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2003 में मर्डर, 2007 में सबूतों के अभाव में बरी फिर हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा... अब अमित जोगी की सजा पर SC ने लगाई रोक, पूरी टाइमलाइन

NCP नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को स्थगित कर दिया है. मामले की सुनवाई जारी रहेगी.

2003 में मर्डर, 2007 में सबूतों के अभाव में बरी फिर हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा... अब अमित जोगी की सजा पर SC ने लगाई रोक, पूरी टाइमलाइन

NCP नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने अमित जोगी की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले पर भी स्थगन आदेश दे दिया है.

SC से बड़ी राहत

दरअसल, अमित जोगी ने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में खुद को दोषी ठहराने वाले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है.

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23 साल पुराना है मामला

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने इस हत्या मामले में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया था. दो अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था.

यह मामला वर्ष 2003 में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की हत्या से जुड़ा है. इस केस में साल 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था. बाद में हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी माना. अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली इस राहत के बाद अमित जोगी को तत्काल जेल जाने से फिलहाल राहत मिल गई है. मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगी.

राम अवतार जग्गी मर्डर केस टाइमलाइन 

4 जून साल 2003 में रायपुर के मौदहापारा इलाके में NCP नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. जग्गी उस समय विद्याचरण शुक्ला के करीबी और पार्टी के कोषाध्यक्ष थे. जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजित जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था. 

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CBI ने अमित जोगी को हत्याकांड में मास्टरमाइंड बताया

राम अवतार जग्गी मर्डर केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने पूर्व छ्त्तीसगढ़ सीएम अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को हत्याकांड में मास्टर माइंड बताते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी. साल 2004 से 2007 तक निचली अदालत में चले केस के बाद साल 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे.

साल 2007: सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए थे अमित जोगी 

साल 2007 से 2025 तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2011 में CBI ने अमित जोगी की रिहाई के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन देरी के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया. बीते 6 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील में हुई 1,373 दिनों की देरी को माफ करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया.

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2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया

बीते 2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया और हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को अवैध और विकृत बताते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उन्हें आज राहत मिली है. 

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