- मुंबई क्राइम ब्रांच ने पठानवाड़ी इलाके में फर्जी पासपोर्ट और हवाला नेटवर्क मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया
- आरोपी मोहम्मद इस्लाम इस्माइल खान के लिए दूसरे नाम से महज तीन हजार रुपये में फर्जी पासपोर्ट बनवाया गया था
- आरोपी मूलत: आंध्र प्रदेश का रहने वाला है, जिसने कुवैत में ड्राइवर से लॉन्ड्री बिजनेस तक का दावा किया था
मुंबई में फर्जी पासपोर्ट और संदिग्ध हवाला नेटवर्क को लेकर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है. स्पेशल ब्रांच–1 की एंटी टेररिस्ट यूनिट ने कुरार के पठानवाड़ी इलाके में छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान मोहम्मद इस्लाम इस्माइल खान उर्फ सलीम रहमतुल्लाह शेख के तौर पर हुई है. जांच में सामने आया है कि आरोपी के लिए “सलीम रहमतुल्लाह शेख” नाम से फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाया गया था. यह पासपोर्ट महज ₹3000 में बनवाया गया और इसे तैयार कराने में बुट्टन शेख नाम का शख्स अहम कड़ी बताया जा रहा है, जो अब क्राइम ब्रांच के रडार पर है.
आंध्र से कुवैत तक आरोपी की टाइमलाइन
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मूल रूप से आंध्र प्रदेश का रहने वाला है और 1976 में उसका जन्म हुआ था. उसने मुंबई में 12वीं तक पढ़ाई की और फिर 1998 में काम के सिलसिले में कुवैत चला गया, जहां वह ड्राइवर के तौर पर काम करता था. बाद में उसने दावा किया कि एक अरब नागरिक ने उसे लॉन्ड्री का बिजनेस गिफ्ट किया, जिसे बढ़ाकर उसने तीन दुकानों तक पहुंचा दिया. साल 2004 में उसने कुवैत में ही अपना पासपोर्ट रिन्यू भी कराया था. बताया जा रहा है कि पारिवारिक विवादों के चलते वह वापस मुंबई लौटा, जहां उसके खिलाफ कुरार पुलिस स्टेशन में घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज हुआ.
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फर्जी पहचान पर पासपोर्ट, एजेंसी के जरिए विदेश भेजने का खेल
इसी दौरान दोबारा कुवैत जाने में दिक्कतें आने लगीं, जिसके बाद उसने 2007 में आंध्र प्रदेश जाकर फर्जी पहचान के साथ नया पासपोर्ट बनवा लिया. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने मलाड ईस्ट के पठानवाड़ी इलाके में एक एजेंसी शुरू की थी. इस एजेंसी के जरिए कुवैत जाने वालों के इमिग्रेशन से जुड़े काम किए जाते थे. इस काम में उसका बेटा अबू बकर और उसका साथी इरफान भी शामिल थे. पुलिस को शक है कि आरोपी और बुट्टन शेख मिलकर लोगों को फर्जी पासपोर्ट पर विदेश भेजने का नेटवर्क चला रहे थे.
हवाला और आतंकी फंडिंग एंगल की जांच
जो लोग कुवैत जाना चाहते थे, उन्हें इसी एजेंसी के जरिए प्रोसेस कराया जाता था, भले ही उनके दस्तावेज फर्जी क्यों न हों. अब क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने लोगों के फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए और कितनों को अवैध तरीके से विदेश भेजा गया. साथ ही, इस पूरे मामले में हवाला ट्रांजैक्शन और संभावित आतंकी फंडिंग के एंगल की भी गहराई से जांच की जा रही है.
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