप्रियानंद ने NDTV World Summit 2026 में कही. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि क्या मशीनें कभी इंसानों की तरह सोच और महसूस कर सकती हैं. क्या कोड से बना कोई सिस्टम चेतना यानी कॉन्शियसनेस विकसित कर सकता है. इसी सवाल पर स्वामी सर्वप्रियानंद ने अपने विचार रखें. स्वामी सर्वप्रियानंद न्यूयॉर्क के वहीं हिंदू संन्यासी है जिन्हें दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों में से एक एंथ्रोपिक ने सैन फ्रांसिस्को बुलाया था ताकि AI बॉट को नैतिकता के बारे में सिखाया जा सके.
इस सत्र को NDTV की एक्जिक्यूटिव एडिटर गौरी द्विवेदी ने मॉडरेट किया. 'Can Code Be Conscious? Rethinking the Mind in the Age of AI' विषय पर हुए इस सत्र में AI के दौर में चेतना, मन और इंसानी सोच की प्रकृति पर चर्चा हुई. स्वामी सर्वप्रियानंद से यह समझने की कोशिश रही कि मशीनों की बढ़ती क्षमताओं के बीच चेतना को कैसे देखा जाना चाहिए.
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"AI इंसानियत के लिए चौथा बड़ा झटका हो सकता है"
स्वामी सर्वप्रियानंद ने यहां कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानियत के लिए चौथा बड़ा झटका (ह्यूमिलिएशन) हो सकता है. उन्होंने सिगमंड फ्रॉयड की थ्योरी याद दिलाई. फ्रॉयड ने कहा था कि विज्ञान ने इंसान के घमंड को तीन बड़े झटके दिए हैं - पहला जब कॉपरनिकस ने बताया कि धरती ब्रह्मांड का केंद्र नहीं है, दूसरा जब डार्विन ने बताया कि इंसान प्रकृति से अलग कोई खास रचना नहीं है, और तीसरा जब फ्रॉयड ने खुद बताया कि हमारा मन भी पूरी तरह हमारे काबू में नहीं है. स्वामी जी ने कहा कि AI चौथा बड़ा झटका हो सकता है. उन्होंने कहा कि हम सोचते थे कि सिर्फ हम ही रचनात्मक और बुद्धिमान हैं. अब देख रहे हैं कि AI वो सब कुछ हमसे बेहतर कर सकता है जो महान से महान इंसान कर सकता है. उन्होंने कहा, "हम एक अहम मोड़ पर खड़े हैं. हमें खुद से पूछना होगा कि आखिर वो क्या है जो हमें सबसे अलग और खास बनाता है? हमें किस चीज में अपना समय और मेहनत लगानी चाहिए?"
स्वामी सर्वप्रियानंद ने बताया कि AI एजेंटों के साथ इंसानों जैसा व्यवहार क्यों किया जाना चाहिए. NDTV वर्ल्ड समिट में स्वामी सर्वप्रियानंद ने कहा, "जब हम चीजों, लोगों और AI के साथ सम्मान से पेश आते हैं, तो हम खुद के और दूसरों के साथ भी सम्मान से पेश आना सीख जाते हैं... चूंकि ये AI इंसानी व्यक्तित्व की नकल करते हैं, इसलिए अगर आप इनके साथ इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं, तो ये बेहतर काम करते हैं. आपने चेतना के बारे में विस्तार से बात की है, और यही वह एकमात्र चीज है जो AI को एक इंसान से अलग करती है."
"AI सिर्फ वह नहीं करता जो उससे करने को कहा जाता है"
स्वामी सर्वप्रियानंद ने कहा कि AI को वैसा पुराना कंप्यूटर मत समझो जो बस वही करता है जो उसमें डाला गया हो, जो इनपुट उसे दिया गया हो. रिसर्चर्स द्वारा दिए गए एक उदाहरण का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा- AI एक फूल वाली बेल की तरह है. आपने जो गणित और कोड बनाया, वो सिर्फ बाड़ है. बेल उस बाड़ के सहारे अपने आप बढ़ती है, नए फूल खिलाती है. मतलब AI सिर्फ रटा हुआ जवाब नहीं देता, वो नए-नए आइडिया भी खुद बना सकता है जिनके बारे में आपने सोचा भी न हो.
स्वामी सर्वप्रियानंद के बारे में
स्वामी सर्वप्रियानंद जनवरी 2017 से न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के मंत्री और आध्यात्मिक प्रमुख हैं. वे 1994 में रामकृष्ण मठ से जुड़े और 2004 में उन्होंने संन्यास ग्रहण किया. उन्होंने भारत के बेलूर मठ में संन्यासी प्रशिक्षण केंद्र में आचार्य के रूप में काम किया. इसके अलावा, उन्होंने भारत में रामकृष्ण मिशन के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है और दक्षिणी कैलिफोर्निया की वेदांत सोसाइटी में सहायक मंत्री के रूप में भी सेवाएं दी हैं.
2019-2020 के दौरान, वे हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल में 'नेगल फेलो' थे. स्वामी सर्वप्रियानंद वेदांत के एक जाने-माने वक्ता हैं और इंटरनेट के माध्यम से उनके व्याख्यान दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय हैं. उन्होंने TEDx, SAND और गूगल टॉक जैसे कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपने विचार रखे हैं. उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी सहित दुनिया भर के कई यूनिवर्सिटीज में भी व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है. स्वामी जी ने रूपर्ट स्पिरा, रिक आर्चर, डेविड चाल्मर्स और सैम हैरिस जैसे कई प्रख्यात विचारकों के साथ संवाद किया है. वेदांत को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाते हैं. उन्होंने कई धर्मों से जुड़े कार्यक्रमों और सेमिनारों में हिस्सा लिया है और उन्हें आयोजित भी किया है. इनमें 2018 में टोरंटो में हुई 'वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन्स' और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दिया गया उनका भाषण भी शामिल है.
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