New Delhi:
सुप्रीम कोर्ट ने केरल की याचिका खारिज कर दी। केरल ने अपनी याचिका में बांध की ऊंचाई 120 फीट तक सीमित करने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों की भलाई के लिए बांध जरूरी है। और केरल को गैर-जरूरी अफवाह फैलाने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। तमिलनाडु और केरल के बीच मुल्लापेरियार बांध को लेकर कानूनी लड़ाई में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दायर चार याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें से दो याचिकाएं तमिलनाडु की, एक केरल की और एक डीएमके की ओर से दायर की गई थी।सर्वोच्च न्यायालय ने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा के लिए तमिलनाडु सरकार द्वारा वहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तैनाती के अनुरोध पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डीके जैन की अध्यक्षतावाली संविधान पीठ ने सरकार से गुरुवार तक इस मामले में जवाब मांगा है। न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार से भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि बांध की ऊंचाई 136 फीट से अधिक नहीं की जाए, जैसा कि पूर्व के आदेश में कहा गया है। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बांध के पास सीआईएसएफ की तैनाती के लिए केन्द्र को निर्देश देने और केरल सरकार को अफवाह फैलाने से रोकने की मांग की थी। वहीं केरल सरकार चाहती है कि बांध का पानी 136 फीट से घटाकर 120 फीट कर दिया जाए। केरल सरकार इस पुराने बांध को तोड़कर नया बांध बनाना चाहती है जबकि तमिलनाडु सरकार इसका विरोध कर रही है। पहले से ही इस विवाद की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन करके बांध की सुरक्षा की जांच करने को कहा था।
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मुल्लापेरियार बांध, सुप्रीम कोर्ट, सुनवाई