यूक्रेन युद्ध से मिले सबक और ड्रोन आधारित युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप ने दुनिया की सेनाओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में अमेरिका के पूर्व सीआईए चीफ डेविड पेट्रियस ने कहा था कि अब केवल नए हथियार खरीदने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सेनाओं को 'संस्थागत बदलाव' करना होगा. उनके इस बयान पर अब भारत के तीन पूर्व सैन्य प्रमुखों ने अपनी राय रखी है. तीनों ने माना कि युद्ध का चरित्र तेजी से बदल रहा है, लेकिन भारत को इस बदलाव की दिशा और गति दोनों पर गंभीरता से विचार करना होगा.
पेट्रियस ने क्यों दी थी चेतावनी?
डेविड पेट्रियस ने कहा कि दुनिया की हर सेना को तत्काल बड़े संस्थागत बदलाव की जरूरत है. उनके मुताबिक यह केवल आधुनिकीकरण या नए हथियार खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि युद्ध की पूरी अवधारणा बदल रही है. उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों पक्ष रोजाना 10-10 हजार से ज्यादा ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं. ऐसे हालात में सैन्य ढांचे, प्रशिक्षण, नेतृत्व, खरीद प्रक्रिया, रक्षा उद्योग के साथ संबंध और यहां तक कि सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के तरीके भी बदलने होंगे. उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में ड्रोन इतना बड़ा खतरा बन चुके हैं कि पीछे मौजूद सैन्य ठिकाने और सैनिक भी सुरक्षित नहीं माने जा सकते.

पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.पी. मलिक ने क्या सलाह दिया?
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.पी. मलिक ने पेट्रियस के भाषण को 'गंभीर और दूरदर्शी' बताया. उन्होंने कहा कि यूक्रेन-रूस युद्ध के अनुभवों ने दिखा दिया है कि युद्ध में परिवर्तनकारी बदलाव आ चुके हैं और सेनाओं को उसके अनुसार ढलना होगा.
उन्होंने कहा कि अगर भविष्य का युद्ध अधिक स्वायत्त और तकनीक आधारित होने जा रहा है तो भारत को उसके अनुरूप अपने संगठनात्मक ढांचे पर काम शुरू करना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि ऐसे बदलाव रातोंरात नहीं हो सकते.
बदलाव जरूरी, लेकिन भारत की गति बड़ी चुनौती: पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने कहा कि पेट्रियस की बातों से असहमत होने का कोई कारण नहीं है. उनके अनुसार पेट्रियस यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों पर करीबी नजर रखते हैं और उन्होंने सही मुद्दा उठाया है.
हालांकि उन्होंने आगाह किया कि सैन्य मामलों में किसी 'क्रांति' को लागू करना आसान नहीं होता. उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवस्था में कई सामान्य फैसलों को लागू होने में सालों लग जाते हैं. मिसाल के तौर पर उन्होंने तीनों सेनाओं के थिएटर कमांड ढांचे का जिक्र किया, जिस पर सालों से चर्चा चल रही है.
बदलाव हो, लेकिन झटके में नहीं: पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एस.पी. धारकर
लेकिन पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एस.पी. धारकर की राय थोड़ी अलग हैं. उन्होंने कहा कि पेट्रियस की ओर से उठाए गए मुद्दे अहम तो हैं और सैन्य क्षमताओं में बदलाव की दरकार से इनकार नहीं किया जा सकता.
धारकर ने कहा कि सेना के विकास और बदलाव की एक तय प्रक्रिया होती है. इसलिए आवश्यक सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए. उन्होंने माना कि वैश्विक हालात और युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए बड़े बदलाव अब अनिवार्य हो गए हैं, लेकिन उन्हें सुव्यवस्थित तरीके से लागू करना ही बेहतर रास्ता होगा.
भारत के सामने नई चुनौती क्या है?
तीनों पूर्व सैन्य प्रमुखों की राय में एक बात समान दिखी कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियां और नई तकनीकें भविष्य के युद्धों की दिशा तय करेंगी. हालांकि इस बदलाव को लेकर दृष्टिकोण अलग-अलग रहा.
जनरल मलिक ने संस्थागत बदलावों की तैयारी पर जोर दिया, एडमिरल अरुण प्रकाश ने निर्णय प्रक्रिया और राजनीतिक इच्छाशक्ति को अहम बताया, जबकि एयर मार्शल धारकर ने संतुलित और चरणबद्ध परिवर्तन की वकालत की है.
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