- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के अनुसार तृणमूल कांग्रेस की सत्ता छिनने की संभावना प्रबल है
- पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस को लगभग 144 और बीजेपी को 143 सीटें मिल सकती हैं
- बीजेपी को पिछली बार 71 सीटें मिली थीं, जो इस बार दोगुनी होकर सत्ता में आने का अनुमान भी है
West Bengal Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल की मानें तो 15 साल की सरकार के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस के हाथों से सत्ता खिसक सकती है. बंगाल के सभी एग्जिट पोल के औसत यानी पोल ऑफ पोल्स की बात करें तो टीएमसी को 144, बीजेपी को 143 सीटें मिल सकती हैं. कांग्रेस को 2 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि पी-मार्क, मैट्राइज, पीपल्स पल्स और चाणक्य स्ट्रैटजी के एग्जिट पोल के अलग-अलग आंकड़ों से बीजेपी और टीएमसी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं. बंगाल में बीजेपी सत्ता में आई तो यह पहली बार होगा. बीजेपी को पिछले चुनाव में 71 सीटें मिली थीं और उससे पहले 2016 के चुनाव में महज तीन सीटें मिली थीं. अगर इस बार वो सरकार बनाती है तो सीटों में दोगुना इजाफा होगा.
पी-मार्क (P MarQ)
टीएमसी: 118-138
बीजेपी : 150-175
कांग्रेस : 00
लेफ्ट : 00
अन्य : 2-6
मैट्राइज (Matrize)
टीएमसी: 125-140
बीजेपी : 146-161
कांग्रेस : 00
लेफ्ट : 00
अन्य : 6-10
पीपल्स पल्स (Peoples Pulse)
टीएमसी: 178-189
बीजेपी : 95-110
कांग्रेस : 1-3
लेफ्ट : 0-1
अन्य : 00
चाणक्य स्ट्रैट्जी (Chanakya Exit Poll)
टीएमसी: 130-140
बीजेपी : 150-160
कांग्रेस : 00
लेफ्ट : 00
अन्य : 6-10
पोल डायरी का एग्जिट पोल
बीजेपी : 142 से 171 सीटें
टीएमसी : 99-127 सीटें
कांग्रेस : 3 से 5 सीटें
लेफ्ट : 2 से 3 सीटें
प्रजा पोल का एग्जिट पोल
BJP :193
TMC : 100
बंगाल में दो चरणों में हुई वोटिंग
पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव के दो चरणों में बंपर वोटिंग हुई है. पहले चरण मे ं93 फीसदी वोटिंग और दूसरे चरण मे ं90 फीसदी वोट पड़े हैं. एसआईआर के बाद वोट कटने के डर से इस बार बड़ी तादाद में प्रवासी बंगाल लौटकर आए हैं और वोट डालने पहुंचे. युवाओं और महिलाओं की भी मतदान में बढ़ चढ़कर भागीदारी देखी गई. बंगाल एग्जिट पोल में इसका असर दिख रहा है.
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मोदी-योगी और शाह की तिकड़ी
बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं. ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार में भ्रष्टाचार, सिंडिकेट, कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया. सिंगुर, नंदीग्राम जैसे इलाकों में बेरोजगारी के मुद्दे को भी पार्टी ने खूब उभारा. साथ ही महिलाओं को हर महीने तीन हजार जैसे चुनावी वादों से भी टीएमसी को काउंटर करने की कोशिश की. महिला आरक्षण बिल को लेकर भी पार्टी ने तृणमूल को जमकर घेरा.
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